विदेश से MBBS की डिग्री लेकर फर्जी रजिस्ट्रेशन से राजस्थान में प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों की SOG ने सबसे बड़ी जांच शुरू कर दी है। दैनिक भास्कर को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, इस समय प्रदेश के 8 हजार से ज्यादा डॉक्टर एसओजी के रडार पर हैं। इस फर्जीवाड़े में शामिल और डॉक्टरों को परमिशन देने वाली संस्था राजस्थान मेडिकल काउंसिल के कई अफसर शक के दायरे में हैं। करीब एक माह पहले SOG ने तीन डॉक्टरों को पकड़ा था। तीनों विदेश से मेडिकल डिग्री लेकर आए थे और फर्जी मेडिकल रजिस्ट्रेशन करा सरकारी हॉस्पिटल्स में प्रैक्टिस कर रहे थे। इनसे पूछताछ में SOG को बड़े स्तर पर नेक्सस का पता चला है। इसके बाद एसओजी डॉक्टरों का रिकॉर्ड खंगाल रही है। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए कैसे विदेशों से डिग्रियां हासिल कर यह फर्जीवाड़ा किया जा रहा है…. सबसे पहले जानते हैं, कैसे खुला फर्जी FMGE डॉक्टरों का मामला?
4 दिसंबर को एसओजी ने फर्जी प्रमाण से सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप करने वाले 3 डॉक्टरों डॉ. पियूष कुमार त्रिवेदी, डॉ. देवेंद्र गुर्जर और डॉ. शुभम गुर्जर को गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि तीनों ने विदेश से मेडिकल की पढ़ाई तो की, लेकिन भारत में अनिवार्य Foreign Medical Graduate Examination (FMGE) में फेल हो गए थे। इसके बाद 16-16 लाख रुपए देकर फर्जी एफएमजीई प्रमाण पत्र हासिल किए। इसके आधार पर नेशनल मेडिकल काउंसिल से इंटर्नशिप की अनुमति ली गई। इसके बाद डॉ. पियूष ने करौली के राजकीय मेडिकल कॉलेज, शुभम गुर्जर ने राजीव गांधी अस्पताल अलवर और देवेंद्र गुर्जर ने राजकीय मेडिकल कॉलेज दौसा में इंटर्नशिप पूरी की। SOG को मिली शिकायतें, 8000 डॉक्टर शक के दायरे में तीन गिरफ्तारियों के बाद एसओजी को अलग-अलग शिकायतों में बड़ी संख्या में संदिग्ध नाम मिले। एसओजी को मिली शिकायतों में ऐसे डॉक्टरों के नाम सामने आए हैं जिन्होंने किर्गिस्तान, जॉर्जिया, चीन और बांग्लादेश जैसे देशों से एमबीबीएस की डिग्री ली। बताया जा रहा है कि इनमें से कई डॉक्टर या तो घर पर निजी स्तर पर प्रैक्टिस कर रहे हैं या फिर बड़े प्राइवेट और सरकारी हॉस्पिटलों से जुड़े हुए हैं। ऐसे में एसओजी ने विदेश से डिग्री करने के बाद FMGE एंट्रेंस का सर्टिफिकेट हासिल करने वाले, इंटर्नशिप और प्रैक्टिस करने वाले करीब 8000 डॉक्टरों का डेटा मंगवाया है। डॉक्टर्स के डाक्यूमेंट्स, रजिस्ट्रेशन और FMGE प्रमाण पत्रों का क्रॉस-वेरिफिकेशन का काम तेजी से चल रहा है। FMGE वैधता की जांच, NBE और विदेशी यूनिवर्सिटी से संपर्क एसओजी ने विदेश से एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों के एफएमजीई सर्टिफिकेट की जांच के लिए दिल्ली स्थित नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBE) को पत्र लिखा है। इसके जरिए संबंधित अभ्यर्थियों का पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है। इतना ही नहीं, जॉर्जिया की मेडिकल यूनिवर्सिटी से भी संपर्क किया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एमबीबीएस की डिग्री भी कहीं फर्जी तो नहीं है। मेडिकल काउंसिल के अधिकारी भी रडार पर प्रदेश में कहीं भी प्रैक्टिस के लिए डॉक्टरों को राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMS) में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होता है। अगर किसी मेडिकल स्टूडेंट ने विदेश से डिग्री ली है तो उसके पास एफएमजीई एग्जाम पास करने का सर्टिफिकेट होने चाहिए। उस सर्टिफिकेट की वैद्यता जांचने के बाद राजस्थान मेडिकल काउंसिल इंटर्नशिप की परमिशन जारी करती है। SOG की जांच में सामने आया है कि एफएमजीई के फर्जी सर्टिफिकेट को ही अप्रूवल दिया गया था। यह बिना मिलीभगत के संभव नहीं है, क्योंकि पंजीयन प्रक्रिया के दौरान कई स्तर पर डॉक्यूमेंट का वेरिफिकेशन होता है। राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन की प्रक्रिया क्या है? राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMS) डॉक्टरों के अस्थाई, स्थाई और अतिरिक्त योग्यता से जुड़े रजिस्ट्रेशन करती है। पूरी प्रोसेस ऑनलाइन होती है। लेकिन फिजिकल वेरिफिकेशन भी अनिवार्य होता है। बहू-स्तरीय प्रक्रिया के बावजूद फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन होना कई सवाल खड़े करता है। एसओजी अब यह जांच कर रही है कि पंजीयन के प्रत्येक चरण में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका क्या रही और किन परिस्थितियों में नियमों को नजरअंदाज किया गया। SOG के एडीजी बोले- फर्जी डॉक्यूमेंट पर कैसे दी गई परमिशन? एसओजी की टीम राजस्थान मेडिकल काउंसिल से डेटा जुटा रही है। दिल्ली की उन एजेंसियों से भी संपर्क किया है, जो एफएमजीई जैसी परीक्षाएं कंडक्ट करती हैं। SOG के एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि फर्जी सर्टिफिकेट बनाना कोई बड़ी बात नहीं है, असली और गंभीर सवाल यह है कि ये सर्टिफिकेट बना कौन रहा था और इन्हें अथॉरिटी से अप्रूव कैसे करवाया जा रहा था? उन्होंने बताया- हम यह जांच कर रहे हैं कि फर्जी दस्तावेज किस तरह असली दस्तावेजों की तरह सिस्टम में स्वीकार किए गए? इतने लंबे समय तक किसी को इसकी भनक कैसे नहीं लगी? इसमें किस स्तर पर लापरवाही हुई या कहीं किसी की मिलीभगत तो नहीं रही, इसकी गहराई से जांच की जा रही है। राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. गिरधर गोयल से बातचीत सवाल: हाल ही में एसओजी ने तीन डॉक्टरों को पकड़ा था, जो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इंटर्नशिप कर रहे थे। उनका राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कैसे हुआ? जवाब: राजस्थान मेडिकल काउंसिल में तीनों डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। इन लोगों ने हमारे यहां रजिस्ट्रेशन के लिए फाइल ही प्रोसेस में नहीं दी थी, इसलिए हमें इसकी जानकारी नहीं थी। सवाल: क्या बिना रजिस्ट्रेशन के इंटर्नशिप की जा सकती है? जवाब: इंटर्नशिप के लिए आवेदन किया जा सकता है। इंटर्नशिप शुरू होने के बाद संबंधित डॉक्टर को मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराना होता है। सवाल: इंटर्नशिप शुरू होने के बाद कितने समय के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है? जवाब: जितना जल्दी हो सके, आमतौर पर एक महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर दिया जाता है। सवाल: लेकिन इन डॉक्टरों को तो इंटर्नशिप करते हुए काफी समय हो गया था? जवाब: यह मामला हमारी जानकारी में नहीं आ पाया था। सवाल: क्या राजस्थान मेडिकल काउंसिल के पास फर्जी तरीके से डॉक्टरी या इंटर्नशिप करने वालों का पता लगाने की व्यवस्था नहीं है? जवाब: हम इस तरह की बातों पर ध्यान रखते हैं, लेकिन इस मामले में जानकारी सामने नहीं आ सकी। अब एसओजी जिस प्रकार का सहयोग चाहती है, हम पूरा सहयोग कर रहे हैं। हमने अपना पूरा सिस्टम एसओजी के सामने खोल दिया है और कहा है कि वे इसमें से जो भी देखना चाहें, देख सकते हैं। यह पूरा डेटा सरकारी है, इसमें हमारा कोई व्यक्तिगत या निजी डेटा शामिल नहीं है। भारत में प्रैक्टिस के लिए जरूरी है ये 2 एग्जाम पास करने एनएमसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार यूएसए, यूके, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, रूस, किर्गिस्तान, जॉर्जिया, चीन और बांग्लादेश जैसे कई देशों की एमबीबीएस डिग्री भारत में मान्य है, बशर्ते यूनिवर्सिटी WHO से मान्यता प्राप्त हो। लेकिन भारत में प्रैक्टिस करने के लिए आमतौर पर FMGE या NExT परीक्षा पास करना अनिवार्य होता है। अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे कुछ देशों को छोड़कर, जहां स्थानीय लाइसेंसिंग परीक्षा पास करने पर छूट मिल सकती है। FMGE पासिंग परसेंटेज (उत्तीर्ण प्रतिशत) आमतौर पर 20-30% के बीच रहता है, जिसमें 2024 में लगभग 25.8% और 2025 के जून सत्र में लगभग 18.61% रहा है।


