सुपौल में भूकंप को लेकर मॉक ड्रिल:आपदा से निपटने की तैयारियों का ट्रेनिंग, DTO ऑफिस से सदर अस्पताल तक प्रैक्टिस

सुपौल में भूकंप को लेकर मॉक ड्रिल:आपदा से निपटने की तैयारियों का ट्रेनिंग, DTO ऑफिस से सदर अस्पताल तक प्रैक्टिस

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के दिशा-निर्देशानुसार जिला प्रशासन, सुपौल द्वारा गुरुवार को भूकंप पर आधारित व्यापक मॉक एक्सरसाइज का सफल आयोजन किया गया। इस अभ्यास का उद्देश्य संभावित आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय तथा उपलब्ध संसाधनों की तैयारियों का परीक्षण करना था। पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक तत्परता और बचाव एजेंसियों की सक्रियता देखने को मिली। जिला प्रशासन द्वारा मॉक एक्सरसाइज के लिए जिले में कुल 5 महत्वपूर्ण स्थलों का चयन किया गया था। इनमें मार्केट एरिया स्थित वी-मार्ट मॉल, रेजिडेंशियल एरिया की ऑफिसर्स कॉलोनी, सदर अस्पताल सुपौल, इंजीनियरिंग कॉलेज सुपौल तथा समाहरणालय परिसर स्थित जिला परिवहन कार्यालय शामिल थे। इन सभी स्थानों पर पूर्व निर्धारित परिदृश्य के आधार पर अभ्यास कराया गया, जिससे वास्तविक आपदा की स्थिति का सजीव अनुभव मिल सके। चयनित स्थल पर नोडल पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति प्रत्येक चयनित स्थल पर नोडल पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई थी, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की। मॉक ड्रिल के दौरान रेस्क्यू और खोज-बचाव कार्यों के लिए विशेष टीमों को तैनात किया गया। अभ्यास के दौरान घायल लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने, प्राथमिक उपचार देने और भीड़ प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का भी प्रदर्शन किया गया। निर्धारित समय-सीमा में अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन इस मॉक एक्सरसाइज में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), सशस्त्र सीमा बल (SSB), आपदा मित्र, इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी तथा भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की सक्रिय और सराहनीय भागीदारी रही। सभी एजेंसियों ने आपसी समन्वय के साथ निर्धारित समय-सीमा में अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन किया। बचाव दलों ने मलबा हटाने, फंसे लोगों को निकालने और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। संसाधनों और टीमों की तैनाती का समन्वय किया गया अभ्यास के सुचारू संचालन के लिए आईटीआई परिसर को स्टेजिंग एरिया बनाया गया था, जहां से संसाधनों और टीमों की तैनाती का समन्वय किया गया। वहीं, संभावित आपदा की स्थिति में प्रभावित लोगों को तत्काल राहत देने के उद्देश्य से गांधी मैदान को राहत केंद्र (रिलीफ सेंटर) के रूप में चिन्हित किया गया। यहां अस्थायी आश्रय, भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी का भी परीक्षण किया गया। मॉक ड्रिल के दौरान इंजीनियरिंग विभाग और विद्युत विभाग की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही। संभावित संरचनात्मक क्षति का आकलन, विद्युत आपूर्ति को नियंत्रित करना तथा तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराना इन विभागों की प्रमुख जिम्मेदारी रही, जिसे उन्होंने प्रभावी ढंग से निभाया। इससे आपदा की स्थिति में त्वरित तकनीकी प्रतिक्रिया की क्षमता का भी मूल्यांकन हुआ। विभिन्न टीमों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कार्यक्रम का नेतृत्व मुख्य कमांड ऑफिसर मो. तारिक, अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन), सुपौल के निर्देशन में किया गया। उनके मार्गदर्शन में पूरी मॉक एक्सरसाइज चरणबद्ध और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुई। इस अवसर पर श्री मुकेश कुमार, प्रभारी पदाधिकारी, आपदा प्रबंधन सह वरीय उप समाहर्ता, सुपौल तथा चन्द्रभूषण कुमार, सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी, सुपौल की भूमिका भी उल्लेखनीय रही। इसके अलावा जिला आपातकालीन संचालन केंद्र, सुपौल के प्रोग्रामर शैलेन्द्र कुमार एवं उनकी तकनीकी टीम ने संचार व्यवस्था को सुचारू बनाए रखा। सभी सूचनाओं का समय पर आदान-प्रदान सुनिश्चित किया गया, जिससे विभिन्न टीमों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सका और अभ्यास सफल रहा। अभ्यास नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता पर बल समापन के बाद अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार के मॉक अभ्यास से वास्तविक आपदा के समय होने वाली चुनौतियों की पहचान करने और उन्हें दूर करने में मदद मिलती है। साथ ही, संबंधित विभागों की तैयारियों का व्यावहारिक परीक्षण भी हो जाता है। जिला प्रशासन ने कहा कि सभी पदाधिकारियों, बचाव दलों और तकनीकी टीम के समन्वित प्रयासों से यह भूकंप मॉक एक्सरसाइज सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। समग्र रूप से यह अभ्यास जिले की आपदा प्रबंधन संबंधी तैयारियों, आपसी समन्वय क्षमता और त्वरित कार्रवाई की प्रभावशीलता को दर्शाता है। प्रशासन ने भविष्य में भी इस तरह के अभ्यास नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के दिशा-निर्देशानुसार जिला प्रशासन, सुपौल द्वारा गुरुवार को भूकंप पर आधारित व्यापक मॉक एक्सरसाइज का सफल आयोजन किया गया। इस अभ्यास का उद्देश्य संभावित आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय तथा उपलब्ध संसाधनों की तैयारियों का परीक्षण करना था। पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक तत्परता और बचाव एजेंसियों की सक्रियता देखने को मिली। जिला प्रशासन द्वारा मॉक एक्सरसाइज के लिए जिले में कुल 5 महत्वपूर्ण स्थलों का चयन किया गया था। इनमें मार्केट एरिया स्थित वी-मार्ट मॉल, रेजिडेंशियल एरिया की ऑफिसर्स कॉलोनी, सदर अस्पताल सुपौल, इंजीनियरिंग कॉलेज सुपौल तथा समाहरणालय परिसर स्थित जिला परिवहन कार्यालय शामिल थे। इन सभी स्थानों पर पूर्व निर्धारित परिदृश्य के आधार पर अभ्यास कराया गया, जिससे वास्तविक आपदा की स्थिति का सजीव अनुभव मिल सके। चयनित स्थल पर नोडल पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति प्रत्येक चयनित स्थल पर नोडल पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई थी, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की। मॉक ड्रिल के दौरान रेस्क्यू और खोज-बचाव कार्यों के लिए विशेष टीमों को तैनात किया गया। अभ्यास के दौरान घायल लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने, प्राथमिक उपचार देने और भीड़ प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का भी प्रदर्शन किया गया। निर्धारित समय-सीमा में अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन इस मॉक एक्सरसाइज में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), सशस्त्र सीमा बल (SSB), आपदा मित्र, इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी तथा भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की सक्रिय और सराहनीय भागीदारी रही। सभी एजेंसियों ने आपसी समन्वय के साथ निर्धारित समय-सीमा में अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन किया। बचाव दलों ने मलबा हटाने, फंसे लोगों को निकालने और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। संसाधनों और टीमों की तैनाती का समन्वय किया गया अभ्यास के सुचारू संचालन के लिए आईटीआई परिसर को स्टेजिंग एरिया बनाया गया था, जहां से संसाधनों और टीमों की तैनाती का समन्वय किया गया। वहीं, संभावित आपदा की स्थिति में प्रभावित लोगों को तत्काल राहत देने के उद्देश्य से गांधी मैदान को राहत केंद्र (रिलीफ सेंटर) के रूप में चिन्हित किया गया। यहां अस्थायी आश्रय, भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी का भी परीक्षण किया गया। मॉक ड्रिल के दौरान इंजीनियरिंग विभाग और विद्युत विभाग की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही। संभावित संरचनात्मक क्षति का आकलन, विद्युत आपूर्ति को नियंत्रित करना तथा तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराना इन विभागों की प्रमुख जिम्मेदारी रही, जिसे उन्होंने प्रभावी ढंग से निभाया। इससे आपदा की स्थिति में त्वरित तकनीकी प्रतिक्रिया की क्षमता का भी मूल्यांकन हुआ। विभिन्न टीमों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कार्यक्रम का नेतृत्व मुख्य कमांड ऑफिसर मो. तारिक, अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन), सुपौल के निर्देशन में किया गया। उनके मार्गदर्शन में पूरी मॉक एक्सरसाइज चरणबद्ध और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुई। इस अवसर पर श्री मुकेश कुमार, प्रभारी पदाधिकारी, आपदा प्रबंधन सह वरीय उप समाहर्ता, सुपौल तथा चन्द्रभूषण कुमार, सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी, सुपौल की भूमिका भी उल्लेखनीय रही। इसके अलावा जिला आपातकालीन संचालन केंद्र, सुपौल के प्रोग्रामर शैलेन्द्र कुमार एवं उनकी तकनीकी टीम ने संचार व्यवस्था को सुचारू बनाए रखा। सभी सूचनाओं का समय पर आदान-प्रदान सुनिश्चित किया गया, जिससे विभिन्न टीमों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सका और अभ्यास सफल रहा। अभ्यास नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता पर बल समापन के बाद अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार के मॉक अभ्यास से वास्तविक आपदा के समय होने वाली चुनौतियों की पहचान करने और उन्हें दूर करने में मदद मिलती है। साथ ही, संबंधित विभागों की तैयारियों का व्यावहारिक परीक्षण भी हो जाता है। जिला प्रशासन ने कहा कि सभी पदाधिकारियों, बचाव दलों और तकनीकी टीम के समन्वित प्रयासों से यह भूकंप मॉक एक्सरसाइज सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। समग्र रूप से यह अभ्यास जिले की आपदा प्रबंधन संबंधी तैयारियों, आपसी समन्वय क्षमता और त्वरित कार्रवाई की प्रभावशीलता को दर्शाता है। प्रशासन ने भविष्य में भी इस तरह के अभ्यास नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके।  

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