लोकसभा में साल 2026-27 के रेल बजट पर चर्चा के दौरान नालंदा के सांसद कौशलेंद्र कुमार ने सदन में बिहार और अपने संसदीय क्षेत्र की रेल समस्याओं को बेहद मजबूती के साथ रखा। सांसद ने रेल मंत्रालय की ओर से इस बार के बजट में किए गए 3.02 लाख करोड़ रुपए के ऐतिहासिक प्रावधान की सराहना करते हुए इसे भारतीय रेलवे के कायाकल्प की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री का एक दूरदर्शी कदम बताया। उन्होंने विशेष रूप से बिहार के लिए आवंटित 10,379 करोड़ रुपए की राशि का स्वागत करते हुए कहा कि 1.09 लाख करोड़ रुपए की चल रही परियोजनाओं और शत-प्रतिशत विद्युतीकरण से बिहार का रेल ढांचा अब आधुनिकता की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। यात्री सुविधाओं से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया सदन को संबोधित करते हुए सांसद ने यात्री सुविधाओं से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कोरोना काल के बाद से वरिष्ठ नागरिकों, पत्रकारों, दिव्यांगों और 55 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को मिलने वाली रेल किराए की छूट के बंद होने पर चिंता जताई और इसे जनहित में पुनः बहाल करने की पुरजोर मांग की। उन्होंने स्लीपर क्लास की बोगियों की संख्या आधी किए जाने को आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताते हुए इसे पूर्ववत बढ़ाने का आग्रह किया। सांसद ने सुझाव दिया कि रेलवे की स्थानीय समस्याओं के त्वरित निष्पादन और कमियों को दूर करने के लिए एक विशेष जांच कमेटी का गठन किया जाना चाहिए, जो धरातल पर जाकर यात्री सुविधाओं और बुनियादी ढांचे का आकलन कर सके। नालंदा रेलवे स्टेशन को उच्च स्तरीय सुविधाओं से लैस करने की मांग अपने संसदीय क्षेत्र नालंदा की जरूरतों को रेखांकित करते हुए कौशलेंद्र कुमार ने फतुहा-इस्लामपुर-नटेसर रेल खंड के दोहरीकरण की मांग को प्राथमिकता दी। उन्होंने तर्क दिया कि इस रूट पर मालगाड़ियों के अत्यधिक दबाव के कारण यात्री ट्रेनें अक्सर घंटों बाधित रहती हैं, जिसका समाधान केवल ट्रैक को डबल करना ही है। सांसद ने बख्तियारपुर-राजगीर-तिलैया लाइन के दोहरीकरण की भी आवश्यकता जताई, जहां से एनटीपीसी बाढ़ के लिए कोयले की ढुलाई होती है। उन्होंने यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल होने के नाते नालंदा रेलवे स्टेशन को उच्च स्तरीय सुविधाओं से लैस करने और राजगीर व बिहार शरीफ स्टेशनों पर नेशनल इंक्वायरी सिस्टम व कोच डिस्प्ले बोर्ड लगाने की मांग रखी। सासंद ने कई गांव में हॉल्ट और टिकट काउंटर की मांग की सांसद ने रेल नेटवर्क के विस्तार और नए हॉल्टों के निर्माण पर जोर देते हुए रामपुर-बंपुर, ओंदा, तिउरी, आमावाँ और कैड़ी गांव में हॉल्ट निर्माण व टिकट काउंटर खोलने की मांग की। साथ ही, उन्होंने कुकहरिया गांव के पास आरओबी/आरयूबी निर्माण और नालंदा में बने संकरे अंडरपासों की समस्या को उठाया, जहां जलभराव और बड़े वाहनों के न निकल पाने से किसान और आम लोग परेशान हैं। ट्रेनों के विस्तार पर चर्चा करते हुए उन्होंने पटना-एर्नाकुलम गाड़ी को इस्लामपुर तक बढ़ाने, बक्सर-फतुहा शटल को गया तक चलाने और कोरोना काल से बंद पड़ी राजगीर-हावड़ा सुपरफास्ट को पुनः शुरू करने का आग्रह किया। उन्होंने अंत में दुनिया के सबसे ऊंचे चिनाब रेलवे पुल को सरकार की बड़ी उपलब्धि बताते हुए विश्वास जताया कि इन विकास कार्यों से ‘विकसित भारत’ का संकल्प जल्द पूरा होगा। लोकसभा में साल 2026-27 के रेल बजट पर चर्चा के दौरान नालंदा के सांसद कौशलेंद्र कुमार ने सदन में बिहार और अपने संसदीय क्षेत्र की रेल समस्याओं को बेहद मजबूती के साथ रखा। सांसद ने रेल मंत्रालय की ओर से इस बार के बजट में किए गए 3.02 लाख करोड़ रुपए के ऐतिहासिक प्रावधान की सराहना करते हुए इसे भारतीय रेलवे के कायाकल्प की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री का एक दूरदर्शी कदम बताया। उन्होंने विशेष रूप से बिहार के लिए आवंटित 10,379 करोड़ रुपए की राशि का स्वागत करते हुए कहा कि 1.09 लाख करोड़ रुपए की चल रही परियोजनाओं और शत-प्रतिशत विद्युतीकरण से बिहार का रेल ढांचा अब आधुनिकता की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। यात्री सुविधाओं से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया सदन को संबोधित करते हुए सांसद ने यात्री सुविधाओं से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कोरोना काल के बाद से वरिष्ठ नागरिकों, पत्रकारों, दिव्यांगों और 55 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को मिलने वाली रेल किराए की छूट के बंद होने पर चिंता जताई और इसे जनहित में पुनः बहाल करने की पुरजोर मांग की। उन्होंने स्लीपर क्लास की बोगियों की संख्या आधी किए जाने को आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताते हुए इसे पूर्ववत बढ़ाने का आग्रह किया। सांसद ने सुझाव दिया कि रेलवे की स्थानीय समस्याओं के त्वरित निष्पादन और कमियों को दूर करने के लिए एक विशेष जांच कमेटी का गठन किया जाना चाहिए, जो धरातल पर जाकर यात्री सुविधाओं और बुनियादी ढांचे का आकलन कर सके। नालंदा रेलवे स्टेशन को उच्च स्तरीय सुविधाओं से लैस करने की मांग अपने संसदीय क्षेत्र नालंदा की जरूरतों को रेखांकित करते हुए कौशलेंद्र कुमार ने फतुहा-इस्लामपुर-नटेसर रेल खंड के दोहरीकरण की मांग को प्राथमिकता दी। उन्होंने तर्क दिया कि इस रूट पर मालगाड़ियों के अत्यधिक दबाव के कारण यात्री ट्रेनें अक्सर घंटों बाधित रहती हैं, जिसका समाधान केवल ट्रैक को डबल करना ही है। सांसद ने बख्तियारपुर-राजगीर-तिलैया लाइन के दोहरीकरण की भी आवश्यकता जताई, जहां से एनटीपीसी बाढ़ के लिए कोयले की ढुलाई होती है। उन्होंने यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल होने के नाते नालंदा रेलवे स्टेशन को उच्च स्तरीय सुविधाओं से लैस करने और राजगीर व बिहार शरीफ स्टेशनों पर नेशनल इंक्वायरी सिस्टम व कोच डिस्प्ले बोर्ड लगाने की मांग रखी। सासंद ने कई गांव में हॉल्ट और टिकट काउंटर की मांग की सांसद ने रेल नेटवर्क के विस्तार और नए हॉल्टों के निर्माण पर जोर देते हुए रामपुर-बंपुर, ओंदा, तिउरी, आमावाँ और कैड़ी गांव में हॉल्ट निर्माण व टिकट काउंटर खोलने की मांग की। साथ ही, उन्होंने कुकहरिया गांव के पास आरओबी/आरयूबी निर्माण और नालंदा में बने संकरे अंडरपासों की समस्या को उठाया, जहां जलभराव और बड़े वाहनों के न निकल पाने से किसान और आम लोग परेशान हैं। ट्रेनों के विस्तार पर चर्चा करते हुए उन्होंने पटना-एर्नाकुलम गाड़ी को इस्लामपुर तक बढ़ाने, बक्सर-फतुहा शटल को गया तक चलाने और कोरोना काल से बंद पड़ी राजगीर-हावड़ा सुपरफास्ट को पुनः शुरू करने का आग्रह किया। उन्होंने अंत में दुनिया के सबसे ऊंचे चिनाब रेलवे पुल को सरकार की बड़ी उपलब्धि बताते हुए विश्वास जताया कि इन विकास कार्यों से ‘विकसित भारत’ का संकल्प जल्द पूरा होगा।


