Mukhtar Ansari Property EX DGP Sulkhan Singh Statement: उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक Sulkhan Singh ने माफिया से नेता बने Mukhtar Ansari से जुड़े मामले में एक बड़ा खुलासा किया है। सुलखान सिंह ने दावा किया है कि मुख्तार अंसारी की दो कोठियों को कुछ अधिकारियों ने अपने नाम करा लिया है। उन्होंने कहा कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए तो इसमें शामिल लोगों के नाम सामने आ सकते हैं। पूर्व डीजीपी के इस बयान के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। उनका यह आरोप ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य में माफिया संपत्तियों पर कार्रवाई को लेकर पहले से ही चर्चा चल रही है।
गंभीर जांच की मांग
सुलखान सिंह ने कहा कि मुख्तार अंसारी के खिलाफ जब विभिन्न मामलों में कार्रवाई की जा रही थी, उसी दौरान उनकी कई संपत्तियों को लेकर भी जांच और कार्रवाई हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी प्रक्रिया के दौरान कुछ संपत्तियों को अधिकारियों ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए अपने नाम करवा लिया।
उन्होंने कहा कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो सच्चाई सामने आ सकती है। उनके अनुसार कई बार कार्रवाई के दौरान जब्त या विवादित संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी देखने को मिलती है, जिसका फायदा कुछ लोग उठा लेते हैं।
प्रशासनिक हलकों में चर्चा
पूर्व डीजीपी के इस बयान के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। कई लोग इस बयान को गंभीर मानते हुए इसकी जांच की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के आरोपों की पुष्टि होती है तो यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है। साथ ही यह भी स्पष्ट करेगा कि माफिया के खिलाफ की गई कार्रवाई के दौरान संपत्तियों का प्रबंधन किस तरह किया गया।
मुख्तार अंसारी की संपत्तियों पर पहले भी कार्रवाई
ज्ञात हो कि Uttar Pradesh में पिछले कुछ वर्षों के दौरान माफिया और अपराधियों की अवैध संपत्तियों के खिलाफ कई बड़ी कार्रवाई की गई है। मुख्तार अंसारी की संपत्तियों को लेकर भी प्रशासन द्वारा कई बार जांच और कार्रवाई की गई थी। सरकारी एजेंसियों ने उनके कई ठिकानों पर छापेमारी कर अवैध संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई की थी। इसी दौरान उनकी कई संपत्तियों को लेकर कानूनी प्रक्रिया भी शुरू हुई थी।
पारदर्शिता की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि जब भी किसी आरोपी या अपराधी की संपत्ति पर सरकारी कार्रवाई होती है, तो उसके प्रबंधन में पूरी पारदर्शिता होना बेहद जरूरी होता है। यदि इसमें किसी प्रकार की अनियमितता होती है तो यह कानून व्यवस्था और प्रशासन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर सकता है। पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह का बयान इसी संदर्भ में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनका कहना है कि सच्चाई सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है।
जांच के बाद ही साफ होगी स्थिति
फिलहाल इस मामले में किसी अधिकारी का नाम सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। सुलखान सिंह ने भी यह कहा है कि जांच होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अब देखना यह होगा कि उनके इस बयान के बाद संबंधित एजेंसियां इस मामले को किस तरह लेती हैं और क्या इस पूरे प्रकरण की आधिकारिक जांच कराई जाती है या नहीं। हालांकि इतना जरूर है कि पूर्व डीजीपी के इस बयान ने एक बार फिर माफिया संपत्तियों और उनके प्रबंधन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।


