नाबालिग ने 80 साल की महिला का किया रेप, मुंह में ठूंसा कपड़ा; अब कोर्ट ने सुनाई सजा

नाबालिग ने 80 साल की महिला का किया रेप, मुंह में ठूंसा कपड़ा; अब कोर्ट ने सुनाई सजा

Bihar News: बिहार के मधुबनी जिले में 7 साल पहले 80 साल की एक महिला के साथ हुए बलात्कार के मामले में किशोर न्याय परिषद (JJB) ने एक अहम फैसला सुनाया है। आरोपी किशोर को दोषी ठहराते हुए अदालत ने उसे 18 महीने के लिए एक सुधार गृह में भेजने का आदेश दिया है। पीठासीन मजिस्ट्रेट अंकित आनंद की बेंच ने इस अपराध को जघन्य और समाज पर एक कलंक मानते हुए निर्देश दिया कि नाबालिग को पटना के एक स्पेशल होम में भेजा जाए।

सोते समय बुज़ुर्ग महिला को बनाया निशाना

यह घटना 10 जुलाई 2019 की रात को हुई थी। अंधराठाढ़ी थाना क्षेत्र के एक गांव में 80 साल की एक महिला अपने घर के बरामदे में मच्छरदानी लगा कर सो रही थी। रात करीब 11 बजे उसी गांव का एक नाबालिग जबरदस्ती महिला के घर में घुस गया। नाबलीग की उम्र उस समय 14 साल थी। आरोप है कि उसने बुज़ुर्ग महिला को चीखने से रोकने के लिए उसके मुंह में कपड़े का एक टुकड़ा ठूंस दिया और फिर उसके साथ बलात्कार किया।

भागते समय मच्छरदानी में फंसा

जब महिला किसी तरह शोर मचाने में कामयाब हुई, तो उसकी बहू और पोता तुरंत मौके पर पहुंचे। पकड़े जाने के डर से किशोर ने भागने की कोशिश की लेकिन वह उस जगह लगी मच्छरदानी में बुरी तरह फंस गया। मची अफरा-तफरी के बीच इस मौके का फायदा उठाते हुए परिवार के सदस्यों और गांव वालों ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया।

मेडिकल रिपोर्ट और गवाही ने सबूतों को मजबूत किया

अनुमंडल अभियोजन अधिकारी रिपुंजय कुमार रंजन और सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) गगन कुमार ने अदालत में इस मामले को समाज पर एक शर्मनाक कलंक बताया। उन्होंने डॉ. आकांक्षा, डॉ. रमा झा और डॉ. मिश्रा की एक विशेष मेडिकल टीम द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट अदालत के सामने पेश की। मेडिकल जांच में पीड़िता के शरीर पर चोट के निशान होने की पुष्टि हुई और बलात्कार की घटना की भी पुष्टि हुई। अदालत में डॉक्टरों द्वारा दी गई वैज्ञानिक गवाही ने आरोपी के खिलाफ मामले को निर्णायक रूप से साबित कर दिया।

14 साल की उम्र में किया अपराध

सुनवाई के दौरान मदरसा शिक्षा बोर्ड की ओर से किशोर की उम्र से जुड़ा एक प्रमाण पत्र पेश किया गया, जिससे यह साबित हुआ कि घटना के समय उसकी उम्र 14 साल 4 महीने और 23 दिन थी। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता संजय कुमार मिश्र ने सजा कम करने की अपील की थी। हालांकि, अपराध की गंभीरता को देखते हुए जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने उसे धारा 323 और 376 के तहत दोषी पाया और उसे सुधार गृह भेजने का फैसला सुनाया।

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