इराक में अमेरिकी दूतावास पर मिसाइल अटैक, धमाके की आवाज से दहल उठा पूरा इलाका

इराक में अमेरिकी दूतावास पर मिसाइल अटैक, धमाके की आवाज से दहल उठा पूरा इलाका

इराक की राजधानी बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर बड़ा हमला हुआ है। दूतावास पर मिसाइलों से हमला हुआ है। एक मिसाइल दूतावास परिसर में हेलीपैड पर गिरी है। मिसाइल अटैक की गूंज से पूरा इलाका दहल उठा है। परिसर में अफरातफरी का माहौल कायम हो गया।

दूतावास परिसर से उठा धुएं का गुबार

सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में अमेरिकी दूतावास परिसर के भीतर से धुएं का गुबार उठता साफ दिखाई दे रहा है। दूतावास की तरफ से हमले में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं दी गई है। घटना के बाद इलाके को पूरी तरह से सील कर दिया गया है।

यूएसएस त्रिपोली के साथ 2500 मरीन कमांडो की मिडिल ईस्ट में तैनाती

उधर पेंटागन ने मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अतिरिक्त मरीन सैनिकों और युद्धपोतों को तैनात करने का फैसला किया है। मीडिया रिपोर्टों में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान द्वारा समुद्री यातायात और क्षेत्रीय ठिकानों पर हमलों के बाद यह कदम उठाया जा रहा है।

फॉक्स न्यूज के मुताबिक, अमेरिका पोत यूएसएस त्रिपोली के साथ एक मरीन एम्फीबियस रेडी ग्रुप और 31वीं मरीन अभियान इकाई को क्षेत्र में भेज रहा है। एक अमेरिकी रक्षा अधिकारी के हवाले से फॉक्स न्यूज ने बताया कि इस तैनाती में लगभग 2,500 मरीन और 2,500 नाविक शामिल होंगे।

अभी जापान में तैनात है यूएसएस त्रिपोली

यूएसएस त्रिपोली फिलहाल जापान में तैनात है और उसे मध्य-पूर्व पहुंचने में लगभग एक से दो सप्ताह का समय लग सकता है। वहां पहुंचने के बाद यह पहले से क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य संसाधनों के साथ जुड़ जाएगा। यह तैनाती ऐसे समय की जा रही है जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात को धमकाने और खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों पर हमले करने की चेतावनी दी है। इससे वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से करीब 2,500 मरीन तीन युद्धपोतों के जरिए मध्य पूर्व की ओर रवाना हो रहे हैं। ये सैनिक वहां पहले से तैनात अमेरिकी बलों को मजबूत करेंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल मध्य-पूर्व में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और नए मरीन उनके साथ जुड़ेंगे। हालांकि अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि क्षेत्र में पहुंचने के बाद इन अतिरिक्त बलों का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा।

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