Bhopal- विद्यार्थियों के लिए अब सात समंदर पार पढ़ाई के मायने बदल गए हैं। कभी हायर एजुकेशन के लिए पहली पसंद रहने वाला अमरीका और कनाडा अब लिस्ट में नीचे खिसक रहे हैं। बीते दो वर्षों में भोपाल के युवाओं ने विदेशी शिक्षा के लिए अपनी डेस्टिनेशन चॉइस में बड़ा बदलाव किया है। अब छात्र पारंपरिक विकल्पों को छोड़ जर्मनी, फ्रांस, आयरलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों का रुख कर रहे हैं। इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण बढ़ती फीस, सख्त वीजा नियम और वैश्विक स्तर पर उपजे युद्ध के हालात हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश से हर साल लगभग आठ से दस हजार विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाते हैं, जिनमें अकेले भोपाल Bhopal की हिस्सेदारी करीब दो हजार छात्रों की है। पूर्व में 40 प्रतिशत बच्चे केवल अमरीका और
कनाडा जाते थे।
विदेशी शिक्षा मामलों के एक्सपर्ट प्रेरणा सिंह राजपूत के अनुसार, वर्तमान में छात्रों और अभिभावकों के निर्णय में सुरक्षा सबसे बड़ा फैक्टर बनकर उभरा है। मिडल-ईस्ट में जारी संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध ने छात्रों को सुरक्षित विकल्प चुनने को मजबूर कर दिया है। अमरीका में वीजा की अनिश्चितता और बढ़ती फीस ने भी छात्रों का मोह भंग किया है। इसके विपरीत, यूरोप के देश न केवल सुरक्षित माने जा रहे हैं, बल्कि वहां की सरकारें अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए अनुकूल नीतियां भी बना रही हैं।
न्यूजीलैंड जैसे देश बने नए विकल्प
न्यूजीलैंड सरकार द्वारा वीजा नियमों में ढील देने के बाद भोपाल के आवेदन वहां तेजी से बढ़े हैं। फ्रांस, नीदरलैंड, पोलैंड, स्वीडन और डेनमार्क की स्टूडेंट पॉलिसी भोपाली युवाओं
को आकर्षित कर रही है। 2025 तक लगभग 7.6 लाख भारतीय छात्र विदेशों में पढ़ रहे थे, जिनमें एसटीईएम और
मैनेजमेंट कोर्सेज की मांग सबसे अधिक है। वहीं यूरोप के कई देशों में सालाना ट्यूशन फीस 1.80 लाख से 13.50 लाख तक है, जबकि रहने का खर्च 63 हजार से 1.10 लाख प्रतिमाह।
कौन सा देश है पसंदीदा
विदेशी शिक्षा मामलों के एक्सपर्ट मणि मिश्रा का कहना है, वीजा नियमों में बदलाव (विशेषकर ट्रंप नीति के प्रभाव) ने
अमरीका की लोकप्रियता को 70 फीसदी तक कम कर दिया है। अब विषयों के आधार पर देश चुने जा रहे हैं-
ऑस्ट्रेलिया: आइटी, नर्सिंग और अकाउंटिंग।
यूके: बिजनेस मैनेजमेंट, फाइनेंस, लॉ और मीडिया
स्टडीज।
जर्मनी: मैकेनिकल, ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग और
रोबोटिक्स।
न्यूजीलैंड: एग्रीकल्चर और हॉस्पिटैलिटी।


