17 मार्च 2026 की रात मुजफ्फरपुर में पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुई हिंसक झड़प में 55 साल के एक व्यक्ति जगवीर राय की मौत हो गई थी। मृतक जगवीर रायके बेटे अविनाश कुमार का आरोप है कि झड़प के दौरान दरोगा राजा सिंह ने ही उनके पिता के सीने में गोली मारी। अब इस मामले में SSP कांतेश कुमार मिश्रा ने थानाध्यक्ष राजा सिंह समेत पूरी छापेमारी टीम को सस्पेंड कर दिया है। SSP ने यह कार्रवाई ग्रामीण एसपी राजेश कुमार की जांच रिपोर्ट के आधार पर की। ग्रामीण SP ने अपने रिपोर्ट में कहा है कि छापेमारी टीम ने सही निर्णय नहीं लिया, जिससे यह घटना घटी है। इन पर गिरी गाज- 1. राजा सिंह (तत्कालीन थानाध्यक्ष, गायघाट)
2. मनीष कुमार (पु.अ.नि.)
3. रंजन कुमार (पी.टी.सी.)
4. चांदनी कुमारी (म.सि.)
5. ओम प्रकाश (चा.ह.)
6. प्रहलाद कुमार (स्थानीय चौकीदार) इसके अलावा, टीम में शामिल गृह रक्षकों (अपरजीत कुमार और मनिष कुमार) के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए जिला पदाधिकारी को लेटर लिखा गया है। इस कार्रवाई से जिले के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। सिलसिलेवार तरीके से जानिए पुलिस-पब्लिक झड़प में हुई मौत और परिजनों के आक्रोश की पूरी कहानी… सबसे पहले जानिए क्या है मामला मामला मुजफ्फरपुर के गायघाट थाना क्षेत्र के बेरूआ पंचायत के चोरनिया गांव का है। गायघाट थानाध्यक्ष इस गांव में छापेमारी करने पहुंची थी। इस दौरान भीड़ ने पुलिस बल पर पथराव किया और लाठी-डंडों से हमला कर दिया। ग्रामीणों की भीड़ ने फायरिंग भी की थी। भीड़ के बीच घिरने पर थानाध्यक्ष राजा सिंह ने बचाव में फायरिंग की। इस घटना में ग्रामीण जगतवीर राय की मौत हो गई थी। हालांकि, इस घटना के बाद पुलिस की ओर से कहा गया कि 17 मार्च को पुलिस पॉक्सो एक्ट के एक आरोपी को गिरफ्तार करने गांव में पहुंची थी। आरोपी को पकड़ने के दौरान ग्रामीण उग्र हो गए थे और विरोध शुरू कर दिया था। मजबूरन पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी। बेटा बोला- पापा के सीने में गोली मारी मृतक जगतवीर राय के बड़े बेटे अजय ने बताया कि देर रात पुलिस मेरे घर के पिछले दरवाजे से घुसी। इसके बाद घर में खोजबीन की, जब कुछ नहीं मिला तो थानेदार ने मेरी ओर इशारा करते हुए पुलिसकर्मियों से कहा कि इसे साथ ले चलो। अजय ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने मेरी पिटाई शुरू कर दी, मुझ पर कोई भी किसी तरह का केस दर्ज नहीं है। पुलिस अगर किसी आरोपी की तलाश के लिए आई थी, तो पुलिसकर्मियों को आरोपी के घर जाना चाहिए था, मेरे घर में घुसने का कोई मतलब नहीं था। मैंने थानेदार से कहा कि मेरे नाम से कोई वारंट है तो मुझे कागज दिखाइए, तो थानेदार ने कहा कि नहीं वारंट वगैरह कुछ नहीं है, तुम्हें मेरे साथ चलना होगा। इसके बाद पुलिस मुझे ले जाने लगी, तो मेरी बेटी ने शोर मचाना शुरू किया, कहा कि पापा को पकड़कर ले जा रहे हैं। इसके बाद आसपास के लोग उठे और चोर-चोर कहकर शोर मचाने लगे। अब जानिए ग्रामीण SP के रिपोर्ट में क्या है ग्रामीण एसपी की जांच रिपोर्ट में छापेमारी प्रक्रिया में गंभीर खामियां सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, थानाध्यक्ष राजा सिंह पर्याप्त पुलिस बल और बिना सूचना लिए संवेदनशील इलाके में छापेमारी करने चले गए थे। चोरनिया गांव में पहले भी तत्कालीन थानाध्यक्ष सरुण कुमार मंडल का विरोध किया गया था, जिससे राजा सिंह ने नजरअंदाज किया। छापेमारी दल ने संयमित और विवेकपूर्ण तरीके से कार्रवाई नहीं की, जिससे स्थिति बेकाबू हो गई। स्थानीय चौकीदार प्रह्लाद कुमार ने भी फरार बदमाश और ग्रामीणों के संभावित विरोध के बारे में टीम को आगाह नहीं किया था। इस रिपोर्ट के बाद SSP ने गायघाट थानाध्यक्ष राजा सिंह, ASI मनीष कुमार के अलावा रंजन कुमार, चांदनी कुमारी, ओम प्रकाश और चौकीदार प्रह्लाद कुमार को संस्पेंड कर दिया गया है। जगवीर राय की हत्या के बाद सियासत नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव बुधवार को पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे। पीड़ित परिवार से मिलने के बाद तेजस्वी ने कहा था कि पुलिस बेलगाम है। जगतवीर राय को न्याय दिलाने के लिए मानवाधिकार आयोग भी जाएंगे। आरोपी पुलिस को सस्पेंड और गिरफ्तारी जल्द नहीं होती है तो जिला बंद करेंगे। मैं कमजोर नहीं हूं। यदि किसी को लगता है कि हम कमजोर हैं, तो भूल जाएं, हमें सीटें भले कम मिली है। लेकिन वोट का प्रतिशत अधिक है, जनता हमारे साथ है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि हत्या के आरोप झेल रहे एक पुलिस अधिकारी को सम्मानित किया जा रहा है। हालांकि, इस मामले में मुजफ्फरपुर पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इसे अफवाह करार दिया है। तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को घेरते हुए आरोप लगाया कि एक “भ्रष्ट अधिकारी” की ओर से कथित रूप से गोली मारकर एक निर्दोष नागरिक की हत्या के बावजूद उसे मेडल दिया जा रहा है, जो बेहद निंदनीय है। तेजस्वी ने अपने पोस्ट के साथ तिरहुत डीआईजी कार्यालय के एक पत्र की फोटो भी साझा की, जिसमें वीर पशुपतिनाथ मेडल के लिए प्रस्तावित पुलिसकर्मियों की सूची में राजा सिंह का नाम शामिल बताया गया। बता दें कि बुधवार को तेजस्वी यादव ने गायघाट गोलीकांड के मृतक जगतवीर राय के परिजन से मुलाकात की थी। उन्होंने परिजन को भरोसा दिलाया कि आरोपी थानेदार की गिरफ्तारी होगी। नहीं तो मुजफ्फरपुर में वे आंदोलन करेंगे। इसके अगले दिन गुरुवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर यह पोस्ट शेयर किया है। पुलिस का जवाब- ‘अफवाह से बचें’ सोशल मीडिया पर वायरल राजा सिंह को मेडल देने वाली खबर और तेजस्वी यादव के पोस्ट के बाद मुजफ्फरपुर एसपी कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया कि वायरल हो रही जानकारी भ्रामक है। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक स्तर पर पुरस्कार के लिए नामों का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन बाद में सामने आए मामले की गंभीरता को देखते हुए 25 मार्च 2026 को ही आदेश जारी कर राजा सिंह को वीर पशुपतिनाथ मेडल और प्रशस्ति पत्र से वंचित कर दिया गया है। पप्पू यादव से लिपटकर रोई बेटी तेजस्वी से पहले पूर्णिया सांसद मृतक के परिवार से मिलने पहुंचे। उनके पहुंचते ही मृतक की बेटी उनसे लिपटकर रोने लगीं। ये सब देख कर सांसद भी भावुक हो गए। पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और प्रशासन अपराधियों तथा भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण दे रही है। उन्होंने कहा कि आरोपी अब तक गिरफ्तार नहीं किए गए हैं। 17 मार्च 2026 की रात मुजफ्फरपुर में पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुई हिंसक झड़प में 55 साल के एक व्यक्ति जगवीर राय की मौत हो गई थी। मृतक जगवीर रायके बेटे अविनाश कुमार का आरोप है कि झड़प के दौरान दरोगा राजा सिंह ने ही उनके पिता के सीने में गोली मारी। अब इस मामले में SSP कांतेश कुमार मिश्रा ने थानाध्यक्ष राजा सिंह समेत पूरी छापेमारी टीम को सस्पेंड कर दिया है। SSP ने यह कार्रवाई ग्रामीण एसपी राजेश कुमार की जांच रिपोर्ट के आधार पर की। ग्रामीण SP ने अपने रिपोर्ट में कहा है कि छापेमारी टीम ने सही निर्णय नहीं लिया, जिससे यह घटना घटी है। इन पर गिरी गाज- 1. राजा सिंह (तत्कालीन थानाध्यक्ष, गायघाट)
2. मनीष कुमार (पु.अ.नि.)
3. रंजन कुमार (पी.टी.सी.)
4. चांदनी कुमारी (म.सि.)
5. ओम प्रकाश (चा.ह.)
6. प्रहलाद कुमार (स्थानीय चौकीदार) इसके अलावा, टीम में शामिल गृह रक्षकों (अपरजीत कुमार और मनिष कुमार) के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए जिला पदाधिकारी को लेटर लिखा गया है। इस कार्रवाई से जिले के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। सिलसिलेवार तरीके से जानिए पुलिस-पब्लिक झड़प में हुई मौत और परिजनों के आक्रोश की पूरी कहानी… सबसे पहले जानिए क्या है मामला मामला मुजफ्फरपुर के गायघाट थाना क्षेत्र के बेरूआ पंचायत के चोरनिया गांव का है। गायघाट थानाध्यक्ष इस गांव में छापेमारी करने पहुंची थी। इस दौरान भीड़ ने पुलिस बल पर पथराव किया और लाठी-डंडों से हमला कर दिया। ग्रामीणों की भीड़ ने फायरिंग भी की थी। भीड़ के बीच घिरने पर थानाध्यक्ष राजा सिंह ने बचाव में फायरिंग की। इस घटना में ग्रामीण जगतवीर राय की मौत हो गई थी। हालांकि, इस घटना के बाद पुलिस की ओर से कहा गया कि 17 मार्च को पुलिस पॉक्सो एक्ट के एक आरोपी को गिरफ्तार करने गांव में पहुंची थी। आरोपी को पकड़ने के दौरान ग्रामीण उग्र हो गए थे और विरोध शुरू कर दिया था। मजबूरन पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी। बेटा बोला- पापा के सीने में गोली मारी मृतक जगतवीर राय के बड़े बेटे अजय ने बताया कि देर रात पुलिस मेरे घर के पिछले दरवाजे से घुसी। इसके बाद घर में खोजबीन की, जब कुछ नहीं मिला तो थानेदार ने मेरी ओर इशारा करते हुए पुलिसकर्मियों से कहा कि इसे साथ ले चलो। अजय ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने मेरी पिटाई शुरू कर दी, मुझ पर कोई भी किसी तरह का केस दर्ज नहीं है। पुलिस अगर किसी आरोपी की तलाश के लिए आई थी, तो पुलिसकर्मियों को आरोपी के घर जाना चाहिए था, मेरे घर में घुसने का कोई मतलब नहीं था। मैंने थानेदार से कहा कि मेरे नाम से कोई वारंट है तो मुझे कागज दिखाइए, तो थानेदार ने कहा कि नहीं वारंट वगैरह कुछ नहीं है, तुम्हें मेरे साथ चलना होगा। इसके बाद पुलिस मुझे ले जाने लगी, तो मेरी बेटी ने शोर मचाना शुरू किया, कहा कि पापा को पकड़कर ले जा रहे हैं। इसके बाद आसपास के लोग उठे और चोर-चोर कहकर शोर मचाने लगे। अब जानिए ग्रामीण SP के रिपोर्ट में क्या है ग्रामीण एसपी की जांच रिपोर्ट में छापेमारी प्रक्रिया में गंभीर खामियां सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, थानाध्यक्ष राजा सिंह पर्याप्त पुलिस बल और बिना सूचना लिए संवेदनशील इलाके में छापेमारी करने चले गए थे। चोरनिया गांव में पहले भी तत्कालीन थानाध्यक्ष सरुण कुमार मंडल का विरोध किया गया था, जिससे राजा सिंह ने नजरअंदाज किया। छापेमारी दल ने संयमित और विवेकपूर्ण तरीके से कार्रवाई नहीं की, जिससे स्थिति बेकाबू हो गई। स्थानीय चौकीदार प्रह्लाद कुमार ने भी फरार बदमाश और ग्रामीणों के संभावित विरोध के बारे में टीम को आगाह नहीं किया था। इस रिपोर्ट के बाद SSP ने गायघाट थानाध्यक्ष राजा सिंह, ASI मनीष कुमार के अलावा रंजन कुमार, चांदनी कुमारी, ओम प्रकाश और चौकीदार प्रह्लाद कुमार को संस्पेंड कर दिया गया है। जगवीर राय की हत्या के बाद सियासत नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव बुधवार को पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे। पीड़ित परिवार से मिलने के बाद तेजस्वी ने कहा था कि पुलिस बेलगाम है। जगतवीर राय को न्याय दिलाने के लिए मानवाधिकार आयोग भी जाएंगे। आरोपी पुलिस को सस्पेंड और गिरफ्तारी जल्द नहीं होती है तो जिला बंद करेंगे। मैं कमजोर नहीं हूं। यदि किसी को लगता है कि हम कमजोर हैं, तो भूल जाएं, हमें सीटें भले कम मिली है। लेकिन वोट का प्रतिशत अधिक है, जनता हमारे साथ है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि हत्या के आरोप झेल रहे एक पुलिस अधिकारी को सम्मानित किया जा रहा है। हालांकि, इस मामले में मुजफ्फरपुर पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इसे अफवाह करार दिया है। तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को घेरते हुए आरोप लगाया कि एक “भ्रष्ट अधिकारी” की ओर से कथित रूप से गोली मारकर एक निर्दोष नागरिक की हत्या के बावजूद उसे मेडल दिया जा रहा है, जो बेहद निंदनीय है। तेजस्वी ने अपने पोस्ट के साथ तिरहुत डीआईजी कार्यालय के एक पत्र की फोटो भी साझा की, जिसमें वीर पशुपतिनाथ मेडल के लिए प्रस्तावित पुलिसकर्मियों की सूची में राजा सिंह का नाम शामिल बताया गया। बता दें कि बुधवार को तेजस्वी यादव ने गायघाट गोलीकांड के मृतक जगतवीर राय के परिजन से मुलाकात की थी। उन्होंने परिजन को भरोसा दिलाया कि आरोपी थानेदार की गिरफ्तारी होगी। नहीं तो मुजफ्फरपुर में वे आंदोलन करेंगे। इसके अगले दिन गुरुवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर यह पोस्ट शेयर किया है। पुलिस का जवाब- ‘अफवाह से बचें’ सोशल मीडिया पर वायरल राजा सिंह को मेडल देने वाली खबर और तेजस्वी यादव के पोस्ट के बाद मुजफ्फरपुर एसपी कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया कि वायरल हो रही जानकारी भ्रामक है। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक स्तर पर पुरस्कार के लिए नामों का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन बाद में सामने आए मामले की गंभीरता को देखते हुए 25 मार्च 2026 को ही आदेश जारी कर राजा सिंह को वीर पशुपतिनाथ मेडल और प्रशस्ति पत्र से वंचित कर दिया गया है। पप्पू यादव से लिपटकर रोई बेटी तेजस्वी से पहले पूर्णिया सांसद मृतक के परिवार से मिलने पहुंचे। उनके पहुंचते ही मृतक की बेटी उनसे लिपटकर रोने लगीं। ये सब देख कर सांसद भी भावुक हो गए। पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और प्रशासन अपराधियों तथा भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण दे रही है। उन्होंने कहा कि आरोपी अब तक गिरफ्तार नहीं किए गए हैं।


