45 साल की भाजपा ने 45 साल का कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन के रूप में चुना है। परंपरा के मुताबिक, इनका ही जेपी नड्डा की जगह भाजपा अध्यक्ष बनना तय है। नितिन नबीन की नियुक्ति को एक्सपर्ट एक ‘मास्टर स्ट्रोक’ बता रहे हैं, क्योंकि वह कायस्थ जाति से आते हैं। कायस्थ होने के नाते वे बंगाल के उस वर्ग से जुड़ते हैं, जो दशकों से राज्य की सत्ता और संस्कृति को आकार देता आया है। बिहार और बंगाल के बीच सांस्कृतिक समानताएं हैं। एक्सपर्ट का मानना है कि यह फैसला अमित शाह की रणनीति का हिस्सा है, जो बंगाल को ‘अगला बड़ा लक्ष्य’ मानते हैं। नितिन नबीन क्या बंगाल के लिए भाजपा के ट्रंप कार्ड साबित होंगे? नितिन नबीन का बंगाल कनेक्शन क्या है, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में…। सवाल-1ः नितिन नबीन कौन हैं? क्या बनाए गए हैं? जवाब: नितिन नबीन भाजपा के नए कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। पार्टी की परंपरा रही है कि कार्यकारी अध्यक्ष ही राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते हैं। ऐसे में नितिन नबीन निवर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा की जगह लेंगे। नबीन बिहार सरकार में पथ निर्माण मंत्री हैं। पटना के बांकीपुर सीट से 2006 से लगातार 5वीं बार विधायक चुने गए। उनके पिता नवीन किशोर सिन्हा भाजपा के बड़े नेता थे। भाजपा संगठन के लिए लंबे समय से काम कर रहे हैं। छात्र नेता के रूप में राजनीतिक करियर शुरू किया था। सवाल-2ः नितिन नबीन की नियुक्ति को बंगाल से जोड़कर क्यों देखा जा रहा है? जवाबः नितिन कायस्थ हैं। बंगाल में कायस्थ 3% से ज्यादा हैं। इस जाति के लोग हार-जीत में बड़ी भूमिका निभाते हैं। पश्चिम बंगाल में 37 साल कायस्थ मुख्यमंत्री (कांग्रेस के विधानचंद्र राय 14 साल और CPM के ज्योति बसु 23 साल) रहे हैं। भाजपा ने एक ऐसे व्यक्ति को अध्यक्ष बनाया, जिसे बंगाल की पॉलिटिकल और कल्चरल समझ है। बंगाल में ममता बनर्जी के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी का पूरा फायदा उठाने के लिए भाजपा ने साफ छवि वाले नेता को आगे किया है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट राकेश प्रवीर ने कहा, ‘BJP ने नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का फैसला पूर्वी भारत में विस्तार की व्यापक रणनीति के चलते लिया है। इससे न केवल बिहार बल्कि बंगाल, ओडिशा, असम और उत्तर-पूर्व के शेष राज्यों में पार्टी को मजबूत करने की कोशिश की गई है।’ सवाल-3ः नितिन नबीन के अध्यक्ष बनने से क्या बंगाल में असर पड़ेगा? जवाबः 50-50 संभावना है। कोलकाता की जर्नलिस्ट पूनम मसीह ने बताया, ‘जब से बिहार में बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल की है तब से चर्चा होने लगी है कि BJP बंगाल में भी इसी तरह बड़ी जीत हासिल करेगी।’ सवाल-4ः बंगाल में भाजपा के वोटर कौन हैं? जवाबः बंगाल में बीजेपी कोर वोटर नॉन बंगाली, हिन्दी भाषी, आदिवासी, दलित, बिहारी, पसमांदा मुसलमान, उर्दू भाषी बंगाली हैं। इनकी संख्या सबसे अधिक बिहार से सटे इलाके और नॉर्थ बंगाल में है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 का रिजल्ट पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में भाजपा दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। बीजेपी को 37.97% वोट और 77 सीट मिले। राज्य के विधानसभा सीटों की संख्या 294 है। भाजपा 293 सीटों पर चुनाव लड़ी। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 215 सीटें जीती। उसे 48.02% वोट मिले। पहले बंगाल में चुनाव TMC बनाम वामपंथी दल होते थे। 2021 और इसके बाद से यहां लड़ाई BJP बनाम TMC हो गई है। 20 मई 2011 से ममता सीएम हैं। 45 साल की भाजपा ने 45 साल का कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन के रूप में चुना है। परंपरा के मुताबिक, इनका ही जेपी नड्डा की जगह भाजपा अध्यक्ष बनना तय है। नितिन नबीन की नियुक्ति को एक्सपर्ट एक ‘मास्टर स्ट्रोक’ बता रहे हैं, क्योंकि वह कायस्थ जाति से आते हैं। कायस्थ होने के नाते वे बंगाल के उस वर्ग से जुड़ते हैं, जो दशकों से राज्य की सत्ता और संस्कृति को आकार देता आया है। बिहार और बंगाल के बीच सांस्कृतिक समानताएं हैं। एक्सपर्ट का मानना है कि यह फैसला अमित शाह की रणनीति का हिस्सा है, जो बंगाल को ‘अगला बड़ा लक्ष्य’ मानते हैं। नितिन नबीन क्या बंगाल के लिए भाजपा के ट्रंप कार्ड साबित होंगे? नितिन नबीन का बंगाल कनेक्शन क्या है, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में…। सवाल-1ः नितिन नबीन कौन हैं? क्या बनाए गए हैं? जवाब: नितिन नबीन भाजपा के नए कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। पार्टी की परंपरा रही है कि कार्यकारी अध्यक्ष ही राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते हैं। ऐसे में नितिन नबीन निवर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा की जगह लेंगे। नबीन बिहार सरकार में पथ निर्माण मंत्री हैं। पटना के बांकीपुर सीट से 2006 से लगातार 5वीं बार विधायक चुने गए। उनके पिता नवीन किशोर सिन्हा भाजपा के बड़े नेता थे। भाजपा संगठन के लिए लंबे समय से काम कर रहे हैं। छात्र नेता के रूप में राजनीतिक करियर शुरू किया था। सवाल-2ः नितिन नबीन की नियुक्ति को बंगाल से जोड़कर क्यों देखा जा रहा है? जवाबः नितिन कायस्थ हैं। बंगाल में कायस्थ 3% से ज्यादा हैं। इस जाति के लोग हार-जीत में बड़ी भूमिका निभाते हैं। पश्चिम बंगाल में 37 साल कायस्थ मुख्यमंत्री (कांग्रेस के विधानचंद्र राय 14 साल और CPM के ज्योति बसु 23 साल) रहे हैं। भाजपा ने एक ऐसे व्यक्ति को अध्यक्ष बनाया, जिसे बंगाल की पॉलिटिकल और कल्चरल समझ है। बंगाल में ममता बनर्जी के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी का पूरा फायदा उठाने के लिए भाजपा ने साफ छवि वाले नेता को आगे किया है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट राकेश प्रवीर ने कहा, ‘BJP ने नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का फैसला पूर्वी भारत में विस्तार की व्यापक रणनीति के चलते लिया है। इससे न केवल बिहार बल्कि बंगाल, ओडिशा, असम और उत्तर-पूर्व के शेष राज्यों में पार्टी को मजबूत करने की कोशिश की गई है।’ सवाल-3ः नितिन नबीन के अध्यक्ष बनने से क्या बंगाल में असर पड़ेगा? जवाबः 50-50 संभावना है। कोलकाता की जर्नलिस्ट पूनम मसीह ने बताया, ‘जब से बिहार में बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल की है तब से चर्चा होने लगी है कि BJP बंगाल में भी इसी तरह बड़ी जीत हासिल करेगी।’ सवाल-4ः बंगाल में भाजपा के वोटर कौन हैं? जवाबः बंगाल में बीजेपी कोर वोटर नॉन बंगाली, हिन्दी भाषी, आदिवासी, दलित, बिहारी, पसमांदा मुसलमान, उर्दू भाषी बंगाली हैं। इनकी संख्या सबसे अधिक बिहार से सटे इलाके और नॉर्थ बंगाल में है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 का रिजल्ट पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में भाजपा दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। बीजेपी को 37.97% वोट और 77 सीट मिले। राज्य के विधानसभा सीटों की संख्या 294 है। भाजपा 293 सीटों पर चुनाव लड़ी। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 215 सीटें जीती। उसे 48.02% वोट मिले। पहले बंगाल में चुनाव TMC बनाम वामपंथी दल होते थे। 2021 और इसके बाद से यहां लड़ाई BJP बनाम TMC हो गई है। 20 मई 2011 से ममता सीएम हैं।


