‘मेरी बेटी मरी…पुलिस हम पर ही शक कर रही’:वो पूछते हैं–बेटी फोन पर कितनी देर बात करती थी, ममेरे भाई से कैसा रिश्ता; NEET छात्रा के पिता का गुस्सा

‘मेरी बेटी मरी…पुलिस हम पर ही शक कर रही’:वो पूछते हैं–बेटी फोन पर कितनी देर बात करती थी, ममेरे भाई से कैसा रिश्ता; NEET छात्रा के पिता का गुस्सा

‘मेरी बेटी के हत्यारे को ढूंढने की जगह पुलिस हमारे परिवार-वालों पर शक कर रही है। तीन बार SIT हमारे घर आ चुकी है। हर बार वही सवाल, वही शक। इससे हम सब मानसिक रूप से टूट चुके हैं। SIT के आरोप सरासर गलत हैं।’ ‘मेरे साले-भांजे का इस घटना से कोई मतलब नहीं है। घटना को घटे 9 दिन से ज्यादा हो गए हैं और पुलिस अभी तक मेरी बेटी के हत्यारों तक नहीं पहुंच पाई है। जब तक मेरी बेटी को इंसाफ नहीं मिलेगा, तब तक मैं संतुष्ट नहीं रहूंगा।’ ये कहना है पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा के पिता का, जिसकी बेटी की रेप के बाद अस्पताल में मौत हो गई। NEET छात्रा की मौत के बाद SIT की टीम जांच में जुटी है। टीम पटना से लेकर जहानाबाद तक हर पहलू की जांच कर रही है। SIT ने मृतक छात्रा के पिता और परिवार से किस तरह के सवाल कर रही है, ये जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम गांव में पहुंची। पढ़िए रिपोर्ट… पिता बोले- सिर्फ हत्या का नहीं, मामला पॉक्सो एक्ट का है पिता का कहना है कि यह मामला सिर्फ हत्या का नहीं है बल्कि पॉक्सो एक्ट के तहत गंभीर अपराध का है। उन्होंने साफ मांग रखी है कि मामले की जांच पॉक्सो एक्ट के तहत हो और दोषियों को फांसी की सजा दी जाए। परिवार का दावा है कि पुलिस की मौजूदा थ्योरी गलत दिशा में जा रही है, जिससे असली अपराधी अब तक बचे हुए हैं। SIT ने छात्रा के माता-पिता, मामा-ममेरे भाई से पूछताछ कर चुकी है। अब तक कितनी बार गांव पहुंची SIT नीट छात्रा की मौत के बाद गठित SIT अब तक तीन बार जहानाबाद में छात्रा के गांव पहुंच चुकी है। छात्रा के पिता का कहना है, ‘हर बार टीम ने लगभग 12-12 घंटे तक गांव में डेरा डाले रखती है। मुझसे, लड़की के मामा और ममेरे भाई से लगभग एक ही तरह के सवाल कर रही है।’ पीड़ित पिता ने बताया, ‘SIT हमसे पूछ रही- आपकी बेटी के डेथ से पहले घर का माहौल कैसा था? बेटी पर पढ़ाई का दबाव तो नहीं था? हाल के दिनों में क्या छात्रा के व्यवहार में कोई बदलाव आए थे? परिवार के सदस्यों के साथ उसके संबंध कैसे थे? क्या कोई उसे परेशान कर रहा था? कितनी देर तक वो मोबाइल इस्तेमाल करती थी? क्या किसी से भी कॉल और चैट पर घंटों बात करती थी? उसके रूम से क्या कोई डायरी मिली है? पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले छात्रा ने घर में किसी से कोई खास बात तो साझा नहीं की थी। मामा, ममेरे भाई से 12 घंटे तक पूछताछ जांच के दौरान SIT की टीम ने छात्रा के मामा और उनके बेटे को लगभग 12 घंटे तक हिरासत में रखा था। पुलिस के मुताबिक, उनसे छात्रा से बातचीत, फोन कॉल, मैसेज और हालिया मुलाकातों को लेकर गहन पूछताछ की गई। हालांकि, सोमवार की देर रात दोनों को छोड़ दिया गया। SIT ने मामा और उसके बेटे से पूछा, आपकी छात्रा से आखिरी बार कब बात हुई थी? आखिरी बार बातचीत में क्या वो टेंशन में थी? छात्रा से किस बात पर आपलोगों की बातचीत हुई थी? क्या किसी तरह का पारिवारिक तनाव या विवाद था? क्या छात्रा ने किसी दबाव या डर का जिक्र किया था? हालांकि पूछताछ में कोई ठोस आपत्तिजनक तथ्य सामने नहीं आया है। परिजनों का कहना है कि, एक ही सवाल बार-बार पूछे जा रहे हैं। इससे लगता है कि पुलिस हमे ही शक के दायरे में रखी हो। भाई-बहन हैं, बात करने में क्या गलत?- पिता का गुस्सा पिता ने पुलिस की इस थ्योरी को सिरे से खारिज करते हुए कहा, मेरी बेटी और भांजे के बीच का रिश्ता भाई-बहन का रिश्ता कहलाता है। परिवार में रहते हैं, तो बात होती है। इसमें गलत क्या है? पुलिस बेवजह इस एंगल को तूल दे रही है। उन्होंने साफ कहा कि उनकी बेटी का किसी भी तरह का गलत कनेक्शन नहीं था। पिता पुलिस की थ्योरी से संतुष्ट नहीं छात्रा के पिता पुलिस की मौजूदा जांच दिशा से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है, जांच निष्पक्ष होनी चाहिए, लेकिन सिर्फ परिवार को ही कटघरे में खड़ा करना गलत है। मेरी बेटी की मौत से जुड़े कई सवाल अब भी अनसुलझे हैं। पिता मानते हैं कि पुलिस की यह थ्योरी जांच को गलत दिशा में ले जा सकती है। डायरी को लेकर उठते सवाल पुलिस सूत्रों में एक कथित डायरी का भी जिक्र हो रहा है, जिसमें छात्रा की मानसिक स्थिति या निजी बातों के संकेत होने की चर्चा है। हालांकि इस पर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। न ही इस मामले पर परिवार वालों ने कुछ कहा है। उनका सिर्फ इतना कहना है, इस डायरी के बारे में परिवार वालों को कुछ नहीं पता है। छात्रा के पिता ने कहा, मुझे ऐसी किसी डायरी की कोई जानकारी नहीं दी गई है। अगर कोई डायरी है भी, तो उसे सबूत के तौर पर सामने लाया जाए। अफवाहें फैलाने से सच्चाई सामने नहीं आएगी मां कुछ बोल नहीं रही बातचीत के दौरान हमने घर के अन्य लोगों से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन अब सब बोलने से बच रहे हैं। यहां तक कि मां भी कोई जवाब नहीं देती हैं। वो बस बुदबुदाते हुए कहती हैं कि हमारी बेटी चली गई और सब लोग हमी से सवाल कर रहे हैं। ई कैसा जांच चल रहा है। पुलिस से पूछे गए वो 5 सवाल जिसके जवाब नहीं मिले 1- लापरवाही करने वाले पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी? 6 जनवरी से 9 जनवरी तक मामला पुलिस की जानकारी में रहा। फिर भी FIR, सीन प्रिजर्वेशन, CCTV जब्ती और संदिग्धों से पूछताछ में देरी क्यों हुई? 2- जिस अस्पताल ने रेप या गंभीर चोट का स्पष्ट जिक्र नहीं किया, उस पर एक्शन कब? जब बाद में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयान से मामला स्पष्ट हो गया, तो क्या अस्पताल पर एक्शन नहीं होना चाहिए? 3- हॉस्टल की संचालिका, उसके दोनों बेटे और केयर टेकर अब कहां हैं? घटना के इतने दिन बाद भी ये लोग पुलिस की पकड़ से बाहर क्यों हैं? किस आधार पर इन्हें थाने बुलाया गया था और किसके दबाव में छोड़ दिया गया? 4- मुख्य आरोपियों में अब तक किस-किस की गिरफ्तारी हुई? अगर यह मामला इतना संवेदनशील है, तो अब तक गिरफ्तारी शून्य क्यों है? कुछ संदिग्धों को उठाया गया है उनका खुलासा कब होगा। 5- परिजनों को डराने-धमकाने के आरोपों पर पुलिस क्या कार्रवाई करेगी? पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देने में देरी और धमकी के आरोपों पर जवाब कौन देगा? अब उन आरोपियों के बारे में जानिए जिनकी अभी भी तलाश जारी है… आरोपी –1: हॉस्टल मालकिन नीलम अग्रवाल नीलम अग्रवाल शंभू गर्ल्स हॉस्टल की संचालिका हैं। छात्रा इसी हॉस्टल में रहती थी। 9 जनवरी को नीलम अग्रवाल खुद अस्पताल पहुंचती हैं और परिजनों से कहती हैं कि “हॉस्टल का नाम बदनाम हो जाएगा, केस वापस ले लीजिए।” यह बयान अपने आप में गंभीर है। गर हॉस्टल में सब कुछ ठीक था, तो केस वापस लेने का लालच क्यों दिया गया? नीलम अग्रवाल को कुछ देर के लिए थाने ले जाया गया, लेकिन बाद में छोड़ दिया गया। सवाल है, किस आधार पर छोड़ा गया? हॉस्टल की CCTV फुटेज, रजिस्टर, एंट्री-एग्जिट लॉग, सबकी जिम्मेदारी हॉस्टल संचालक की होती है। लेकिन अब तक न तो CCTV सामने आया, न यह साफ है कि हॉस्टल की रात की गतिविधियों की जांच हुई या नहीं। आरोपी –2: केयर टेकर नीतू और चंचला केयर टेकर नीतू छात्रा को अस्पताल लेकर जाती है, लेकिन पहले सेंट्रल हॉस्पिटल न ले जाकर प्रभात मेमोरियल ले जाती है। यह फैसला किसके कहने पर हुआ, इसका जवाब आज तक नहीं मिला। 7 और 8 जनवरी को हॉस्टल में मौजूद दूसरी केयर टेकर चंचला की भूमिका भी संदिग्ध है। रिश्तेदारों का दावा है कि उस वक्त CCTV चेक किया जा रहा था। घटना के बाद दोनों केयर टेकर कहां चली गईं— यह पुलिस अब तक सार्वजनिक नहीं कर पाई है। आरोपी –3: मनीष रंजन जेल में, उसके गार्ड्स कहां हैं जिस इमारत में हॉस्टल चलता है, उसका मालिक मनीष रंजन है, जो उसी बिल्डिंग के ऊपरी फ्लोर पर रहता है। परिजनों का आरोप है कि 6 जनवरी से लेकर प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल में आखिरी दिन तक मनीष रंजन का गार्ड परिजनों के पीछे-पीछे घूमता रहा। यह निगरानी क्यों हो रही थी? क्या किसी को डराने या कंट्रोल करने की कोशिश हो रही थी? अब मकान मालिक के गार्ड्स कहां हैं। इस पर अब तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। पुलिस ने अब तक क्या क्या किया ‘मेरी बेटी के हत्यारे को ढूंढने की जगह पुलिस हमारे परिवार-वालों पर शक कर रही है। तीन बार SIT हमारे घर आ चुकी है। हर बार वही सवाल, वही शक। इससे हम सब मानसिक रूप से टूट चुके हैं। SIT के आरोप सरासर गलत हैं।’ ‘मेरे साले-भांजे का इस घटना से कोई मतलब नहीं है। घटना को घटे 9 दिन से ज्यादा हो गए हैं और पुलिस अभी तक मेरी बेटी के हत्यारों तक नहीं पहुंच पाई है। जब तक मेरी बेटी को इंसाफ नहीं मिलेगा, तब तक मैं संतुष्ट नहीं रहूंगा।’ ये कहना है पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा के पिता का, जिसकी बेटी की रेप के बाद अस्पताल में मौत हो गई। NEET छात्रा की मौत के बाद SIT की टीम जांच में जुटी है। टीम पटना से लेकर जहानाबाद तक हर पहलू की जांच कर रही है। SIT ने मृतक छात्रा के पिता और परिवार से किस तरह के सवाल कर रही है, ये जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम गांव में पहुंची। पढ़िए रिपोर्ट… पिता बोले- सिर्फ हत्या का नहीं, मामला पॉक्सो एक्ट का है पिता का कहना है कि यह मामला सिर्फ हत्या का नहीं है बल्कि पॉक्सो एक्ट के तहत गंभीर अपराध का है। उन्होंने साफ मांग रखी है कि मामले की जांच पॉक्सो एक्ट के तहत हो और दोषियों को फांसी की सजा दी जाए। परिवार का दावा है कि पुलिस की मौजूदा थ्योरी गलत दिशा में जा रही है, जिससे असली अपराधी अब तक बचे हुए हैं। SIT ने छात्रा के माता-पिता, मामा-ममेरे भाई से पूछताछ कर चुकी है। अब तक कितनी बार गांव पहुंची SIT नीट छात्रा की मौत के बाद गठित SIT अब तक तीन बार जहानाबाद में छात्रा के गांव पहुंच चुकी है। छात्रा के पिता का कहना है, ‘हर बार टीम ने लगभग 12-12 घंटे तक गांव में डेरा डाले रखती है। मुझसे, लड़की के मामा और ममेरे भाई से लगभग एक ही तरह के सवाल कर रही है।’ पीड़ित पिता ने बताया, ‘SIT हमसे पूछ रही- आपकी बेटी के डेथ से पहले घर का माहौल कैसा था? बेटी पर पढ़ाई का दबाव तो नहीं था? हाल के दिनों में क्या छात्रा के व्यवहार में कोई बदलाव आए थे? परिवार के सदस्यों के साथ उसके संबंध कैसे थे? क्या कोई उसे परेशान कर रहा था? कितनी देर तक वो मोबाइल इस्तेमाल करती थी? क्या किसी से भी कॉल और चैट पर घंटों बात करती थी? उसके रूम से क्या कोई डायरी मिली है? पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले छात्रा ने घर में किसी से कोई खास बात तो साझा नहीं की थी। मामा, ममेरे भाई से 12 घंटे तक पूछताछ जांच के दौरान SIT की टीम ने छात्रा के मामा और उनके बेटे को लगभग 12 घंटे तक हिरासत में रखा था। पुलिस के मुताबिक, उनसे छात्रा से बातचीत, फोन कॉल, मैसेज और हालिया मुलाकातों को लेकर गहन पूछताछ की गई। हालांकि, सोमवार की देर रात दोनों को छोड़ दिया गया। SIT ने मामा और उसके बेटे से पूछा, आपकी छात्रा से आखिरी बार कब बात हुई थी? आखिरी बार बातचीत में क्या वो टेंशन में थी? छात्रा से किस बात पर आपलोगों की बातचीत हुई थी? क्या किसी तरह का पारिवारिक तनाव या विवाद था? क्या छात्रा ने किसी दबाव या डर का जिक्र किया था? हालांकि पूछताछ में कोई ठोस आपत्तिजनक तथ्य सामने नहीं आया है। परिजनों का कहना है कि, एक ही सवाल बार-बार पूछे जा रहे हैं। इससे लगता है कि पुलिस हमे ही शक के दायरे में रखी हो। भाई-बहन हैं, बात करने में क्या गलत?- पिता का गुस्सा पिता ने पुलिस की इस थ्योरी को सिरे से खारिज करते हुए कहा, मेरी बेटी और भांजे के बीच का रिश्ता भाई-बहन का रिश्ता कहलाता है। परिवार में रहते हैं, तो बात होती है। इसमें गलत क्या है? पुलिस बेवजह इस एंगल को तूल दे रही है। उन्होंने साफ कहा कि उनकी बेटी का किसी भी तरह का गलत कनेक्शन नहीं था। पिता पुलिस की थ्योरी से संतुष्ट नहीं छात्रा के पिता पुलिस की मौजूदा जांच दिशा से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है, जांच निष्पक्ष होनी चाहिए, लेकिन सिर्फ परिवार को ही कटघरे में खड़ा करना गलत है। मेरी बेटी की मौत से जुड़े कई सवाल अब भी अनसुलझे हैं। पिता मानते हैं कि पुलिस की यह थ्योरी जांच को गलत दिशा में ले जा सकती है। डायरी को लेकर उठते सवाल पुलिस सूत्रों में एक कथित डायरी का भी जिक्र हो रहा है, जिसमें छात्रा की मानसिक स्थिति या निजी बातों के संकेत होने की चर्चा है। हालांकि इस पर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। न ही इस मामले पर परिवार वालों ने कुछ कहा है। उनका सिर्फ इतना कहना है, इस डायरी के बारे में परिवार वालों को कुछ नहीं पता है। छात्रा के पिता ने कहा, मुझे ऐसी किसी डायरी की कोई जानकारी नहीं दी गई है। अगर कोई डायरी है भी, तो उसे सबूत के तौर पर सामने लाया जाए। अफवाहें फैलाने से सच्चाई सामने नहीं आएगी मां कुछ बोल नहीं रही बातचीत के दौरान हमने घर के अन्य लोगों से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन अब सब बोलने से बच रहे हैं। यहां तक कि मां भी कोई जवाब नहीं देती हैं। वो बस बुदबुदाते हुए कहती हैं कि हमारी बेटी चली गई और सब लोग हमी से सवाल कर रहे हैं। ई कैसा जांच चल रहा है। पुलिस से पूछे गए वो 5 सवाल जिसके जवाब नहीं मिले 1- लापरवाही करने वाले पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी? 6 जनवरी से 9 जनवरी तक मामला पुलिस की जानकारी में रहा। फिर भी FIR, सीन प्रिजर्वेशन, CCTV जब्ती और संदिग्धों से पूछताछ में देरी क्यों हुई? 2- जिस अस्पताल ने रेप या गंभीर चोट का स्पष्ट जिक्र नहीं किया, उस पर एक्शन कब? जब बाद में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयान से मामला स्पष्ट हो गया, तो क्या अस्पताल पर एक्शन नहीं होना चाहिए? 3- हॉस्टल की संचालिका, उसके दोनों बेटे और केयर टेकर अब कहां हैं? घटना के इतने दिन बाद भी ये लोग पुलिस की पकड़ से बाहर क्यों हैं? किस आधार पर इन्हें थाने बुलाया गया था और किसके दबाव में छोड़ दिया गया? 4- मुख्य आरोपियों में अब तक किस-किस की गिरफ्तारी हुई? अगर यह मामला इतना संवेदनशील है, तो अब तक गिरफ्तारी शून्य क्यों है? कुछ संदिग्धों को उठाया गया है उनका खुलासा कब होगा। 5- परिजनों को डराने-धमकाने के आरोपों पर पुलिस क्या कार्रवाई करेगी? पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देने में देरी और धमकी के आरोपों पर जवाब कौन देगा? अब उन आरोपियों के बारे में जानिए जिनकी अभी भी तलाश जारी है… आरोपी –1: हॉस्टल मालकिन नीलम अग्रवाल नीलम अग्रवाल शंभू गर्ल्स हॉस्टल की संचालिका हैं। छात्रा इसी हॉस्टल में रहती थी। 9 जनवरी को नीलम अग्रवाल खुद अस्पताल पहुंचती हैं और परिजनों से कहती हैं कि “हॉस्टल का नाम बदनाम हो जाएगा, केस वापस ले लीजिए।” यह बयान अपने आप में गंभीर है। गर हॉस्टल में सब कुछ ठीक था, तो केस वापस लेने का लालच क्यों दिया गया? नीलम अग्रवाल को कुछ देर के लिए थाने ले जाया गया, लेकिन बाद में छोड़ दिया गया। सवाल है, किस आधार पर छोड़ा गया? हॉस्टल की CCTV फुटेज, रजिस्टर, एंट्री-एग्जिट लॉग, सबकी जिम्मेदारी हॉस्टल संचालक की होती है। लेकिन अब तक न तो CCTV सामने आया, न यह साफ है कि हॉस्टल की रात की गतिविधियों की जांच हुई या नहीं। आरोपी –2: केयर टेकर नीतू और चंचला केयर टेकर नीतू छात्रा को अस्पताल लेकर जाती है, लेकिन पहले सेंट्रल हॉस्पिटल न ले जाकर प्रभात मेमोरियल ले जाती है। यह फैसला किसके कहने पर हुआ, इसका जवाब आज तक नहीं मिला। 7 और 8 जनवरी को हॉस्टल में मौजूद दूसरी केयर टेकर चंचला की भूमिका भी संदिग्ध है। रिश्तेदारों का दावा है कि उस वक्त CCTV चेक किया जा रहा था। घटना के बाद दोनों केयर टेकर कहां चली गईं— यह पुलिस अब तक सार्वजनिक नहीं कर पाई है। आरोपी –3: मनीष रंजन जेल में, उसके गार्ड्स कहां हैं जिस इमारत में हॉस्टल चलता है, उसका मालिक मनीष रंजन है, जो उसी बिल्डिंग के ऊपरी फ्लोर पर रहता है। परिजनों का आरोप है कि 6 जनवरी से लेकर प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल में आखिरी दिन तक मनीष रंजन का गार्ड परिजनों के पीछे-पीछे घूमता रहा। यह निगरानी क्यों हो रही थी? क्या किसी को डराने या कंट्रोल करने की कोशिश हो रही थी? अब मकान मालिक के गार्ड्स कहां हैं। इस पर अब तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। पुलिस ने अब तक क्या क्या किया  

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