GMCH की अव्यवस्था पर सांसद पप्पू यादव का अल्टीमेटम:बंद पड़ी लिफ्ट देख ठेकेदार पर भड़के, बोले- व्यवस्था नहीं सुधरी तो कार्रवाई तय है

GMCH की अव्यवस्था पर सांसद पप्पू यादव का अल्टीमेटम:बंद पड़ी लिफ्ट देख ठेकेदार पर भड़के, बोले- व्यवस्था नहीं सुधरी तो कार्रवाई तय है

पूर्णिया सांसद पप्पू यादव शनिवार देर रात अचानक GMCH के निरीक्षण पर पहुंच गए। इस दौरान अस्पताल की बदइंतजामी देख भड़क गए। मौके पर मौजूद अधिकारियों से तीखे सवाल किए और चेतावनी दी। ठेकेदार से बात कर कड़ी फटकार लगाई। अल्टीमेटम देते हुए कहा कि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी और आगे शिकायतें आईं तो फिर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षण के दौरान बंद पड़ी लिफ्ट पर भी सांसद की नजर पड़ी। उन्होंने तुरंत ठेकेदार से बात कर कड़ी फटकार लगाई और दो महीने के अंदर सभी वार्डों में फर्नीचर, बेड और लिफ्ट दुरुस्त करने का सख्त निर्देश दिया। सांसद ने साफ कहा कि समय पर काम नहीं हुआ तो कार्रवाई तय है। मरीज की शिकायत पर भड़के पप्पू यादव शिशु वार्ड की स्थिति को चिंताजनक बताते हुए कहा कि ठंड से बचने के लिए एक ही कमरे में झोपड़ी जैसी अस्थायी व्यवस्था बनाकर 300 से अधिक महिलाएं रहने को मजबूर थीं। मरीजों और उनके परिजनों ने बताया कि अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है। दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं, जांच निजी लैब में करानी मजबूरी बन गई हैं और खून की भी समुचित व्यवस्था नहीं है। इससे गरीब और ग्रामीण इलाकों से आए मरीजों पर आर्थिक और मानसिक बोझ लगातार बढ़ रहा है। निरीक्षण के दौरान अस्पताल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट भी सांसद के साथ मौजूद रहे। सांसद ने उन्हें स्पष्ट निर्देश दिया कि शिशु वार्ड से जुड़ी सभी समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान किया जाए। वे हर 15 दिन पर खुद निरीक्षण करेंगे और इस मुद्दे को लोकसभा में प्रमुखता से उठाएंगे। डीएम से समाधान निकालने की मांग सांसद ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम अंशुल कुमार से फोन पर बात की और तत्काल हस्तक्षेप कर समाधान निकालने को कहा। निरीक्षण के बाद उन्होंने कहा कि सरकार भले ही मुफ्त और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की बात करती हो, लेकिन GMCH की जमीनी हकीकत इन दावों को खोखला साबित करती है। शिशु वार्ड जैसी संवेदनशील जगह पर ऐसी अव्यवस्था न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता को दर्शाती है। व्यवस्था में सुधार पहली प्राथमिकता इस दौरान सांसद ने निजी क्लिनिक और प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों से भी मानवीय अपील की। उन्होंने कहा कि बार-बार 15 दिनों में फीस लेने के बजाय 3 महीने में एक बार फीस ली जाए, ताकि गरीब और आम मरीजों पर आर्थिक बोझ कम हो सके। सांसद पप्पू यादव ने भरोसा दिलाया कि जनता के स्वास्थ्य अधिकारों की रक्षा के लिए वे हर स्तर पर संघर्ष करते रहेंगे और GMCH की व्यवस्था में सुधार उनकी प्राथमिकता रहेगी। पूर्णिया सांसद पप्पू यादव शनिवार देर रात अचानक GMCH के निरीक्षण पर पहुंच गए। इस दौरान अस्पताल की बदइंतजामी देख भड़क गए। मौके पर मौजूद अधिकारियों से तीखे सवाल किए और चेतावनी दी। ठेकेदार से बात कर कड़ी फटकार लगाई। अल्टीमेटम देते हुए कहा कि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी और आगे शिकायतें आईं तो फिर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षण के दौरान बंद पड़ी लिफ्ट पर भी सांसद की नजर पड़ी। उन्होंने तुरंत ठेकेदार से बात कर कड़ी फटकार लगाई और दो महीने के अंदर सभी वार्डों में फर्नीचर, बेड और लिफ्ट दुरुस्त करने का सख्त निर्देश दिया। सांसद ने साफ कहा कि समय पर काम नहीं हुआ तो कार्रवाई तय है। मरीज की शिकायत पर भड़के पप्पू यादव शिशु वार्ड की स्थिति को चिंताजनक बताते हुए कहा कि ठंड से बचने के लिए एक ही कमरे में झोपड़ी जैसी अस्थायी व्यवस्था बनाकर 300 से अधिक महिलाएं रहने को मजबूर थीं। मरीजों और उनके परिजनों ने बताया कि अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है। दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं, जांच निजी लैब में करानी मजबूरी बन गई हैं और खून की भी समुचित व्यवस्था नहीं है। इससे गरीब और ग्रामीण इलाकों से आए मरीजों पर आर्थिक और मानसिक बोझ लगातार बढ़ रहा है। निरीक्षण के दौरान अस्पताल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट भी सांसद के साथ मौजूद रहे। सांसद ने उन्हें स्पष्ट निर्देश दिया कि शिशु वार्ड से जुड़ी सभी समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान किया जाए। वे हर 15 दिन पर खुद निरीक्षण करेंगे और इस मुद्दे को लोकसभा में प्रमुखता से उठाएंगे। डीएम से समाधान निकालने की मांग सांसद ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम अंशुल कुमार से फोन पर बात की और तत्काल हस्तक्षेप कर समाधान निकालने को कहा। निरीक्षण के बाद उन्होंने कहा कि सरकार भले ही मुफ्त और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की बात करती हो, लेकिन GMCH की जमीनी हकीकत इन दावों को खोखला साबित करती है। शिशु वार्ड जैसी संवेदनशील जगह पर ऐसी अव्यवस्था न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता को दर्शाती है। व्यवस्था में सुधार पहली प्राथमिकता इस दौरान सांसद ने निजी क्लिनिक और प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों से भी मानवीय अपील की। उन्होंने कहा कि बार-बार 15 दिनों में फीस लेने के बजाय 3 महीने में एक बार फीस ली जाए, ताकि गरीब और आम मरीजों पर आर्थिक बोझ कम हो सके। सांसद पप्पू यादव ने भरोसा दिलाया कि जनता के स्वास्थ्य अधिकारों की रक्षा के लिए वे हर स्तर पर संघर्ष करते रहेंगे और GMCH की व्यवस्था में सुधार उनकी प्राथमिकता रहेगी।  

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