समस्तीपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का धरना:मनरेगा योजना में किए गए बदलाव को वापस लेने की मांग, उग्र आंदोलन की चेतावनी दी

समस्तीपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का धरना:मनरेगा योजना में किए गए बदलाव को वापस लेने की मांग, उग्र आंदोलन की चेतावनी दी

समस्तीपुर में केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा योजना में किए गए बदलाव के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक दिवसीय उपवास रखा और सांकेतिक धरना दिया। आयोजन अंबेडकर स्थल पर किया गया। जिलाध्यक्ष अबू तमीम ने बताया कि मनरेगा योजना कांग्रेस सरकार ने लागू की थी। तब केंद्र सरकार 90% और राज्य सरकार 10% राशि खर्च करती थी, जिससे मजदूरों को 100 दिन के रोजगार की गारंटी मिलती थी। अब केंद्र सरकार ने इसमें बदलाव कर अपनी हिस्सेदारी 60% और राज्य सरकार की 40% कर दी है। इस बदलाव के कारण मजदूरों के सामने रोजगार की समस्या खड़ी हो गई है और उन्हें काम मिलना मुश्किल हो जाएगा। धरने के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की। इसके अलावा अन्य मांगों में काम की गारंटी, मजदूरी की गारंटी, जवाबदेही की गारंटी, काम के संवैधानिक अधिकार की पूर्ण बहाली और न्यूनतम मजदूरी 400 रुपए प्रतिदिन करना शामिल है। जिलाध्यक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर केंद्र सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। सड़क से लेकर सदन तक अपनी आवाज उठाएंगे। समस्तीपुर में केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा योजना में किए गए बदलाव के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक दिवसीय उपवास रखा और सांकेतिक धरना दिया। आयोजन अंबेडकर स्थल पर किया गया। जिलाध्यक्ष अबू तमीम ने बताया कि मनरेगा योजना कांग्रेस सरकार ने लागू की थी। तब केंद्र सरकार 90% और राज्य सरकार 10% राशि खर्च करती थी, जिससे मजदूरों को 100 दिन के रोजगार की गारंटी मिलती थी। अब केंद्र सरकार ने इसमें बदलाव कर अपनी हिस्सेदारी 60% और राज्य सरकार की 40% कर दी है। इस बदलाव के कारण मजदूरों के सामने रोजगार की समस्या खड़ी हो गई है और उन्हें काम मिलना मुश्किल हो जाएगा। धरने के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की। इसके अलावा अन्य मांगों में काम की गारंटी, मजदूरी की गारंटी, जवाबदेही की गारंटी, काम के संवैधानिक अधिकार की पूर्ण बहाली और न्यूनतम मजदूरी 400 रुपए प्रतिदिन करना शामिल है। जिलाध्यक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर केंद्र सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। सड़क से लेकर सदन तक अपनी आवाज उठाएंगे।  

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