असिस्टेंट प्रोफेसर बहाली के ड्राफ्ट में सुधार की मांग:AISF के राष्ट्रीय सचिव ने राज्यपाल को लिखा पत्र, कहा- संविधान का उल्लंघन हो रहा

असिस्टेंट प्रोफेसर बहाली के ड्राफ्ट में सुधार की मांग:AISF के राष्ट्रीय सचिव ने राज्यपाल को लिखा पत्र, कहा- संविधान का उल्लंघन हो रहा

बिहार के विश्वविद्यालयों में होने वाली असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली के ड्राफ्ट में अनियमितता का आरोप लगाते हुए सुधार के लिए एआईएसएफ के राष्ट्रीय सचिव अमीन हमजा ने राज्यपाल को पत्र लिखा है। जिसमें कहा गया है कि जारी ड्राफ्ट स्टैच्यूट-2025 के कतिपय प्रावधान बिहार के हजारों शोधार्थियों और अभ्यर्थियों के भविष्य को अंधकारमय बनाने वाली है। अमीन हमजा ने कहा है कि इस मसले पर AISF का स्पष्ट मानना है कि उम्र सीमा को 55 साल से घटाकर 45 साल करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत प्रदत्त अवसर की समता का उल्लंघन है। इसके साथ ही यह उन अभ्यर्थियों के साथ घोर अन्याय है, जिन्होंने दशकों तक शोध कार्य किया। बिहार के युवाओं के अधिकारों पर प्रहार नियुक्ति प्रक्रिया में पीएचडी (Ph.D.), शोध पत्र प्रकाशनों और पूर्व के शिक्षण अनुभव के वेटेज को खत्म करना उच्च शिक्षा की गुणवत्ता के साथ समझौता है। यह शोध की संस्कृति को हतोत्साहित करने वाला एक अकादमिक विरोधी कदम है। इस ड्राफ्ट में डोमिसाइल नीति के स्पष्ट प्रावधानों का अभाव बिहार के युवाओं के अधिकारों पर प्रहार है। एक लोक कल्याणकारी राज्य के रूप में बिहार के मेधावी युवाओं के हितों का संरक्षण करना शासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। प्रस्तावित 160 अंकों की लिखित परीक्षा और अनुभव को शून्य मान लेना उन अतिथि शिक्षकों (Guest Faculty) के प्रति असंवेदनशील है, जिन्होंने सालों से विश्वविद्यालय की व्यवस्था को संभाला है। इसलिए AISF मांग करता है कि अधिकतम उम्र सीमा को 55 साल यथावत रखा जाए। पीएचडी और शोध अनुभव के अंक (Points) पहले की तरह अनिवार्य रूप से जोड़े जाएं। नियुक्ति प्रक्रिया में बिहार के स्थायी निवासियों के लिए उचित संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। इसके मद्देनजर AISF आशा करता है कि लोकतांत्रिक और तार्किक मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए इस अकादमिक विरोधी ड्राफ्ट को वापस लेंगे या जनहितैषी संशोधन करेंगे। बिहार के विश्वविद्यालयों में होने वाली असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली के ड्राफ्ट में अनियमितता का आरोप लगाते हुए सुधार के लिए एआईएसएफ के राष्ट्रीय सचिव अमीन हमजा ने राज्यपाल को पत्र लिखा है। जिसमें कहा गया है कि जारी ड्राफ्ट स्टैच्यूट-2025 के कतिपय प्रावधान बिहार के हजारों शोधार्थियों और अभ्यर्थियों के भविष्य को अंधकारमय बनाने वाली है। अमीन हमजा ने कहा है कि इस मसले पर AISF का स्पष्ट मानना है कि उम्र सीमा को 55 साल से घटाकर 45 साल करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत प्रदत्त अवसर की समता का उल्लंघन है। इसके साथ ही यह उन अभ्यर्थियों के साथ घोर अन्याय है, जिन्होंने दशकों तक शोध कार्य किया। बिहार के युवाओं के अधिकारों पर प्रहार नियुक्ति प्रक्रिया में पीएचडी (Ph.D.), शोध पत्र प्रकाशनों और पूर्व के शिक्षण अनुभव के वेटेज को खत्म करना उच्च शिक्षा की गुणवत्ता के साथ समझौता है। यह शोध की संस्कृति को हतोत्साहित करने वाला एक अकादमिक विरोधी कदम है। इस ड्राफ्ट में डोमिसाइल नीति के स्पष्ट प्रावधानों का अभाव बिहार के युवाओं के अधिकारों पर प्रहार है। एक लोक कल्याणकारी राज्य के रूप में बिहार के मेधावी युवाओं के हितों का संरक्षण करना शासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। प्रस्तावित 160 अंकों की लिखित परीक्षा और अनुभव को शून्य मान लेना उन अतिथि शिक्षकों (Guest Faculty) के प्रति असंवेदनशील है, जिन्होंने सालों से विश्वविद्यालय की व्यवस्था को संभाला है। इसलिए AISF मांग करता है कि अधिकतम उम्र सीमा को 55 साल यथावत रखा जाए। पीएचडी और शोध अनुभव के अंक (Points) पहले की तरह अनिवार्य रूप से जोड़े जाएं। नियुक्ति प्रक्रिया में बिहार के स्थायी निवासियों के लिए उचित संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। इसके मद्देनजर AISF आशा करता है कि लोकतांत्रिक और तार्किक मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए इस अकादमिक विरोधी ड्राफ्ट को वापस लेंगे या जनहितैषी संशोधन करेंगे।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *