नगर आयुक्त को गंगा किनारे मिले कूड़े के ढ़ेर:डॉलफिन की मौत के बाद एक्शन मोड में है प्रशासन, औचक निरीक्षण कर जांची नालों की स्थिति

कानपुर में डॉलफिन की मौत के बाद अधिकारी एलर्ट मोड पर आ गए हैं। सोमवार को नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने टीम के साथ गंगा नदी के किनारों का औचक निरीक्षण किया और वहां की साफ-सफाई की व्यवस्था जांची। इस दौरान नगर आयुक्त को गंगा किनारे कूड़े का ढ़ेर नजर आया। रानीघाट में बायोरेमेडिएशन सेंटर के पास कूड़े का ढ़ेर मिलने पर नगर आयुक्त भड़क उठे। उन्होंने कर्मचारियों को जमकर फटकार लगाई। सफाई नायक रज्जव अली को उन्होंने निर्देश दिए कि तत्काल सफाई कराई जाए। वहीं भविष्य में दुबारा इस तरह की लापरवाही बिल्कुल न हो। गंगा में गिराए जा रहे हैं 7 नाले नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने दूषित जल गंगा में प्रवाह किए जाने के सूचनाओं के बाद टीम के साथ रानीघाट स्थित बायोरेमेडिएशन स्थल का निरीक्षण किया। उनके साथ जोनल इंजीनियर-4 मीनाक्षी अग्रवाल, अर्बन इंफ्रा विशेषज्ञ राहुल अवस्थी और अन्य अधिकारी मौजूद रहे। रानीघाट में बायोरेमेडिएशन का काम क्रियाशील मिला। टीम ने नगर आयुक्त को बताया कि गंगा नदी में 7 नाले प्रवाह किए जा रहे हैं। इसमें रानीघाट, गोला घाट, रामेश्वर घाट, सत्तीचौरा घाट, डबका नाला, गुफ्तारघाट, परमिया का नाला बायोरेमेडिएशन के बाद नदी में प्रवाह किये जा रहे है। वहीं 6 अन्य नाले पांडु नदी में प्रवाह किये जा रहे है। निरीक्षण के समय नहीं मिला रजिस्टर बायोरेमीडेशन का काम डा. हमेन्त गुप्ता की फर्म मे ऑर्गेनिक 121 साइंसटिफिक प्रालि द्वारा किया जा रहा है। जोनल इंजीनियर मीनाक्षी अग्रवाल ने बताया कि बायोरेमेडिएशन के जरिए पर्यावरणीय परिस्थितियों को बदलकर सूक्ष्म जीवों की वृद्धि को प्रोत्साहित किया जाता है।लक्षित प्रदूषकों को विघटित किया जाता है। इसमें ट्रायल पीरियड के अंत तक 40 प्रतिशत बीओडी और सीओडी कम हो जाना चाहिए।ट्रायल पीरियड के बाद 70 प्रतिशत कम होना चाहिए।इसमें गंगा नदी में प्रवाहित होने वाले पानी के नमूने की जांच के लिए सीएसआईआर को भेजा गया है। उन्होंने बताया कि हर स्थान पर रजिस्टर होता है, लेकिन मौके पर कोई रजिस्टर नहीं मिला। क्षेत्रिय इंजीनियर करेंगे रजिस्टर पर हस्ताक्षर निरीक्षण में मिली कमियों के बाद नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए तत्काल व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी स्थाल पर नालियों से लिए गए जल निकासी को दर्ज करने के लिए माप पुस्तिका रखने के निर्देश दिए हैं। जिसमें जोनल इंजीनियर हर दिन हस्ताक्षर करेंगे। हर बायोरेमेडिएशन स्थल पर प्रतिदिन दी जाने वाली एंजाइम/वैक्टीरिया/रसायन की मात्रा का भी रिकॉर्ड रखा जाएगा। इसके लिए भी एक रजिस्टर तैयार किया जाएगा, जिसमें दिन में एंजाइम डालते समय जियोटैग फोटो लगाए जाएंगे। सभी नाले और बायोरेमेडिएशन स्थल पर टेस्टिंग विश्लेषण पुस्तिका का रख-रखाव किया जाएगा, इसमें भी संबंधित इंजीनियर को हर दिन साइन करना होगा।

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