‘दोनों युवक को कंबोडिया के होटल में काम दिलाने का झांसा दिया गया था। लेकिन वहां पहुंचते ही एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह ने उन्हें अपने कब्जे में ले लिया और जबरन साइबर ठगी के धंधे में काम करने के लिए दबाव बनाने लगा। मना करने पर उनका पासपोर्ट ले लिया गया। फिर उन्हें जेल भेज दिया गया। दो सप्ताह के अंदर अगर बेटे को मोदी सरकार देश लेकर नहीं लाई, तो हमारा पूरा परिवार दिल्ली में जान दे देगा।’ ये कहना मनीष की मां राम कुमारी देवी का है। दरअसल, भोजपुर के दो युवा हजारों किलोमीटर दूर कंबोडिया की धरती पर फंसे हुए हैं। अमरजीत और मनीष एक एजेंट के जरिए काम के लिए 28 जनवरी को कंबोडिया गए थे। मां का कहना है कि हमारे बेटों को कंबोडिया में जेल भेज दिया गया है। परिवार वाले बताते हैं कि कई लोगों के पास गए, हर संभव कोशिश की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। परिजनों ने अब सीधे भारत सरकार से गुहार लगाई है। उनका कहना है कि अगर अगले दो सप्ताह के अंदर उनके बेटे सुरक्षित वतन नहीं लौटे, तो वे खुद दिल्ली जाकर अपनी जान दे देंगे। पासपोर्ट छीन कर भिजवाया जेल जगदीशपुर प्रखंड के अरैला गांव निवासी हृदयानंद राम के बेटे अमरजीत कुमार (25) और पीरो प्रखंड के अगिआंव बाजार थाना क्षेत्र के बड़की खननी कला गांव निवासी रविंद्र राम के बेटे मनीष कुमार (28) को नामपेन्ह के कंबोडिया शहर भेजा गया था। युवकों ने जब अवैध काम को करने से इनकार किया, तो उनके पासपोर्ट और सभी कागजात छीन लिए गए। इतना ही नहीं, स्थानीय एजेंट की मिलीभगत से उन्हें झूठे आरोपों में जेल तक भिजवा दिया गया है। मनीष की मां राम कुमारी देवी ने मोदी सरकार से हाथ जोड़कर गुजारिश की है। उन्होंने कहा है कि हमारे बच्चे कंबोडिया में फंसे हुए हैं। जितना जल्दी हो उतना जल्दी हमारे बच्चों को गांव वापस लाने में मदद करें। अगर वो लोग नहीं आ पाएंगे तो बच्चे मर जाएंगे। उन्हें ना पानी दिया जा रहा है ना ही खाना दिया जा रहा है। बार-बार पैसे के लिए टॉर्चर किया जा रहा मां ने आरोप लगाया है कि कंबोडिया के जेलर की ओर से 20–20 हजार रुपए की डिमांड की जा रही है। दोनों के पैसा नहीं देने पर खाना-पीना नहीं देने की धमकी दी जा रही है। उसके बाद पांच लाख रुपए की डिमांड की जा रही है। हम लोग गरीब हैं, कहां से इतना पैसा लाएंगे। मोदी सरकार से हम हाथ जोड़ी बा कि जितना जल्दी होके उतना जल्दी हमनी के लइका के बोला दीही। दिल्ली नहीं तो हमलोग किसी तरह कंबोडिया पहुंचकर अपनी जान देंगे। क्योंकि जेलर की ओर से बराबर टॉर्चर किया जा रहा है बच्चों से बर्दाश्त नहीं हो रहा है। बच्चों के बारे में सोच सोचकर डर समाया हुआ है। मुंबई के रहने वाले संतोष ने फेसबुक पर अपना नंबर दिया था। कहा था कि एक अच्छा काम दिलवा देंगे, जिसमें खूब पैसा मिलेगा। मेरा बेटा विश्वास कर उसके साथ चला गया। बेटा एजेंट के बहकावे में आ गया मैंने कहा था कि बेटा फोन पर विश्वास नहीं करो। लेकिन बेटा एजेंट के बहकावे में आ गया था। एजेंट संतोष ने मुझसे भी बात किया था। कहा कि माई आप मत डरिये, कुछ नहीं होगा। मनीष हमारा भाई जैसा है। मनीष, अमरजीत के साथ चार लोग कंबोडिया गए थे। मेरे बेटे से ढाई लाख रुपए लिया था। जब मेरे बेटे से बात नहीं हुआ था मेरी बहू ने एजेंट को फोन किया। उसने बेटे से बात नहीं कराया। उसके बाद लगातार पैसे की डिमांड की जाने लगी। भारत सरकार से हाथ जोड़कर विनती करते हैं कि वो हमारे बेटे को वापस गांव लाने में मदद करें। दुधमुंहे बेटे को लेकर करूंगी भूख हड़ताल अमरजीत की पत्नी पिंकी देवी ने कहा कि सरकार हमारी कोई मदद नहीं कर रही है। पति की रिहाई के लिए मुखिया से लेकर सांसद तक लेटर दिया गया है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। अगर दो सप्ताह में मेरे पति नहीं आते हैं, तो फिर अपने दुधमुंहे बेटे को लेकर दिल्ली पहुंचकर भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे। तब-तक खाना नहीं खाएंगे जब तक मेरे पति मेरे पास वापस नहीं आते हैं। इसके लिए हमारी जान क्यों नहीं चली जाए। क्योंकि हमारे पति के भरोसे पूरा परिवार है। अगर मुझे कुछ होता है तो सारा जिम्मेदारी सरकार की होगी।
पहले जन्मदिन पर खिलौना लाने का था वादा, घर में नहीं जल रहा चूल्हा अरैला गांव के रहने वाले अमरजीत अपने एक भाई सूरज से बड़ा हैं। शादी 2023 में पिंकी देवी से हुई थी। अभी एक साल का बेटा अय्यांश है। 22 मार्च को उसका पहला जन्मदिन था, लेकिन अंर्तराष्ट्रीय गिरोह के चंगुल में फंसने के बाद अमरजीत के घर में खुशी के दिन मातम पसरा रहा। पिता ने बेटे के जन्मदिन पर खिलौना लाने का वादा किया था। लेकिन, घर में चूल्हा भी नहीं जला। बेटे के जन्मदिन पर विदेश से अच्छे-अच्छे खिलौने लाने का वादा किया था। आज पिता के आने के इंतजार में टकटकी लगाए हुए हैं। बेटे ने कहा था- कमाने जा रहा हूं अमरजीत की मां प्रभावती देवी ने भास्कर से बात करते हुए बताया कि मेरे बेटे ने कहा कि माई हम विदेश कमाने जा रहे हैं। आप लोग टेंशन में नहीं रहिएगा, बबुआ का ख्याल रखिएगा। मैं कमाकर सब कुछ अच्छा कर दूंगा। इसके बाद 28 जनवरी को अपने एक रिश्तेदार मनीष कुमार के साथ कंबोडिया के लिए निकल गया। 29 जनवरी को कोलकता से फ्लाइट के जरिए कंबोडिया पहुंचकर फोन पर जानकारी भी दी थी। मुंबई के रहने वाला संजय चौपगार उर्फ लक्की ने होटल में काम और फूड पैकिंग में काम दिलाने के झांसा देकर उसे ले गया। उसने कहा कि 800 डॉलर प्रति महीने मिलेगा। यही सब बात सुनकर मेरा बेटा गया था कि उसके घर का माली स्थिति ठीक हो जाएगी। 19 फरवरी को फोन पर बात हुई थी। कहा कि यहां कुछ ठीक नहीं है। मैं 21 फरवरी को वापस आ जाऊंगा, लेकिन उसके ठेकेदार ने मारपीट करते हुए सभी कागजातों को छीन लिया। उसके बाद उसे फंसाकर जेल भेजवा दिया। हमलोग गरीब आदमी है, कहां से इतना पैसा लेकर आएंगे। घर में ठीक से खाना तक नहीं बन रहा है। अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए अमरजीत और मनीष की पूरी कहानी दरअसल, मुंबई के एक एजेंट ने अमरजीत और मनीष को होटल में जॉब का झांसा देकर कंबोडिया के नामपेन्ह शहर में भेजा था। लेकिन 29 जनवरी को कंबोडिया पहुंचते ही एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह ने अमरजीत और मनीष को अपने कब्जे में ले लिया। दोनों पर साइबर ठगी करने का दबाव बनाया जाने लगा। अमरजीत और मनीष ने जब इसका विरोध किया तो जालसाजों के गिरोह ने दोनों का पासपोर्ट और अन्य कागजात जब्त कर लिया। मुंबई के एजेंट की मिलीभगत से दोनों को झूठे आरोप में जेल भिजवा दिया। हालांंकि, जेल भेजे जाने से पहले अमरजीत और मनीष ने अपने-अपने घर कॉल कर पूरी बात बताई थी। दोनों ने बताया था कि हम लोगों को यहां जानवरों की तरह रखा जा रहा है, खाना नहीं दिया जा रहा है और साइबर ठगी से इनकार करने पर मारपीट की जाती है। अमरजीत और मनीष ने परिजन से अपनी जान बचाने की गुहार लगाई। दोनों युवकों के परिजन के मुताबिक, हाल ही में अमरजीत और मनीष का कॉल आया था। दोनों ने बताया था कि हम लोग घर लौट रहे हैं, लेकिन इसके बाद जालसाजों ने उन्हें जेल भिजवा दिया। अब जालसाजों की ओर से अमरजीत और मनीष के परिजन को लगातार कॉल आ रहे हैं। जालसाजों की ओर से अमरजीत और मनीष की रिहाई के लिए 5 से 6 लाख रुपए मांगे जा रहे हैं। सांसद ने विदेश मंत्रालय में भेजा लेटर इधर,आरा के सांसद सुदामा प्रसाद ने विदेश मंत्रालय को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। सांसद ने इसे आपात स्थिति बताते हुए भारत सरकार से कंबोडिया की सरकार के साथ राजनीतिक स्तर पर बात कर युवकों को सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। ‘दोनों युवक को कंबोडिया के होटल में काम दिलाने का झांसा दिया गया था। लेकिन वहां पहुंचते ही एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह ने उन्हें अपने कब्जे में ले लिया और जबरन साइबर ठगी के धंधे में काम करने के लिए दबाव बनाने लगा। मना करने पर उनका पासपोर्ट ले लिया गया। फिर उन्हें जेल भेज दिया गया। दो सप्ताह के अंदर अगर बेटे को मोदी सरकार देश लेकर नहीं लाई, तो हमारा पूरा परिवार दिल्ली में जान दे देगा।’ ये कहना मनीष की मां राम कुमारी देवी का है। दरअसल, भोजपुर के दो युवा हजारों किलोमीटर दूर कंबोडिया की धरती पर फंसे हुए हैं। अमरजीत और मनीष एक एजेंट के जरिए काम के लिए 28 जनवरी को कंबोडिया गए थे। मां का कहना है कि हमारे बेटों को कंबोडिया में जेल भेज दिया गया है। परिवार वाले बताते हैं कि कई लोगों के पास गए, हर संभव कोशिश की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। परिजनों ने अब सीधे भारत सरकार से गुहार लगाई है। उनका कहना है कि अगर अगले दो सप्ताह के अंदर उनके बेटे सुरक्षित वतन नहीं लौटे, तो वे खुद दिल्ली जाकर अपनी जान दे देंगे। पासपोर्ट छीन कर भिजवाया जेल जगदीशपुर प्रखंड के अरैला गांव निवासी हृदयानंद राम के बेटे अमरजीत कुमार (25) और पीरो प्रखंड के अगिआंव बाजार थाना क्षेत्र के बड़की खननी कला गांव निवासी रविंद्र राम के बेटे मनीष कुमार (28) को नामपेन्ह के कंबोडिया शहर भेजा गया था। युवकों ने जब अवैध काम को करने से इनकार किया, तो उनके पासपोर्ट और सभी कागजात छीन लिए गए। इतना ही नहीं, स्थानीय एजेंट की मिलीभगत से उन्हें झूठे आरोपों में जेल तक भिजवा दिया गया है। मनीष की मां राम कुमारी देवी ने मोदी सरकार से हाथ जोड़कर गुजारिश की है। उन्होंने कहा है कि हमारे बच्चे कंबोडिया में फंसे हुए हैं। जितना जल्दी हो उतना जल्दी हमारे बच्चों को गांव वापस लाने में मदद करें। अगर वो लोग नहीं आ पाएंगे तो बच्चे मर जाएंगे। उन्हें ना पानी दिया जा रहा है ना ही खाना दिया जा रहा है। बार-बार पैसे के लिए टॉर्चर किया जा रहा मां ने आरोप लगाया है कि कंबोडिया के जेलर की ओर से 20–20 हजार रुपए की डिमांड की जा रही है। दोनों के पैसा नहीं देने पर खाना-पीना नहीं देने की धमकी दी जा रही है। उसके बाद पांच लाख रुपए की डिमांड की जा रही है। हम लोग गरीब हैं, कहां से इतना पैसा लाएंगे। मोदी सरकार से हम हाथ जोड़ी बा कि जितना जल्दी होके उतना जल्दी हमनी के लइका के बोला दीही। दिल्ली नहीं तो हमलोग किसी तरह कंबोडिया पहुंचकर अपनी जान देंगे। क्योंकि जेलर की ओर से बराबर टॉर्चर किया जा रहा है बच्चों से बर्दाश्त नहीं हो रहा है। बच्चों के बारे में सोच सोचकर डर समाया हुआ है। मुंबई के रहने वाले संतोष ने फेसबुक पर अपना नंबर दिया था। कहा था कि एक अच्छा काम दिलवा देंगे, जिसमें खूब पैसा मिलेगा। मेरा बेटा विश्वास कर उसके साथ चला गया। बेटा एजेंट के बहकावे में आ गया मैंने कहा था कि बेटा फोन पर विश्वास नहीं करो। लेकिन बेटा एजेंट के बहकावे में आ गया था। एजेंट संतोष ने मुझसे भी बात किया था। कहा कि माई आप मत डरिये, कुछ नहीं होगा। मनीष हमारा भाई जैसा है। मनीष, अमरजीत के साथ चार लोग कंबोडिया गए थे। मेरे बेटे से ढाई लाख रुपए लिया था। जब मेरे बेटे से बात नहीं हुआ था मेरी बहू ने एजेंट को फोन किया। उसने बेटे से बात नहीं कराया। उसके बाद लगातार पैसे की डिमांड की जाने लगी। भारत सरकार से हाथ जोड़कर विनती करते हैं कि वो हमारे बेटे को वापस गांव लाने में मदद करें। दुधमुंहे बेटे को लेकर करूंगी भूख हड़ताल अमरजीत की पत्नी पिंकी देवी ने कहा कि सरकार हमारी कोई मदद नहीं कर रही है। पति की रिहाई के लिए मुखिया से लेकर सांसद तक लेटर दिया गया है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। अगर दो सप्ताह में मेरे पति नहीं आते हैं, तो फिर अपने दुधमुंहे बेटे को लेकर दिल्ली पहुंचकर भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे। तब-तक खाना नहीं खाएंगे जब तक मेरे पति मेरे पास वापस नहीं आते हैं। इसके लिए हमारी जान क्यों नहीं चली जाए। क्योंकि हमारे पति के भरोसे पूरा परिवार है। अगर मुझे कुछ होता है तो सारा जिम्मेदारी सरकार की होगी।
पहले जन्मदिन पर खिलौना लाने का था वादा, घर में नहीं जल रहा चूल्हा अरैला गांव के रहने वाले अमरजीत अपने एक भाई सूरज से बड़ा हैं। शादी 2023 में पिंकी देवी से हुई थी। अभी एक साल का बेटा अय्यांश है। 22 मार्च को उसका पहला जन्मदिन था, लेकिन अंर्तराष्ट्रीय गिरोह के चंगुल में फंसने के बाद अमरजीत के घर में खुशी के दिन मातम पसरा रहा। पिता ने बेटे के जन्मदिन पर खिलौना लाने का वादा किया था। लेकिन, घर में चूल्हा भी नहीं जला। बेटे के जन्मदिन पर विदेश से अच्छे-अच्छे खिलौने लाने का वादा किया था। आज पिता के आने के इंतजार में टकटकी लगाए हुए हैं। बेटे ने कहा था- कमाने जा रहा हूं अमरजीत की मां प्रभावती देवी ने भास्कर से बात करते हुए बताया कि मेरे बेटे ने कहा कि माई हम विदेश कमाने जा रहे हैं। आप लोग टेंशन में नहीं रहिएगा, बबुआ का ख्याल रखिएगा। मैं कमाकर सब कुछ अच्छा कर दूंगा। इसके बाद 28 जनवरी को अपने एक रिश्तेदार मनीष कुमार के साथ कंबोडिया के लिए निकल गया। 29 जनवरी को कोलकता से फ्लाइट के जरिए कंबोडिया पहुंचकर फोन पर जानकारी भी दी थी। मुंबई के रहने वाला संजय चौपगार उर्फ लक्की ने होटल में काम और फूड पैकिंग में काम दिलाने के झांसा देकर उसे ले गया। उसने कहा कि 800 डॉलर प्रति महीने मिलेगा। यही सब बात सुनकर मेरा बेटा गया था कि उसके घर का माली स्थिति ठीक हो जाएगी। 19 फरवरी को फोन पर बात हुई थी। कहा कि यहां कुछ ठीक नहीं है। मैं 21 फरवरी को वापस आ जाऊंगा, लेकिन उसके ठेकेदार ने मारपीट करते हुए सभी कागजातों को छीन लिया। उसके बाद उसे फंसाकर जेल भेजवा दिया। हमलोग गरीब आदमी है, कहां से इतना पैसा लेकर आएंगे। घर में ठीक से खाना तक नहीं बन रहा है। अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए अमरजीत और मनीष की पूरी कहानी दरअसल, मुंबई के एक एजेंट ने अमरजीत और मनीष को होटल में जॉब का झांसा देकर कंबोडिया के नामपेन्ह शहर में भेजा था। लेकिन 29 जनवरी को कंबोडिया पहुंचते ही एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह ने अमरजीत और मनीष को अपने कब्जे में ले लिया। दोनों पर साइबर ठगी करने का दबाव बनाया जाने लगा। अमरजीत और मनीष ने जब इसका विरोध किया तो जालसाजों के गिरोह ने दोनों का पासपोर्ट और अन्य कागजात जब्त कर लिया। मुंबई के एजेंट की मिलीभगत से दोनों को झूठे आरोप में जेल भिजवा दिया। हालांंकि, जेल भेजे जाने से पहले अमरजीत और मनीष ने अपने-अपने घर कॉल कर पूरी बात बताई थी। दोनों ने बताया था कि हम लोगों को यहां जानवरों की तरह रखा जा रहा है, खाना नहीं दिया जा रहा है और साइबर ठगी से इनकार करने पर मारपीट की जाती है। अमरजीत और मनीष ने परिजन से अपनी जान बचाने की गुहार लगाई। दोनों युवकों के परिजन के मुताबिक, हाल ही में अमरजीत और मनीष का कॉल आया था। दोनों ने बताया था कि हम लोग घर लौट रहे हैं, लेकिन इसके बाद जालसाजों ने उन्हें जेल भिजवा दिया। अब जालसाजों की ओर से अमरजीत और मनीष के परिजन को लगातार कॉल आ रहे हैं। जालसाजों की ओर से अमरजीत और मनीष की रिहाई के लिए 5 से 6 लाख रुपए मांगे जा रहे हैं। सांसद ने विदेश मंत्रालय में भेजा लेटर इधर,आरा के सांसद सुदामा प्रसाद ने विदेश मंत्रालय को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। सांसद ने इसे आपात स्थिति बताते हुए भारत सरकार से कंबोडिया की सरकार के साथ राजनीतिक स्तर पर बात कर युवकों को सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।


