‘वो देश के लिए थे, मेरे लिए कौन है, पति ही मेरी पूरी दुनिया थे। मुझे कुछ नहीं चाहिए, सिर्फ मेरा पति चाहिए। मैंने उनका पूरा परिवार संभाला है, उनकी हिम्मत नहीं कि वो मुझे धोखा दे जाएं, अब मुझे कौन संभालेगा?’ ये बातें जम्मू–कश्मीर के डोडा में हुए दर्दनाक हादसे में शहीद हरेराम कुंवर की पत्नी खुशबू कुमारी ने रोते-बिलखते हुए कही। हादसे के तीन दिन गुजर जाने के बाद भी खुशबू बेसुध हैं। पति की याद में खुशबू रो-रोकर बेहोश हो जा रही हैं। चेहरे पर बार-बार पानी, तो कभी नाक बंद कर खुशबू को होश में लाया जा रहा है। खुशबू सिर्फ एक बात रट रही हैं कि पति मेरे पीठ पीछे मुझे धोखा देकर चले गए हैं। शहीद हरेराम की पत्नी खुशबू की पहले ये 2 तस्वीरें देखिए सेना के अधिकारियों से बोली- मेरे बेटे लावारिस नहीं होने चाहिए, मदद कीजिए खुशबू ने सेना के अधिकारियों से कहा कि वो अपना ख्याल नहीं रख सकते, मुझे ख्याल रखने के लिए बार-बार बोलकर पागल कर दिया था। अब वो मेरी बात नहीं सुन रहे हैं, कोई तो उन्हें लेकर आए और समझाए। खुशबू ने कहा कि मुझे पैसा नहीं चाहिए, सम्मान नहीं चाहिए, लेकिन मेरे बेटे लावारिस नहीं होने चाहिए, बच्चों को पढ़ाने में मेरी मदद कीजिए सर। अपने पिता के बिना मेरे बच्चे अनाथ हो गए हैं। खुशबू की बातों को सुनकर पहले तो सेना के अधिकारी चुप्पी साधे रहे, उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वीरांगना की पत्नी को क्या कहे, कैसे समझाएं। आखिर में जब खुशबू थोड़ी शांत हुई, तो सेना के अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि फोर्थ बिहार रेजिमेंट आपके साथ है, बच्चों की पढ़ाई से लेकर हर संभव मदद करेंगी। खुशबू के फौजी चाचा हरेराम के साथी थे, उन्होंने ही भतीजी की कराई शादी हरेराम की शादी 7 मार्च 2014 में उदवंतनगर प्रखंड के गजराराजगंज ओपी अंतर्गत विशुनपुरा गांव निवासी EX आर्मीमैन रविंद्र तिवारी की बेटी खुशबू से हिंदू-रीति रिवाज से धूमधाम से हुई थी। खुशबू के चाचा राम कटेश तिवारी इस शादी के अगुआ थे। राम कटेश दानापुर में शहीद जवान हरेराम के साथ फोर्थ बिहार रेजिमेंट थे। इसी दौरान दोनों की मुलाकात हुई। शहीद जवान हरेराम कुंवर बचपन से ही अदम्य साहस और तेज तर्रार व्यक्तित्व के लिए जाने जाते थे। फौज में उन्होंने हर सौंपी गई जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और बहादुरी से निभाया, जिससे उनके साथी और अधिकारी सभी प्रभावित थें। हरेराम कुवंर के इसी अनुशासन, ईमानदारी और देशभक्ति से खुश होकर खुशबू के चाचा ने उन्हें पसंद किया और अपने परिवार से बात कर भतीजी की शादी कराई। ‘मेरा हाथ पकड़कर इस घर में लाए थे, अब मुझे अकेला छोड़ गए’ शादी के पलों को याद करते हुए खुशबू कहती हैं, वो मेरा हाथ पकड़कर अपने साथ इस घर में धूमधाम से लाए थे, फिर मातम के बीच मुझे बीच राह में इस घर में अकेला, तन्हा छोड़कर चल दिए, ऐसा उन्होंने क्यों किया? उन्होंने कहा कि आज भले ही मेरे पति, देश के लाल हरेराम कुंवर हमारे बीच नहीं हैं, हमारे साथ नहीं हैं, लेकिन उनका साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा। साथी जवान दोस्त बोले- हमारी तो आंखों के आंसू नहीं थम रहे फोर्थ बिहार के होनेरी कैप्टन देवेश सिंह ने कहा कि हरेराम कुंवर लगनशील जवान था, उनके शहादत की खबर सुनकर मेरी आंखों से आंसू नहीं थम रहे हैं। उन्होंने बताया कि हरेराम कुंवर हमारे फोर्थ बिहार यूनिट से आता था। तीन महीने पहले फोर राष्ट्रीय राइफल में जम्मू–कश्मीर गए हुए थे। उन्हें वहां 2 साल तक ड्यूटी करनी थी। गुरुवार को एक ऑपरेशन के दौरान फौजी से भरी बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। उनको श्रद्धांजलि देने के लिए बक्सर, छपरा समेत अन्य जगहों से उनके दोस्त आए हैं। उनकी आत्मा को शांति मिल सके और परिवार को सहारा मिले, यही भगवान से विनती है। ‘घर बनाने का सपना अधूरा, बेटे सैनिक स्कूल की तैयारी में जुटे’ वहीं, फोर्थ बिहार रेजिमेंट के भूतपूर्व कमांडो सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि दिसंबर में आरा के स्टेडियम में मुलाकात हुई थी, फौज की तैयारी कर रहे बच्चों को देखने के लिए हम दोनों आए थे। हरेराम बता रहे थे कि उन्हें पत्नी और बच्चों के लिए आरा के अनाईठ मुहल्ले में घर बनाना है। नक्शा भी बन चुका है। हरेराम ने कहा था कि दो साल के बाद रिटायरमेंट आने के बाद काम लगवाएंगे, दोनों बेटों को सैनिक स्कूल की तैयारी करा रहे थे। हमारे पलटन के जवान थे, घटना की सूचना के बाद हमलोग अपने आप को रोक नहीं पाए और बच्चों के साथ उन्हें अंतिम क्षण में दर्शन करने आए है। उनके जाने से फोर्थ बिहार के सभी जवान दुखी है। आने–जाने का परम्परा है, यही नीति का विधान है। उनके परिवार के साथ फोर्थ बिहार का पूरा परिवार है। अब जानिए जम्मू-कश्मीर में कैसे हुआ हादसा… ‘वो देश के लिए थे, मेरे लिए कौन है, पति ही मेरी पूरी दुनिया थे। मुझे कुछ नहीं चाहिए, सिर्फ मेरा पति चाहिए। मैंने उनका पूरा परिवार संभाला है, उनकी हिम्मत नहीं कि वो मुझे धोखा दे जाएं, अब मुझे कौन संभालेगा?’ ये बातें जम्मू–कश्मीर के डोडा में हुए दर्दनाक हादसे में शहीद हरेराम कुंवर की पत्नी खुशबू कुमारी ने रोते-बिलखते हुए कही। हादसे के तीन दिन गुजर जाने के बाद भी खुशबू बेसुध हैं। पति की याद में खुशबू रो-रोकर बेहोश हो जा रही हैं। चेहरे पर बार-बार पानी, तो कभी नाक बंद कर खुशबू को होश में लाया जा रहा है। खुशबू सिर्फ एक बात रट रही हैं कि पति मेरे पीठ पीछे मुझे धोखा देकर चले गए हैं। शहीद हरेराम की पत्नी खुशबू की पहले ये 2 तस्वीरें देखिए सेना के अधिकारियों से बोली- मेरे बेटे लावारिस नहीं होने चाहिए, मदद कीजिए खुशबू ने सेना के अधिकारियों से कहा कि वो अपना ख्याल नहीं रख सकते, मुझे ख्याल रखने के लिए बार-बार बोलकर पागल कर दिया था। अब वो मेरी बात नहीं सुन रहे हैं, कोई तो उन्हें लेकर आए और समझाए। खुशबू ने कहा कि मुझे पैसा नहीं चाहिए, सम्मान नहीं चाहिए, लेकिन मेरे बेटे लावारिस नहीं होने चाहिए, बच्चों को पढ़ाने में मेरी मदद कीजिए सर। अपने पिता के बिना मेरे बच्चे अनाथ हो गए हैं। खुशबू की बातों को सुनकर पहले तो सेना के अधिकारी चुप्पी साधे रहे, उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वीरांगना की पत्नी को क्या कहे, कैसे समझाएं। आखिर में जब खुशबू थोड़ी शांत हुई, तो सेना के अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि फोर्थ बिहार रेजिमेंट आपके साथ है, बच्चों की पढ़ाई से लेकर हर संभव मदद करेंगी। खुशबू के फौजी चाचा हरेराम के साथी थे, उन्होंने ही भतीजी की कराई शादी हरेराम की शादी 7 मार्च 2014 में उदवंतनगर प्रखंड के गजराराजगंज ओपी अंतर्गत विशुनपुरा गांव निवासी EX आर्मीमैन रविंद्र तिवारी की बेटी खुशबू से हिंदू-रीति रिवाज से धूमधाम से हुई थी। खुशबू के चाचा राम कटेश तिवारी इस शादी के अगुआ थे। राम कटेश दानापुर में शहीद जवान हरेराम के साथ फोर्थ बिहार रेजिमेंट थे। इसी दौरान दोनों की मुलाकात हुई। शहीद जवान हरेराम कुंवर बचपन से ही अदम्य साहस और तेज तर्रार व्यक्तित्व के लिए जाने जाते थे। फौज में उन्होंने हर सौंपी गई जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और बहादुरी से निभाया, जिससे उनके साथी और अधिकारी सभी प्रभावित थें। हरेराम कुवंर के इसी अनुशासन, ईमानदारी और देशभक्ति से खुश होकर खुशबू के चाचा ने उन्हें पसंद किया और अपने परिवार से बात कर भतीजी की शादी कराई। ‘मेरा हाथ पकड़कर इस घर में लाए थे, अब मुझे अकेला छोड़ गए’ शादी के पलों को याद करते हुए खुशबू कहती हैं, वो मेरा हाथ पकड़कर अपने साथ इस घर में धूमधाम से लाए थे, फिर मातम के बीच मुझे बीच राह में इस घर में अकेला, तन्हा छोड़कर चल दिए, ऐसा उन्होंने क्यों किया? उन्होंने कहा कि आज भले ही मेरे पति, देश के लाल हरेराम कुंवर हमारे बीच नहीं हैं, हमारे साथ नहीं हैं, लेकिन उनका साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा। साथी जवान दोस्त बोले- हमारी तो आंखों के आंसू नहीं थम रहे फोर्थ बिहार के होनेरी कैप्टन देवेश सिंह ने कहा कि हरेराम कुंवर लगनशील जवान था, उनके शहादत की खबर सुनकर मेरी आंखों से आंसू नहीं थम रहे हैं। उन्होंने बताया कि हरेराम कुंवर हमारे फोर्थ बिहार यूनिट से आता था। तीन महीने पहले फोर राष्ट्रीय राइफल में जम्मू–कश्मीर गए हुए थे। उन्हें वहां 2 साल तक ड्यूटी करनी थी। गुरुवार को एक ऑपरेशन के दौरान फौजी से भरी बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। उनको श्रद्धांजलि देने के लिए बक्सर, छपरा समेत अन्य जगहों से उनके दोस्त आए हैं। उनकी आत्मा को शांति मिल सके और परिवार को सहारा मिले, यही भगवान से विनती है। ‘घर बनाने का सपना अधूरा, बेटे सैनिक स्कूल की तैयारी में जुटे’ वहीं, फोर्थ बिहार रेजिमेंट के भूतपूर्व कमांडो सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि दिसंबर में आरा के स्टेडियम में मुलाकात हुई थी, फौज की तैयारी कर रहे बच्चों को देखने के लिए हम दोनों आए थे। हरेराम बता रहे थे कि उन्हें पत्नी और बच्चों के लिए आरा के अनाईठ मुहल्ले में घर बनाना है। नक्शा भी बन चुका है। हरेराम ने कहा था कि दो साल के बाद रिटायरमेंट आने के बाद काम लगवाएंगे, दोनों बेटों को सैनिक स्कूल की तैयारी करा रहे थे। हमारे पलटन के जवान थे, घटना की सूचना के बाद हमलोग अपने आप को रोक नहीं पाए और बच्चों के साथ उन्हें अंतिम क्षण में दर्शन करने आए है। उनके जाने से फोर्थ बिहार के सभी जवान दुखी है। आने–जाने का परम्परा है, यही नीति का विधान है। उनके परिवार के साथ फोर्थ बिहार का पूरा परिवार है। अब जानिए जम्मू-कश्मीर में कैसे हुआ हादसा…


