Nagaur patrika…हाईवे के होटलों, रेस्टोरेंटो व ढाबों की जांच में सवालों में नगरपरिषद की चुप्पी

Nagaur patrika…हाईवे के होटलों, रेस्टोरेंटो व ढाबों की जांच में सवालों में नगरपरिषद की चुप्पी

फायर एनओसी भी परिषद के जिम्मे, फिर भी लंबे समय से नगरपरिषद ने न निरीक्षण किया, और न ही जवाबदेही तय की

नागौर. राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे संचालित होटल-ढाबों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और अव्यवस्थित संचालन के खुलासों के बाद भी नगर परिषद की ओर से अब तक कोई ठोस जांच नहीं किए जाने से नगरपरिषद के जिम्मेदारों पर सवालिया निशान लगने लगा है। अवैध कट, हाईवे पर अव्यवस्थित पार्किंग, बिना नियंत्रित एंट्री-एग्जिट एवं हाइवे से सटे मार्गों के पास ही कई जगहों पर कुर्सियां रखकर होटलों एवं रेस्टोरेंटों का संचालन होने के बाद भी जिम्मेदारों की ओर से लगातार अनदेखी किए जाने के कारण अब स्थिति विकट होने लगी है

दमकल विभाग परिषद के अधीन, फिर जांच क्यों नहीं
होटलों, ढाबों एवं रेस्टोरेंटों को फायर एनओसी नगर परिषद के दमकल विभाग की ओर से जारी की जाती है। ऐसे में यह स्पष्ट जिम्मेदारी परिषद पर ही आती है कि संबंधित होटल-ढाबों के पास वैध अग्निशमन प्रमाणपत्र है या नहीं। यदि एनओसी जारी भी की गई है, तो क्या उसके बाद नियमित निरीक्षण हुआ। सूत्रों के अनुसार हाल के समय में परिषद के व्यापक फायर सेफ्टी की जांच तक नहीं क जाती। बताते हैं कि कथित रूप से मिलीभगत के चलते जानकारी होने के बाद भी नगरपरिषद की ओर से तमाम अव्यवस्थाओं के साथ ही तकनीकी रूप गड़बडिय़ों की जांच नहीं की जाती है। विभागीय जानकारों का कहना है कि यही वजह रही है कि प्रमाणपत्र जारी होने के बाद आज तक अनुपालन की समीक्षा केवल खानापूर्तियों तक सिमटकर रह गई है।

एनओसी है भी तो शर्तों का पालन कौन देखे
विशेषज्ञों का कहना है कि फायर एनओसी केवल कागज का दस्तावेज नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों के पालन की निरंतर प्रक्रिया है। अग्निशमन उपकरणों की कार्यस्थिति, आपात निकास मार्ग, पार्किंग की सुरक्षित दूरी और विद्युत व्यवस्थाओं की जांच समय-समय पर आवश्यक होती है। यदि यह मानक लागू नहीं हैं तो प्रमाणपत्र का अस्तित्व भी अर्थहीन हो जाता है। परिषद की ओर से ऐसी किसी संयुक्त या स्वतंत्र जांच की जानकारी सामने नहीं आई है।

जवाबदेही से बचाव या प्रशासनिक शिथिलता
जहां अन्य विभाग सीमित अधिकार क्षेत्र का हवाला दे रहे हैं, वहीं नगर परिषद निर्माण अनुज्ञा, शहरी नियमन और फायर एनओसी जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार है। इसके बावजूद सक्रिय पहल का अभाव प्रशासनिक शिथिलता की ओर संकेत करता है। शिकायतें सार्वजनिक रूप से सामने आने के बाद भी यदि परिषद ने औपचारिक निरीक्षण अभियान नहीं चलाया, तो यह गंभीर चूक मानी जाएगी।

जन-सुरक्षा पर बढ़ता खतरा
हाईवे पर प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति में पर्याप्त अग्निशमन प्रबंध न होना या अव्यवस्थित पार्किंग बड़ा हादसा आमंत्रित कर सकती है। प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि जब तक नगर परिषद स्पष्ट रूप से निरीक्षण कर स्थिति सार्वजनिक नहीं करती, तब तक नागरिकों की सुरक्षा को लेकर आशंकाएं बनी रहेंगी।

जांच कर ली जाएगी…सवालों पर साधी चुप्पी
इस संबंध में नगरपरिषद आयुक्त गोविंद सिंह भींचर से बातचीत की गई तो इनका कहना था कि हाइवे के होटलों, ढाबों एवं रेस्टोरेंटों के संदर्भ में कोई शिकायत नहीं मिली है, फिर भी शिकायत मिली तो देख लिया जाएगा। परिषद की ओर से एनओसी दिए जाने सहित अन्य अनियमितताओं के बारे में कोई जांच की गई है अब तक की नहीं, के सवाल पर चुप्पी साध ली।

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