‘डकैत: एक प्रेम कथा’ एक ऐसी फिल्म है जो शुरुआत में लव स्टोरी लगती है, लेकिन धीरे-धीरे इमोशनल और गहरी कहानी में बदल जाती है। डायरेक्टर शनेल देव ने इसमें रिश्तों, हालात और फैसलों के असर को दिखाने की कोशिश की है। फिल्म का ट्रीटमेंट थोड़ा अलग रखने की कोशिश की गई है, जहां कहानी सीधी न होकर परतों में आगे बढ़ती है। हालांकि, यह अंदाज हर दर्शक को पूरी तरह बांध पाए, ऐसा जरूरी नहीं। फिल्म की कहानी
कहानी हरि, यानी अदिवि शेष और सरस्वती उर्फ जूलियट, यानी मृणाल ठाकुर के रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमती है। यह एक ऐसा रिश्ता है, जो प्यार से शुरू होकर धोखे और हालातों में टूट जाता है। दोनों अलग-अलग बैकग्राउंड से आते हैं और एक-दूसरे से प्यार करते हैं। लेकिन यही रिश्ता उनके लिए परेशानी बन जाता है। एक झूठ और हालातों के दबाव में सरस्वती की गवाही, हरि को जेल पहुंचा देती है। सालों जेल में रहने के बाद हरि बाहर निकलता है। अब उसका मकसद सिर्फ आजादी नहीं है, बल्कि अपने अतीत से हिसाब बराबर करना भी है। इसके लिए वह देश छोड़कर भागने की योजना बनाता है, और उसे पैसों की जरूरत होती है। इसी बीच हरि की मुलाकात फिर से सरस्वती से होती है। अब वह एक अलग जिंदगी जी रही है और खुद भी बड़ी मजबूरी में फंसी हुई है। हालात ऐसे बनते हैं कि दोनों को साथ आना पड़ता है। वे मिलकर एक बड़ा और जोखिम भरा कदम उठाने का फैसला करते हैं। यहीं से कहानी नया मोड़ लेती है। प्यार, बदला और मजबूरी तीनों एक साथ टकराते हैं। फिल्म इसी टकराव के जरिए दिखाती है कि वक्त और हालात कैसे रिश्तों को बदल देते हैं। और कैसे कुछ फैसले पूरी जिंदगी की दिशा बदल देते हैं। फिल्म में एक्टिंग फिल्म में अदिवि शेष हर सीन में पूरी तरह नजर आते हैं। उन्होंने अपने किरदार को अलग बनाने की कोशिश की है। हालांकि, कुछ जगहों पर उनका प्रदर्शन थोड़ा उतार-चढ़ाव वाला लगता है। मृणाल ठाकुर फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी हैं। उन्होंने अपने किरदार की भावनाओं को अच्छे तरीके से निभाया है और कई सीन में असर छोड़ती हैं। सपोर्टिंग कास्ट में अनुराग कश्यप, प्रकाश राज और अतुल कुलकर्णी जैसे कलाकार हैं। लेकिन उन्हें ज्यादा स्क्रीन टाइम या गहराई नहीं मिल पाती। फिल्म का डायरेक्शन, स्टोरी और टेक्निकल पहलू फिल्म का डायरेक्शन शनेल देव ने किया है। उन्होंने कहानी को परतों में दिखाने की कोशिश की है। फिल्म का पहला हिस्सा थोड़ा धीमा लगता है। वहीं दूसरा हिस्सा कहानी को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाता है। स्क्रीनप्ले में उतार-चढ़ाव है। इसकी वजह से कुछ जगह फिल्म की पकड़ कमजोर पड़ती है। सिनेमैटोग्राफी अच्छी है और विजुअल ट्रीटमेंट काफी प्रभावित करता है। बैकग्राउंड म्यूजिक भी कई सीन में फिल्म को सपोर्ट करता है। हालांकि, कुछ सीन और एक्शन सीक्वेंस उतने असरदार नहीं बन पाते। इसी वजह से फिल्म पूरी तरह से अपना असर नहीं छोड़ पाती। फिल्म का म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर
फिल्म के गाने औसत हैं और ज्यादा देर तक याद नहीं रहते। बैकग्राउंड स्कोर जरूर फिल्म की मजबूती है, जो कई सीन को बेहतर बनाता है। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट
डकैत: एक प्रेम कथा एक ऐसी फिल्म है जो एक अलग अंदाज में रिश्तों और हालातों की कहानी कहने की कोशिश करती है। इसमें अच्छे कलाकार और कुछ प्रभावशाली पल हैं, लेकिन कमजोर पकड़ इसे और बेहतर बनने से रोकती है। कुल मिलाकर, यह एक शांत और साधारण फिल्म है जिसे आप एक बार देख सकते हैं।
मूवी रिव्यू – ‘डकैत एक प्रेम कथा’:प्यार से बदले तक पहुंचने की कहानी है, मृणाल ठाकुर की दमदार एक्टिंग, जानिए कैसी है फिल्म


