डूंगरपुर। जिले में धार्मिक पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रणसागर झील के पास बड़े हरित प्रोजेक्ट की तैयारी की गई है। वन विभाग ने करीब एक करोड़ रुपये की लागत से ‘नमो वाटिका’ विकसित करने का प्रस्ताव जयपुर मुख्यालय भेजा है। यह परियोजना लालगिरी मठ के समीप वन विभाग के अधीन लगभग 50 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित की जाएगी। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने पर झील के आसपास बड़ी संख्या में विदेशी पक्षी आकर्षित होंगे, साथ देशी-विदेशी पर्यटन को मजबूती मिलेगी।
रणसागर झील के पास स्थित पहाड़ी पर बने लालगिरी मठ से लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। ऐसे में इस क्षेत्र का विकास होने से धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलेगी। साथ ही रणसागर झील के किनारे वन क्षेत्र विकसित होने से विदेशी पक्षियों को भी सुरक्षित आवास मिल सकेगा। इससे पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संतुलन को मजबूती मिलेगी।
मुख्यालय से 10 किमी दूर
राज्य सरकार के निर्देशानुसार प्रत्येक जिले में नमो वाटिका और नमो नर्सरी विकसित की जा रही है। इसी क्रम में डूंगरपुर-आसपुर मार्ग पर जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित रणसागर झील के आसपास इस परियोजना को आकार दिया जाएगा।
औषधीय और फलदार पौधों का होगा रोपण
वन विभाग के अनुसार क्षेत्र में फलदार पौधों के साथ स्थानीय प्रजातियों के पेड़ जैसे जंगल जलेबी और शहतूत लगाए जाएंगे, जिससे पक्षियों के लिए भोजन की बेहतर व्यवस्था हो सकेगी। इसके अलावा स्थानीय जड़ी-बूटियों और औषधीय पौधों का भी रोपण किया जाएगा, जिससे आयुर्वेद के प्रति लोगों का रुझान बढ़ेगा।
अध्ययन का केंद्र बनेगा क्षेत्र
पूरे क्षेत्र की फेंसिंग और चारदीवारी की जाएगी, जिससे अनधिकृत प्रवेश पर रोक लगेगी। अंदर वन पाथ-वे, एनिकट, वाटर हॉल, एमपीटी, वॉच टावर, बड़ा प्रवेश द्वार, सूखे चेक डैम, गेबियन संरचना, ट्रेंच, रिंग ट्रेंच और झोपड़ियां बनाई जाएंगी। इससे यह क्षेत्र पर्यटन के साथ अध्ययन और प्रकृति अवलोकन के लिए भी उपयोगी बनेगा।
अधिकारी ने कहा-
‘रणसागर झील के पास नमो वाटिका के निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये से अधिक का प्रस्ताव तैयार किया गया है। यहां पर्यावरण संरक्षण के साथ प्राकृतिक वातावरण विकसित किया जाएगा और विदेशी पक्षियों के लिए अनुकूल व्यवस्था की जाएगी।’ -गोतमलाल मीणा, एसीएफ, डूंगरपुर


