बक्सर लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार में गेहूं खरीद लक्ष्य में भारी कटौती पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है। सांसद ने अपने पत्र में बताया कि केंद्र सरकार ने बिहार के लिए गेहूं खरीद लक्ष्य को पिछले वर्ष के लगभग 1,80,000 मीट्रिक टन से घटाकर इस वर्ष मात्र 18,000 मीट्रिक टन कर दिया है। यह लगभग 91 प्रतिशत की बड़ी गिरावट है, जिसे उन्होंने बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य के किसानों के साथ अन्यायपूर्ण बताया। 75 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन उन्होंने कहा कि बिहार में प्रति वर्ष करीब 70 से 75 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन होता है। खरीद लक्ष्य में इतनी बड़ी कटौती के कारण अधिकांश किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ नहीं मिल पाएगा। इससे किसान अपनी उपज को कम दामों पर बेचने को मजबूर होंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है। सुधाकर सिंह ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि राज्य में हर वर्ष लगभग 20 से 22 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवश्यकता होती है। ऐसे में यदि स्थानीय स्तर पर खरीद कम होती है, तो राज्य को अन्य राज्यों पर निर्भर रहना पड़ेगा। इससे न केवल परिवहन लागत बढ़ेगी, बल्कि वितरण प्रणाली में भी बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। खरीद लक्ष्य में की जाएगी बढ़ोतरी सांसद ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि बिहार के लिए गेहूं खरीद लक्ष्य को बढ़ाकर कम से कम 10 लाख मीट्रिक टन किया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने असमय वर्षा से प्रभावित गेहूं की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए खरीद मानकों में ढील देने की भी मांग की, ताकि अधिक से अधिक किसानों को राहत मिल सके। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया, जिससे खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सके। सांसद ने विश्वास व्यक्त किया कि इस मुद्दे पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा, जिससे किसानों को राहत मिलेगी और कृषि क्षेत्र में भरोसा कायम रहेगा। बक्सर लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार में गेहूं खरीद लक्ष्य में भारी कटौती पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है। सांसद ने अपने पत्र में बताया कि केंद्र सरकार ने बिहार के लिए गेहूं खरीद लक्ष्य को पिछले वर्ष के लगभग 1,80,000 मीट्रिक टन से घटाकर इस वर्ष मात्र 18,000 मीट्रिक टन कर दिया है। यह लगभग 91 प्रतिशत की बड़ी गिरावट है, जिसे उन्होंने बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य के किसानों के साथ अन्यायपूर्ण बताया। 75 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन उन्होंने कहा कि बिहार में प्रति वर्ष करीब 70 से 75 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन होता है। खरीद लक्ष्य में इतनी बड़ी कटौती के कारण अधिकांश किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ नहीं मिल पाएगा। इससे किसान अपनी उपज को कम दामों पर बेचने को मजबूर होंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है। सुधाकर सिंह ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि राज्य में हर वर्ष लगभग 20 से 22 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवश्यकता होती है। ऐसे में यदि स्थानीय स्तर पर खरीद कम होती है, तो राज्य को अन्य राज्यों पर निर्भर रहना पड़ेगा। इससे न केवल परिवहन लागत बढ़ेगी, बल्कि वितरण प्रणाली में भी बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। खरीद लक्ष्य में की जाएगी बढ़ोतरी सांसद ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि बिहार के लिए गेहूं खरीद लक्ष्य को बढ़ाकर कम से कम 10 लाख मीट्रिक टन किया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने असमय वर्षा से प्रभावित गेहूं की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए खरीद मानकों में ढील देने की भी मांग की, ताकि अधिक से अधिक किसानों को राहत मिल सके। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया, जिससे खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सके। सांसद ने विश्वास व्यक्त किया कि इस मुद्दे पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा, जिससे किसानों को राहत मिलेगी और कृषि क्षेत्र में भरोसा कायम रहेगा।


