मधुबनी जिले में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए 5 मार्च से एक विशेष मॉप-अप अभियान जारी है, जो 13 मार्च तक चलेगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाना है, जो पिछले सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम के दौरान दवा लेने से वंचित रह गए थे। इससे पहले, राज्य सरकार के निर्देश पर मधुबनी के शहरी क्षेत्रों में 10 से 28 फरवरी तक एमडीए कार्यक्रम चलाया गया था। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. डी.एस. सिंह ने फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए सामूहिक दवा सेवन के महत्व पर जोर दिया। स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार, पिछले अभियान के तहत स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने 14 दिनों तक घर-घर जाकर दवा सेवन कराया था, जबकि 3 दिनों तक स्कूल बूथों के माध्यम से बच्चों और अभिभावकों को दवा दी गई थी। आंगनवाड़ी सेविकाएं और अन्य स्वास्थ्यकर्मी लोगों को जागरूक करने में सक्रिय रहे। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में शत-प्रतिशत कवरेज नहीं हो सका, क्योंकि कई स्थानों पर लोगों ने दवा लेने से इनकार कर दिया या वे किसी कारणवश दवा नहीं ले पाए। इन्हीं छूटे हुए लोगों को अभियान से जोड़ने और शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने यह विशेष मॉप-अप गतिविधि चलाने का निर्णय लिया है। इस दौरान स्वास्थ्यकर्मी पुनः उन क्षेत्रों का दौरा करेंगे और लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाएंगे। साथ ही, उन्हें फाइलेरिया के लक्षण, कारण और बचाव के उपायों के बारे में भी जागरूक किया जाएगा। डॉ. सिंह ने बताया कि जिले का कवरेज आईएचआईपी पोर्टल के अनुसार लगभग 95 प्रतिशत होना चाहिए, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की निगरानी रिपोर्ट के आधार पर भी यह आंकड़ा 85 प्रतिशत से अधिक होना अनिवार्य है। स्वास्थ्य विभाग ने जिले के नागरिकों से अपील की है कि वे फाइलेरिया से बचाव के लिए दी जाने वाली दवा का सेवन अवश्य करें और स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग करें, ताकि मधुबनी जिले को इस बीमारी से मुक्त किया जा सके। मधुबनी जिले में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए 5 मार्च से एक विशेष मॉप-अप अभियान जारी है, जो 13 मार्च तक चलेगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाना है, जो पिछले सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम के दौरान दवा लेने से वंचित रह गए थे। इससे पहले, राज्य सरकार के निर्देश पर मधुबनी के शहरी क्षेत्रों में 10 से 28 फरवरी तक एमडीए कार्यक्रम चलाया गया था। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. डी.एस. सिंह ने फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए सामूहिक दवा सेवन के महत्व पर जोर दिया। स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार, पिछले अभियान के तहत स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने 14 दिनों तक घर-घर जाकर दवा सेवन कराया था, जबकि 3 दिनों तक स्कूल बूथों के माध्यम से बच्चों और अभिभावकों को दवा दी गई थी। आंगनवाड़ी सेविकाएं और अन्य स्वास्थ्यकर्मी लोगों को जागरूक करने में सक्रिय रहे। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में शत-प्रतिशत कवरेज नहीं हो सका, क्योंकि कई स्थानों पर लोगों ने दवा लेने से इनकार कर दिया या वे किसी कारणवश दवा नहीं ले पाए। इन्हीं छूटे हुए लोगों को अभियान से जोड़ने और शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने यह विशेष मॉप-अप गतिविधि चलाने का निर्णय लिया है। इस दौरान स्वास्थ्यकर्मी पुनः उन क्षेत्रों का दौरा करेंगे और लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाएंगे। साथ ही, उन्हें फाइलेरिया के लक्षण, कारण और बचाव के उपायों के बारे में भी जागरूक किया जाएगा। डॉ. सिंह ने बताया कि जिले का कवरेज आईएचआईपी पोर्टल के अनुसार लगभग 95 प्रतिशत होना चाहिए, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की निगरानी रिपोर्ट के आधार पर भी यह आंकड़ा 85 प्रतिशत से अधिक होना अनिवार्य है। स्वास्थ्य विभाग ने जिले के नागरिकों से अपील की है कि वे फाइलेरिया से बचाव के लिए दी जाने वाली दवा का सेवन अवश्य करें और स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग करें, ताकि मधुबनी जिले को इस बीमारी से मुक्त किया जा सके।


