Nagaur patrika news…मकर संक्रांति आज, सूर्य के उत्तरायण होने से समाप्त होगा खरमास…VIDEO

Nagaur patrika news…मकर संक्रांति आज, सूर्य के उत्तरायण होने से समाप्त होगा खरमास…VIDEO

नागौर. मकर संक्रांति बुधवार को धूमधाम से मनाई जाएगी। ज्योतिष गणना के अनुसार सूर्यदेव दोपहर 3 बजकर 07 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाएंगे और खरमास का समापन होगा। रमल ज्योतिर्विद दिनेश प्रेम शर्मा ने बताया कि संक्रांति का सामान्य पुण्यकाल बुधवार सुबह 8 बजकर 43 मिनट से दोपहर 3 बजकर 07 मिनट तक रहेगा। संक्रांति काल दोपहर 3 बजकर 07 मिनट पर रहेगा, जबकि विशेष पुण्यकाल दोपहर 3 बजकर 7 मिनट से सूर्यास्त तक माना गया है। दिन में संक्रांति होने के कारण विशेष 40 घटी का नियम इस वर्ष लागू नहीं होगा। इस दिन से मांगलिक एवं शुभ कार्यों की शुरुआत धर्मसम्मत मानी जाती है। इसके साथ ही सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाएंगे, और मलमास का समापन होगा। इसके अलावा इस बार 2 फरवरी तक शुक्र तारा अस्त होने के कारण मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा। इस बार संक्रांति के दिन षट्तिला एकादशी व्रत भी है। इसलिए तिल का महत्व कई गुना बढ़ जाएगा। मकर संक्रान्ति का पर्व 14 जनवरी को ही मनाया जाएगा। इसका पुण्यकाल अपराह्न से सूर्यास्त तक रहेगा।

यह है पौराणिक मान्यता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं। शनि मकर और कुंभ राशि के स्वामी हैं। इसलिए यह पर्व पिता और पुत्र के विशेष मिलन का प्रतीक भी माना जाता है। सूर्य का उत्तरायण होना अत्यंत शुभ माना गया है। पुराणों के अनुसार मकर संक्रांति के दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करने से सभी कष्टों का निवारण होता है। यदि गंगा स्नान संभव न हो तो घर में स्नान जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी समान पुण्यदायक माना गया है। गंगाजल उपलब्ध न होने पर कपूर या कुश डालकर स्नान करने का भी विधान है। इस दिन काले उड़द की दाल की खिचड़ी, तिल, गुड़, घी, कंबल, लकड़ी, वस्त्र एवं अन्य गृह उपयोगी वस्तुओं का दान श्रेष्ठ माना गया है। विशेष रूप से 14 की संख्या में वस्तुओं के दान का विधान बताया गया है। जो लोग यज्ञोपवीत धारण करते हैं, उनके लिए संक्रांति के दिन नया यज्ञोपवीत धारण करना शुभ माना गया है। मकर संक्रांति पर गंगासागर तीर्थ की यात्रा का भी विशेष महत्व है।
एकादशी संयोग, पर भ्रम नहीं
इस वर्ष मकर संक्रांति के दिन षटतिला एकादशी भी पड़ रही है। इसे लेकर चावल निषेध को लेकर कुछ मतभेद हैं, लेकिन ज्योतिषाचार्यों के अनुसार विशेष पर्वों पर यह निषेध गृहस्थों के लिए बाध्यकारी नहीं है। गृहस्थजन बुधवार 14 जनवरी को ही खिचड़ी पर्व मना सकते हैं। जो लोग एकादशी के कारण चावल न लेने का पालन करना चाहते हैं, वह गुरुवार को यानि की 15 जनवरी को सूर्योदय से सुबह 7 बजकर 7 मिनट तक खिचड़ी पर्व मना सकते हैं।

पांच से दो सौ रुपए तक की पतंगें उपलब्ध, बच्चों से लेकर युवाओं तक में खासा उत्साह
मकर संक्रांति से एक दिन पहले शहर का बाजार पतंगों के रंग में रंगा नजर आया। नया दरवाजा सहित शहर के कई इलाकों में दुकानों को रंग-बिरंगी पतंगों से सजाया गया है। पांच रुपए से लेकर दो सौ रुपए तक की पतंगें बाजार में उपलब्ध हैं, जिन्हें खरीदने के लिए बच्चों और युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। मंगलवार को दिनभर पतंग की दुकानों पर भीड़ लगी रही। सुबह से शाम तक लोग विभिन्न आकार-प्रकार और डिजाइनों की पतंगें खरीदते नजर आए। बाजार में पर्व को लेकर चहल-पहल बनी रही और शाम होते-होते भीड़ और बढ़ गई। दुकानदारों के अनुसार मकर संक्रांति को लेकर हर साल पतंगों की मांग रहती है, लेकिन इस बार बच्चों के साथ युवाओं में भी नए डिजाइनों की पतंगों को लेकर खास रुचि दिखाई दे रही है। बाजार में साधारण पतंगों के साथ-साथ बड़े आकार और आकर्षक प्रिंट वाली पतंगें भी लोगों को खूब लुभा रही हैं।

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