मोतिहारी शराबकांड: गांवों तक ऐसे पहुंचती थी शराब की खेप, हर महीने होता था 10 लाख का कारोबार

मोतिहारी शराबकांड: गांवों तक ऐसे पहुंचती थी शराब की खेप, हर महीने होता था 10 लाख का कारोबार

बिहार के मोतिहारी में जहरीली शराब पीने से अब तक आठ लोगों की मौत हो चुकी है। जांच कर रही टीम ने शराब के अवैध धंधे के पूरे नेटवर्क को उजागर कर दिया है। 

बिहार के मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) में जहरीली शराब से अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है। 8 लोगों की मौत के बाद सरकार शरबबंदी वाले बिहार में शराब के कारोबार के कारणों का पता कर रही है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस जांच में जो साक्ष्य मिले हैं, वे काफी चौकाने वाले हैं। इस मौत के बाद हरसिद्धि विधानसभा के तुरकौलिया इलाके में हाहाकार मच गया है। परिजनों ने अपनी व्यक्तिगत त्रासदी के बावजूद बताया कि कैसे शराबबंदी के बावजूद यह जहरीली शराब गांवों तक पहुंच गई। पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने पूरे सप्लाई नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ते हुए मामले की गहनता से पड़ताल शुरू कर दी है।

पुलिस और तस्करों के रिश्ते पर सवाल

मोतीहारी जहरीली शराब कांड की जांच कर रही टीम के अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि यह खूनी खेल मोतीहारी के पिपराकोठी इलाके से शुरू हुआ। पुलिस की मदद से शराब तस्कर कन्हैया और राजा ने स्प्रिट मंगवाई थी। सूत्रों के अनुसार, ये दोनों जिला के बड़े स्प्रिट तस्कर हैं और यह पहली बार नहीं था कि उन्होंने स्प्रिट मंगवाई हो। इससे पहले भी वे नियमित रूप से यह व्यापार करते रहे हैं। कहा जाता है कि हर खेप के बदले वे पुलिस अधिकारियों को लगभग एक लाख रुपये देते थे।

गांववालों का दावा है कि दोनों शराब कारोबारियों का पुलिस के साथ काफी अच्छे संबंध रहे हैं। इसी भरोसे पर वे अक्सर स्प्रिट मंगवाते थे। लेकिन इस बार जो सप्लाई आई, वह मेथनॉल (जहरीले केमिकल) वाली स्प्रिट थी, जिसके सेवन से अब तक आठ लोगों की मौत हो चुकी है।

सप्लाई नेटवर्क का खुलासा

पुलिस की जांच और स्थानीय लोगों के मुताबिक, ‘मौत का सामान’ यानी जहरीली शराब को कन्हैया और राजा खुद गांव-गांव नहीं बेचते थे। इसके लिए उनके पास एजेंटों का चेन था। सूत्रों के अनुसार, पिपराकोठी से स्प्रिट सबसे पहले खलीफा और सुनील शाह के पास जाती थी। इसके बाद यह खेप नागा राय और जम्मू बैठा तक पहुंचाई जाती थी। बताया गया है कि नागा राय ने परसौना इलाके की जिम्मेदारी संभाली, जबकि जम्मू बैठा क्षेत्र में इसे घर-घर सप्लाई करता था।

पुलिस के संरक्षण में चला अवैध नेटवर्क

स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षेत्र में चल रहे इस शराब नेटवर्क को पुलिस का सुरक्षा कवच प्राप्त था। परसौना के चौकीदार भरत राय पुलिस का एजेंट बनकर इस पूरे नेटवर्क को संचालित करता था। स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्य आरोपी नागा राय और चौकीदार भरत राय आपस में रिश्तेदार हैं। उनके संरक्षण में ही शराब बिना किसी रोक-टोक के गांव की गलियों में बेची जाती थी।

सूत्रों के मुताबिक, इस अवैध कारोबार को संरक्षण देने के लिए शराब तस्कर हर महीने लगभग 10 लाख रुपये पुलिस को दिया करते थे। मामले के सामने आने के बाद चौकीदार को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और थानेदार को निलंबित कर दिया गया है।

कन्हैया राय के घर से 17 गैलन जहरीली शराब बरामद

इधर, उत्पाद विभाग की टीम ने मोतिहारी जहरीली शराब कांड के बाद शनिवार देर रात बड़ी कार्रवाई करते हुए पिपराकोठी के सलेमपुर में छापेमारी की। टीम ने कुख्यात तस्कर कन्हैया राय के घर के पीछे से 17 गैलन जहरीली शराब बरामद की। कन्हैया राय इस पूरे जहरीली शराब नेटवर्क का मुख्य सरगना है।

  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *