ब्लू ड्रम केस में फरवरी तक हो सकती है सजा:मुस्कान-साहिल दोनों का अपराध बराबर, बच्चे के नाम पर नहीं मिलेगी रियायत

मेरठ के चर्चित ब्लू ड्रम केस में फरवरी 2026 तक फैसला आ सकता है। मर्चेंट नेवी ऑफिसर सौरभ राजपूत के हत्यारोपी मुस्कान-साहिल दोनों को फरवरी अंत तक सजा हो सकती है।
जिस तरह शासकीय अधिवक्ता और सौरभ के वकील केस में पैरवी कर रहे हैं उसे देखते हुए संभावना है कि फरवरी लास्ट में ही केस में फाइनल डिसीजन आ जाएगा। अब तक की हुई सुनवाईयों और सुबूतों के आधार पर मुस्कान-साहिल दोनों ही इस हत्याकांड में बराबर के दोषी हैं। माना जा रहा है कि दोनों को समान सजा हो सकती है।
पूरे मामले पर दैनिक भास्कर ने जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी केके चौबे से बातचीत की पढ़िए… सवाल- सौरभ हत्याकांड में लेटेस्ट अपडेट क्या है?
जबाव- केस में लगभग 14 गवाहों के बयान हो चुके हैं। अब 2-3 गवाहों की गवाही और कराएंगे। हमारा यह मुकदमा लगभग फाइनल फेज में हैं। लास्ट स्टेज के मुकदमे में संभावना है कि फरवरी में ही इसमें फैसला आ सकता है। सवाल- अब और कितनी गवाहियां बाकी हैं?
जबाव- अमूमन मुख्य गवाहियां पूरी हो चुकी हैं। मुकदमे में इलेक्ट्रानिक साक्ष्य संकलन करने वाले गवाह की गवाही होगी। जिसने 65बी का प्रमाणपत्र दिया था।
फोरेंसिक फील्ड यूनिट इंचार्ज की गवाही होगी। इसके बाद गवाही लगभग पूरी हो जाएंगी। फिर फाइनल आर्गेयूमेंट होगा। साक्ष्य संकलन जल्द से जल्द पूरा हो जाएगा। तेजी से तारीखें लगाकर सुनवाई कराई हैं। सवाल- अभी तक की गवाहियों के अनुसार मुस्कान-साहिल दोनों कितने दोषी हैं?
जबाव- जो धाराएं हैं वो दोनों पर लगी हैं। जिस तरह से अभी तक की गवाहियां और आर्गेयूमेंट हुआ है उसके अनुसार दोनों का बचना नामुमकिन है। हमारे साक्ष्य पूर्ण हैं। इस घटना में साहिल-मुस्कान दोनों का रोल समान है दोनों ने समान उद्देश्य और आशय से हत्या की है। दोनों का अपराध समान है सजा भी समान होगी। सवाल- मुस्कान-साहिल को क्या सजा हो सकती है?
जबाव- ये एक जघन्य हत्याकांड है। इसमें एक बहुत क्रूर और रिश्तों की हत्या करने वाली पत्नी है। पति, पत्नी का रिश्ता दुनिया के सभी रिश्तों में सबसे बड़ा रिश्ता होता है। विश्वास और एक दूसरे के प्रति समर्पण का रिश्ता होता है उसका भी कत्ल इस केस में हुआ है। वो भी क्रूर तरीके से कत्ल किया गया है। उसमें भी शरीर को तीन टुकड़ों में काटा गया। गर्दन, हाथों के पंजों का काटकर अलग किया गया, बॉडी को नीले ड्रम में डालकर सीमेंट से सील कर दिया है। ये अलग प्रकार की क्रूर मानसिकता का परिचायक है। यह देश में पहली ऐसी घटना हुई जिसमें इस तरह से हत्या के बाद सुबूतों को मिटाने का प्रयास किया गया। इसमें मृत्युदंड की सजा का भी प्रावधान है। मृत्युदंड नहीं तो आजीवन कारावास तय है। सवाल- मुस्कान ने हाल में बच्ची को जन्म दिया है, क्या इसका असर उसकी सजा पर आएगा?
जबाव- ऐसा बिल्कुल नहीं होगा। जेल में महिला बंदी के बच्चे के पालन पोषण का अलग प्रावधान है। 6 साल तक बच्चे की देखरेख जेल में होती है। लेकिन इससे सजा पर असर नहीं पड़ेगा।

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