बंगाल की खाड़ी में नमी; झारखंड पर असर:दो दिन बाद 11 जिलों में बरसेंगे बादल, 40 km/h रहेगी हवा की रफ्तार, अलर्ट जारी

बंगाल की खाड़ी में नमी; झारखंड पर असर:दो दिन बाद 11 जिलों में बरसेंगे बादल, 40 km/h रहेगी हवा की रफ्तार, अलर्ट जारी

अप्रैल माह में मौसम का उतार-चढ़ाव जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार माह के पहले सप्ताह में बादल छाने और हल्की बारिश की संभावना से लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, दूसरे और तीसरे सप्ताह से तापमान में लगातार बढ़ोतरी शुरू हो जाएगी। 2 और 3 अप्रैल को आसमान साफ रहने से पारा चढ़ेगा, वहीं 4 अप्रैल को राज्य के पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार, रांची, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, रामगढ़, कोडरमा और धनबाद में मेघ गर्जन के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है। इस दौरान 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा भी चल सकती है। मौसम विभाग ने इसे लेकर यलो अलर्ट जारी किया है। बंगाल की खाड़ी की नमी से बदलेगा मौसम मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार झारखंड में अप्रैल के दौरान मौसम का बदलाव मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी पर निर्भर करता है। कई बार अरब सागर से भी नमी आने के कारण मौसम में परिवर्तन होता है। जब तक नमी का प्रवाह बना रहेगा, तब तक बीच-बीच में बारिश होती रहेगी और तापमान नियंत्रित रहेगा। लेकिन जैसे ही नमी की कमी होगी, गर्मी और उमस में तेजी से इजाफा होगा। मौसम केंद्र, रांची के निदेशक अभिषेक आनंद के अनुसार माह के अंत तक अधिकतम तापमान पुराने रिकॉर्ड को भी पार कर सकता है। 10 साल का रिकॉर्ड टूटने की संभावना पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल 2016 में रांची का अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इसके बाद वर्ष 2022 में यह 41.6 डिग्री तक पहुंचा था। इस बार भी महीने के अंत तक तापमान 42 डिग्री या उससे अधिक होने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल कुछ जिलों में अधिकतम तापमान 37 से 39 डिग्री के बीच बना हुआ है, जबकि न्यूनतम तापमान 23 डिग्री के आसपास रहने का अनुमान है। पिछले 24 घंटे में डालटनगंज में सबसे अधिक 38.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। बारिश और ओलावृष्टि से फसलों पर खतरा मौसम में लगातार बदलाव का असर खेती पर भी पड़ सकता है। तेज हवा, बारिश और ओलावृष्टि के कारण फल और सब्जियों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। आम के टिकोले प्रभावित हो सकते हैं। वहीं दलहन की फसलों में फफूंद रोग लगने का खतरा बढ़ जाता है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे सब्जियों की नर्सरी को पॉलीहाउस में सुरक्षित रखें या पॉलीथिन से ढंक दें। साथ ही, दोपहर के समय लू और गर्म हवा से बचाव के लिए लोगों को सावधानी बरतने की अपील की गई है। अप्रैल माह में मौसम का उतार-चढ़ाव जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार माह के पहले सप्ताह में बादल छाने और हल्की बारिश की संभावना से लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, दूसरे और तीसरे सप्ताह से तापमान में लगातार बढ़ोतरी शुरू हो जाएगी। 2 और 3 अप्रैल को आसमान साफ रहने से पारा चढ़ेगा, वहीं 4 अप्रैल को राज्य के पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार, रांची, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, रामगढ़, कोडरमा और धनबाद में मेघ गर्जन के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है। इस दौरान 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा भी चल सकती है। मौसम विभाग ने इसे लेकर यलो अलर्ट जारी किया है। बंगाल की खाड़ी की नमी से बदलेगा मौसम मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार झारखंड में अप्रैल के दौरान मौसम का बदलाव मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी पर निर्भर करता है। कई बार अरब सागर से भी नमी आने के कारण मौसम में परिवर्तन होता है। जब तक नमी का प्रवाह बना रहेगा, तब तक बीच-बीच में बारिश होती रहेगी और तापमान नियंत्रित रहेगा। लेकिन जैसे ही नमी की कमी होगी, गर्मी और उमस में तेजी से इजाफा होगा। मौसम केंद्र, रांची के निदेशक अभिषेक आनंद के अनुसार माह के अंत तक अधिकतम तापमान पुराने रिकॉर्ड को भी पार कर सकता है। 10 साल का रिकॉर्ड टूटने की संभावना पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल 2016 में रांची का अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इसके बाद वर्ष 2022 में यह 41.6 डिग्री तक पहुंचा था। इस बार भी महीने के अंत तक तापमान 42 डिग्री या उससे अधिक होने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल कुछ जिलों में अधिकतम तापमान 37 से 39 डिग्री के बीच बना हुआ है, जबकि न्यूनतम तापमान 23 डिग्री के आसपास रहने का अनुमान है। पिछले 24 घंटे में डालटनगंज में सबसे अधिक 38.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। बारिश और ओलावृष्टि से फसलों पर खतरा मौसम में लगातार बदलाव का असर खेती पर भी पड़ सकता है। तेज हवा, बारिश और ओलावृष्टि के कारण फल और सब्जियों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। आम के टिकोले प्रभावित हो सकते हैं। वहीं दलहन की फसलों में फफूंद रोग लगने का खतरा बढ़ जाता है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे सब्जियों की नर्सरी को पॉलीहाउस में सुरक्षित रखें या पॉलीथिन से ढंक दें। साथ ही, दोपहर के समय लू और गर्म हवा से बचाव के लिए लोगों को सावधानी बरतने की अपील की गई है।  

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