बदल जाएगा निजामाबाद का नाम! तेलंगाना में BJP सांसद के ऐलान से गरमाई सियासत

बदल जाएगा निजामाबाद का नाम! तेलंगाना में BJP सांसद के ऐलान से गरमाई सियासत

Nizamabad Name Change: तेलंगाना के निजामाबाद जिले में एक बार फिर नाम बदलने का मुद्दा सुर्खियों में आ गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद धर्मपुरी अरविंद ने 9 जनवरी 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा बयान देते हुए कहा कि निजामाबाद का नाम जल्द ही उसके पुराने और मूल नाम ‘इंदूर’ में बदला जाएगा। सांसद अरविंद ने दावा किया कि निजामाबाद को पहले इंदूर (या इंद्रपुरी) के नाम से जाना जाता था और इसे बाद में निजाम शासन के दौरान बदला गया।

नगर निगम चुनाव के बाद प्रस्ताव लाने की तैयारी

धर्मपुरी अरविंद ने यह भी कहा कि आगामी नगर निगम चुनावों में बीजेपी को बहुमत मिलने की पूरी उम्मीद है। चुनाव जीतने के बाद पार्टी नगर निगम में नाम बदलने का प्रस्ताव पारित कराकर मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को भेजेगी। उनका दावा है कि नाम बदलने से शहर के विकास को नई दिशा मिलेगी और ‘इंदूर’ नाम भारतीय सांस्कृतिक पहचान और हिंदुस्तान से जुड़ा होने के कारण शुभ भी माना जाता है।

क्या है नाम का इतिहास?

ऐतिहासिक रिकॉर्ड और सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, निजामाबाद का प्राचीन नाम इंदूर या इंद्रपुरी था। यह नाम 5वीं शताब्दी के राजा इंद्रदत्त से जुड़ा बताया जाता है।18वीं शताब्दी में निजाम शासनकाल के दौरान शहर का नाम बदलकर निजामाबाद कर दिया गया। यह तथ्य कई ऐतिहासिक स्रोतों और सरकारी वेबसाइटों पर दर्ज है।

विपक्ष में विरोध

सांसद अरविंद के बयान पर मजलिस बचाओ तहरीक (MBT) ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। MBT के प्रवक्ता अमजेद उल्लाह खान ने कहा कि सांसद की भाषा बेहद अपमानजनक, गैर-जिम्मेदाराना और उकसाने वाली है। MBT का आरोप है कि अरविंद ने पुराने निजाम को लेकर जिस तरह की टिप्पणी की, उससे इतिहास का अपमान हुआ है और समाज में नफरत फैलाने की कोशिश की गई है।

पुलिस से कार्रवाई की मांग

MBT ने निजामाबाद के पुलिस कमिश्नर से मांग की है कि वे इस मामले में स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए सांसद धर्मपुरी अरविंद के खिलाफ केस दर्ज करें। संगठन का कहना है कि इस बयान से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंच सकता है।

असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप

MBT ने बीजेपी के साथ-साथ AIMIM पर भी निशाना साधते हुए कहा कि दोनों पार्टियां बेरोजगारी, खराब सड़कें, जल संकट, गंदगी और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे असली मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय ऐसे विवादास्पद मामलों को हवा दे रही हैं। संगठन का आरोप है कि स्थानीय चुनावों से पहले जानबूझकर तनावपूर्ण माहौल बनाया जा रहा है, ताकि राजनीतिक फायदा उठाया जा सके।

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