Sarcopenia Symptoms Prevention: उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई बदलाव आते हैं, लेकिन एक बदलाव ऐसा है जो धीरे-धीरे होता है और हमें पता भी नहीं चलता मांसपेशियों का कम होना। इसे मेडिकल भाषा में सारकोपीनिया (Sarcopenia) कहा जाता है। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट Dr. Saurabh Sethi, जिन्होंने Harvard University, Stanford University और AIIMS जैसे संस्थानों से ट्रेनिंग ली है, बताते हैं कि 30 साल की उम्र के बाद हर साल लगभग 1% मांसपेशियां कम होने लगती हैं और ये प्रक्रिया बिना शोर-शराबे के चलती रहती है।
मांसपेशियां कम होना क्यों खतरनाक है?
एक रिपोर्ट जो The Lancet Public Health में प्रकाशित हुई, उसके अनुसार मांसपेशियां कम होने से शरीर की ताकत ही नहीं, कई जरूरी काम भी प्रभावित होते हैं। जब शरीर में मसल्स कम हो जाती हैं, तो मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। शरीर में फैट जल्दी जमा होने लगता है। इंसुलिन रेसिस्टेंस बढ़ सकता है। फैटी लिवर का खतरा बढ़ जाता है। हड्डियां और शरीर का पोश्चर कमजोर हो जाता है। दरअसल, मांसपेशियां शरीर में शुगर को कंट्रोल करने में मदद करती हैं। इन्हें शरीर का ग्लूकोज स्पंज भी कहा जाता है क्योंकि ये खून से शुगर को सोखकर ब्लड शुगर को संतुलित रखती हैं।
महिलाओं में जल्दी असर क्यों?
The Lancet में प्रकाशित एक पुराने शोध के अनुसार, महिलाओं में 35-40 की उम्र के बीच मांसपेशियां तेजी से कम हो सकती हैं। इसका कारण एस्ट्रोजन हार्मोन का कम होना है। इसलिए कई महिलाओं को वजन समान रहने के बावजूद कमजोरी महसूस होने लगती है।
शुरुआती संकेत जिन्हें नजरअंदाज न करें
सारकोपीनिया अचानक नहीं होता, इसके छोटे-छोटे संकेत पहले दिखते हैं-
- सीढ़ियां चढ़ते समय जल्दी थक जाना
- वजन समान रहने पर भी शरीर ढीला लगना
- बिना ज्यादा काम के थकान महसूस होना
इससे बचने का आसान तरीका
अच्छी बात ये है कि इसे रोका या धीमा किया जा सकता है। New England Journal of Medicine में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में भी रेजिस्टेंस ट्रेनिंग (जैसे हल्का वेट उठाना) मांसपेशियों को मजबूत बना सकती है और इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधार सकती है।
मांसपेशियों को मजबूत रखने के लिए
- रोजाना शरीर के वजन के अनुसार पर्याप्त प्रोटीन लें
- वॉकिंग या स्ट्रेंथ एक्सरसाइज करें
- अच्छी और पूरी नींद लें
- शरीर में विटामिन D का स्तर सही रखें


