पीथमपुर में बन रहे मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क का संचालन इसी साल अंत तक शुरू हो सकता है। पार्क शुरू होने से आईसीडी पर दबाव कम होने के साथ ही इंदौर से कंटेनर शिपमेंट आसान होगा। साथ ही इंदौर-पीथमपुर के उद्योगों को माल भेजने में समय और खर्च कम होगा। स्थानीय युवाओं के लिए लॉजिस्टिक, वेयरहाउसिंग और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में रोजगार बढ़ेगा। लॉजिस्टिक पार्क के संचालन के लिए निर्माण एजेंसी जीआर इंफ्रास्ट्रक्चर ने सिंगापुर की पीएसए पोर्ट लॉजिस्टिक्स की भारत स्थित व्यावसायिक इकाई अमेय लॉजिस्टिक्स के साथ समझौता किया है। इसके तहत वेयरहाउस, इनलैंड कंटेनर डिपो (आईसीडी) सहित लॉजिस्टिक पार्क के प्रमुख ऑपरेशन्स अमेय लॉजिस्टिक्स संभालेगी। दोनों कंपनियों के बीच यह एग्रीमेंट पिछले वर्ष साइन किया गया। भारत सरकार की गति शक्ति योजना के तहत जनवरी 2025 में शुरू हुए मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क के निर्माण में अब तक 27 प्रतिशत इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पूरा हो चुका है। इसमें वेयरहाउस, इनलैंड कंटेनर डिपो, ट्रक पार्किंग, प्रशासनिक भवन और आंतरिक सड़कों का निर्माण शामिल है। ड्रेनेज, लाइटिंग जैसी मूलभूत सुविधाओं तथा ट्रक चालकों के लिए सुविधा घर और ठहरने की व्यवस्था पर भी काम जारी है। शुरुआती चरण में सड़क मार्ग से कंटेनर शिपमेंट की सुविधा पीथमपुर में लगभग 275 एकड़ क्षेत्र में विकसित हो रहे 1110 करोड़ के इस लॉजिस्टिक पार्क में भविष्य में एम्यूजमेंट पार्क, मॉल और फाइव-स्टार होटल जैसी व्यावसायिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। साथ ही इसे इंदौर-दाहोद रेल लाइन से सीधी कनेक्टिविटी दी जाएगी, जिसके लिए लॉजिस्टिक पार्क को सागौर रेलवे स्टेशन से जोड़ा जाना प्रस्तावित है, हालांकि फिलहाल रेलवे लाइन टीही तक ही पहुंच पाई है। शुरुआती चरण में यह पार्क सड़क मार्ग से कंटेनर शिपमेंट की सुविधा देगा और यहीं विदेश से आने-जाने वाले कंटेनरों की कस्टम प्रोसेसिंग भी की जाएगी। 45 वर्षों के अनुसार बनाया हमने संचालन का जिम्मा पीएसए को सौंपा है और हम इस साल के अंत तक उन्हें निर्धारित इंफ्रास्ट्रक्चर बनाकर दे देंगे। प्रोजेक्ट 45 वर्षों की इंदौर की जरूरतों को देखते हुए बनाया गया है। – विशाल श्रीवास्तव, हेड, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क सरकार इसलिए कंटेनर शिपमेंट को बढ़ावा दे रही है 1. माल की सुरक्षा ज्यादा- कंटेनर सील्ड होते हैं, जिससे चोरी, नुकसान और मौसम के असर का खतरा कम हो जाता है। सामान्य (लूज) शिपमेंट में यह जोखिम ज्यादा रहता है। 2. समय की बचत- कंटेनर में लोड किया गया माल सीधे ट्रक, ट्रेन या जहाज पर शिफ्ट किया जा सकता है। बार-बार अनलोडिंग-रीलोडिंग नहीं करना पड़ती, जिससे ट्रांजिट टाइम घटता है। 3. लागत में कमी- हालांकि शुरुआत में कंटेनर महंगा लगता है, लेकिन कम नुकसान, कम देरी और तेज डिलीवरी के कारण कुल लॉजिस्टिक खर्च कम हो जाता है। 4. कस्टम और ट्रैकिंग आसान- कंटेनर शिपमेंट में कस्टम क्लीयरेंस, स्कैनिंग और डिजिटल ट्रैकिंग आसान होती है। इससे एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी बनती है। 85 हजार टीईयू क्षमता को 2 लाख करने का लक्ष्य इंदौर में वर्तमान में विदेश भेजे जाने वाले कंटेनरों की प्रोसेसिंग तीन इनलैंड कंटेनर डिपो में होती है। पहला कॉन-कॉर्प (कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) का टीही स्थित आईसीडी। दूसरा धन्नड़ आईसीडी और तीसरा खेड़ा आईसीडी। इनमें कॉन-कॉर्प का आईसीडी सबसे बड़ा है, जिसकी सालाना क्षमता करीब 48 हजार टीईयू है, जबकि धन्नड़ और खेड़ा आईसीडी की क्षमता 18-18 हजार टीईयू है। कॉन-कॉर्प का आईसीडी अंतरराष्ट्रीय के साथ-साथ घरेलू (डोमेस्टिक) कंटेनर ट्रांसपोर्ट की सुविधा भी देता है। इसमें सालाना लगभग 25 हजार टीईयू डोमेस्टिक कंटेनरों का भार रहता है। पीथमपुर में विकसित हो रहा नया आईसीडी इंटरनेशनल और डोमेस्टिक दोनों तरह के कंटेनरों की सुविधा देगा। इंटरनेशनल कंटेनरों के लिए इसकी क्षमता करीब 2.5 लाख टीईयू रखी गई है, जबकि डोमेस्टिक कंटेनरों के लिए सालाना 20 से 25 हजार टीईयू की क्षमता विकसित की जाएगी। सरकार का फोकस देश के भीतर माल परिवहन में भी कंटेनर उपयोग बढ़ाने पर है, क्योंकि वर्तमान में बड़ी मात्रा में माल लूज कार्गो के रूप में भेजा जाता है। रेलवे की मालगाड़ियों के अनुकूल कंटेनर ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है।


