मनरेगा का नाम बदलने पर विधायक नाराज:केंद्र सरकार पर महात्मा गांधी की विरासत मिटाने का आरोप

मनरेगा का नाम बदलने पर विधायक नाराज:केंद्र सरकार पर महात्मा गांधी की विरासत मिटाने का आरोप

किशनगंज में विधायक कमरूल हुदा ने केंद्र सरकार पर मनरेगा योजना में किए गए बदलावों को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इन बदलावों को महात्मा गांधी की आत्मा को ठेस पहुंचाने वाला कदम बताया और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार गोडसे की विचारधारा को बढ़ावा दे रही है। मनरेगा योजना का नाम बदलना उचित नहीं स्थानीय कांग्रेस कार्यालय में एक पत्रकार वार्ता के दौरान विधायक हुदा ने कहा कि केंद्र सरकार ने मनरेगा योजना का नाम बदलकर इसकी मूल भावना को कमजोर किया है। उन्होंने कहा, “केंद्र की सरकार ने मनरेगा योजना का नाम बदल दिया, जो उचित नहीं है। ऐसा लगता है कि ये लोग महात्मा गांधी की विरासत को मिटाने और उनकी आत्मा को ठेस पहुंचाने का काम कर रहे हैं।” विधायक ने यह भी बताया कि नए कानून के तहत अब राज्य सरकारों को योजना की 40 प्रतिशत राशि का भुगतान करना होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राज्य सरकारें यह वित्तीय बोझ उठा पाएंगी, जिससे ग्रामीण मजदूरों की रोजगार गारंटी प्रभावित होगी और योजना का मूल उद्देश्य खतरे में पड़ जाएगा। 10 से 25 फरवरी तक देश के सभी राज्यों में “मनरेगा बचाओ अभियान” इन बदलावों के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। 10 जनवरी 2026 से 25 फरवरी 2026 तक देश के सभी राज्यों, जिलों और पंचायत स्तर पर “मनरेगा बचाओ अभियान” चलाया जाएगा। इस अभियान में उपवास, जनसंपर्क, धरना-प्रदर्शन, मनरेगा बचाओ रैलियां और विधानसभा घेराव जैसे कार्यक्रम शामिल होंगे। विधायक कमरूल हुदा ने कहा कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से चलेगा, जिसका उद्देश्य केंद्र सरकार को उसकी जिम्मेदारी याद दिलाना और मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल करना है। उन्होंने ग्रामीण मजदूरों, महिलाओं और आदिवासियों से इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की, क्योंकि यह उनकी आजीविका और अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है। नए कानून के तहत योजना का नाम बदलकर VB-G RAM G किया यह मुद्दा देशभर में गरमाया हुआ है, जहां कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल केंद्र के नए कानून को महात्मा गांधी की विरासत पर हमला बता रहे हैं। नए कानून के तहत योजना का नाम बदलकर ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण’ (VB-G RAM G) किया गया है। कांग्रेस का दावा है कि इससे राज्यों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और ग्रामीण रोजगार गारंटी कमजोर होगी। किशनगंज में विधायक कमरूल हुदा ने केंद्र सरकार पर मनरेगा योजना में किए गए बदलावों को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इन बदलावों को महात्मा गांधी की आत्मा को ठेस पहुंचाने वाला कदम बताया और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार गोडसे की विचारधारा को बढ़ावा दे रही है। मनरेगा योजना का नाम बदलना उचित नहीं स्थानीय कांग्रेस कार्यालय में एक पत्रकार वार्ता के दौरान विधायक हुदा ने कहा कि केंद्र सरकार ने मनरेगा योजना का नाम बदलकर इसकी मूल भावना को कमजोर किया है। उन्होंने कहा, “केंद्र की सरकार ने मनरेगा योजना का नाम बदल दिया, जो उचित नहीं है। ऐसा लगता है कि ये लोग महात्मा गांधी की विरासत को मिटाने और उनकी आत्मा को ठेस पहुंचाने का काम कर रहे हैं।” विधायक ने यह भी बताया कि नए कानून के तहत अब राज्य सरकारों को योजना की 40 प्रतिशत राशि का भुगतान करना होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राज्य सरकारें यह वित्तीय बोझ उठा पाएंगी, जिससे ग्रामीण मजदूरों की रोजगार गारंटी प्रभावित होगी और योजना का मूल उद्देश्य खतरे में पड़ जाएगा। 10 से 25 फरवरी तक देश के सभी राज्यों में “मनरेगा बचाओ अभियान” इन बदलावों के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। 10 जनवरी 2026 से 25 फरवरी 2026 तक देश के सभी राज्यों, जिलों और पंचायत स्तर पर “मनरेगा बचाओ अभियान” चलाया जाएगा। इस अभियान में उपवास, जनसंपर्क, धरना-प्रदर्शन, मनरेगा बचाओ रैलियां और विधानसभा घेराव जैसे कार्यक्रम शामिल होंगे। विधायक कमरूल हुदा ने कहा कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से चलेगा, जिसका उद्देश्य केंद्र सरकार को उसकी जिम्मेदारी याद दिलाना और मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल करना है। उन्होंने ग्रामीण मजदूरों, महिलाओं और आदिवासियों से इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की, क्योंकि यह उनकी आजीविका और अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है। नए कानून के तहत योजना का नाम बदलकर VB-G RAM G किया यह मुद्दा देशभर में गरमाया हुआ है, जहां कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल केंद्र के नए कानून को महात्मा गांधी की विरासत पर हमला बता रहे हैं। नए कानून के तहत योजना का नाम बदलकर ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण’ (VB-G RAM G) किया गया है। कांग्रेस का दावा है कि इससे राज्यों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और ग्रामीण रोजगार गारंटी कमजोर होगी।  

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