सहरसा में रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) निर्माण के कारण पुरानी बस स्टैंड के पीछे मल्लिक टोला क्षेत्र में बसे 200 से अधिक महादलित परिवारों को विस्थापित किया गया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने इस मामले में सहरसा जिला प्रशासन से 30 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। ये परिवार रेलवे की जमीन पर सालों से रह रहे ये परिवार रेलवे की जमीन पर वर्षों से रह रहे थे। वे अपने पुनर्वास और 5 डिसमिल जमीन की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर गुरुवार शाम करीब 200 महादलित महिलाओं ने एकजुट होकर सहरसा जिला प्रशासन से ठोस पुनर्वास व्यवस्था करने की मांग की। महिलाओं का कहना है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए उन्हें हटाया जाना अनुचित है। इससे उनके सामने जीवन यापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। सहरसा नगर निगम क्षेत्र के इस्लामिया चौक निवासी समाजसेवी रोशन खातून ने इस मामले को गंभीरता से उठाया है। उन्होंने सहरसा जिलाधिकारी सहित राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को पत्र लिखकर महादलित परिवारों के पुनर्वास की मांग की थी। पहले भी हुआ था पत्राचार, लेकिन नहीं निकला हल खातून ने बताया कि इससे पहले भी कहरा अंचलाधिकारी को वार्ड संख्या 32 स्थित बस स्टैंड क्षेत्र में बसे महादलित परिवारों को वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने के लिए पत्राचार किया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी बताया कि इन परिवारों के पास आधार कार्ड, राशन कार्ड सहित सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध है, जिससे प्रशासन उनकी स्थायी बसावट से अवगत था। प्रशासन से गुहार, सुनवाई की आस पीड़ित कजरी देवी ने अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि वे लोग वर्षों से उसी जमीन पर रह रहे हैं और उन्हें सरकार की सभी बुनियादी सुविधाएं मिलती रही हैं। अचानक उजाड़ दिए जाने से उनके पास रहने के लिए कोई जगह नहीं बची है। उन्होंने कहा, “हम लोग बार-बार प्रशासन के पास गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।” सहरसा में रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) निर्माण के कारण पुरानी बस स्टैंड के पीछे मल्लिक टोला क्षेत्र में बसे 200 से अधिक महादलित परिवारों को विस्थापित किया गया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने इस मामले में सहरसा जिला प्रशासन से 30 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। ये परिवार रेलवे की जमीन पर सालों से रह रहे ये परिवार रेलवे की जमीन पर वर्षों से रह रहे थे। वे अपने पुनर्वास और 5 डिसमिल जमीन की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर गुरुवार शाम करीब 200 महादलित महिलाओं ने एकजुट होकर सहरसा जिला प्रशासन से ठोस पुनर्वास व्यवस्था करने की मांग की। महिलाओं का कहना है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए उन्हें हटाया जाना अनुचित है। इससे उनके सामने जीवन यापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। सहरसा नगर निगम क्षेत्र के इस्लामिया चौक निवासी समाजसेवी रोशन खातून ने इस मामले को गंभीरता से उठाया है। उन्होंने सहरसा जिलाधिकारी सहित राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को पत्र लिखकर महादलित परिवारों के पुनर्वास की मांग की थी। पहले भी हुआ था पत्राचार, लेकिन नहीं निकला हल खातून ने बताया कि इससे पहले भी कहरा अंचलाधिकारी को वार्ड संख्या 32 स्थित बस स्टैंड क्षेत्र में बसे महादलित परिवारों को वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने के लिए पत्राचार किया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी बताया कि इन परिवारों के पास आधार कार्ड, राशन कार्ड सहित सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध है, जिससे प्रशासन उनकी स्थायी बसावट से अवगत था। प्रशासन से गुहार, सुनवाई की आस पीड़ित कजरी देवी ने अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि वे लोग वर्षों से उसी जमीन पर रह रहे हैं और उन्हें सरकार की सभी बुनियादी सुविधाएं मिलती रही हैं। अचानक उजाड़ दिए जाने से उनके पास रहने के लिए कोई जगह नहीं बची है। उन्होंने कहा, “हम लोग बार-बार प्रशासन के पास गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।”


