नरसिंहपुर के स्टेडियम ग्राउंड में बुधवार शाम स्वदेशी मेले की शुरुआत हुई। 15 फरवरी तक चलने वाले इस मेले का उद्घाटन कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल ने किया। उन्होंने मेले में लगे विभिन्न स्टालों का अवलोकन किया और ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को दोहराते हुए नागरिकों से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की अपील की। आत्मनिर्भरता और हुनर का सम्मान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति तभी संभव है जब हर हाथ को काम मिले और काम करने की इच्छा रखने वाले हुनरमंद लोगों को उचित मंच, सहयोग और सम्मान प्राप्त हो। उन्होंने स्वदेशी मेले को आजादी के पहले से चले आ रहे एक निरंतर प्रयास का हिस्सा बताया। भारतीय जीवनशैली और संयम का महत्व बताया मंत्री पटेल ने अपने संबोधन में पाश्चात्य संस्कृति और उपभोक्तावाद पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पश्चिमी जीवनशैली ने समाज में अपव्यय (फिजूलखर्ची) को बढ़ाया है, जबकि भारतीय संस्कृति हमेशा संयमित और संतुलित जीवन का संदेश देती है। आज पूरी दुनिया भारतीय तौर-तरीकों की सराहना कर रही है क्योंकि हमारे निर्माण और आवश्यकताएं कभी बर्बादी को बढ़ावा नहीं देतीं। तकनीक और परंपरा का मेल तकनीक के बढ़ते प्रभाव पर बोलते हुए मंत्री ने कहा कि हमें नई तकनीक का विरोध नहीं करना चाहिए। बल्कि, आधुनिक तकनीक को अपनी परंपरागत चीजों और कौशल के साथ जोड़कर आगे बढ़ना चाहिए। इससे हमारे स्वदेशी उत्पाद और अधिक बेहतर और प्रतिस्पर्धी बनेंगे। उन्होंने सागर के स्वावलंबी केंद्र का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे बिना सरकारी मदद के 20-30 परिवारों को आत्मनिर्भर बनाया गया है। स्थानीय उत्पादों को मिलेगी नई पहचान इस मेले में समाज के उन परिवारों और कारीगरों को प्रमुखता दी गई है जो घर बैठे उत्कृष्ट उत्पाद तैयार कर रहे हैं, लेकिन उन्हें उचित पहचान नहीं मिल पाती। 15 फरवरी तक चलने वाले इस मेले में मिट्टी के बर्तन, हस्तशिल्प, पारंपरिक परिधान और शुद्ध जैविक खाद्यों के स्टॉल लगाए गए हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि इस आयोजन से स्थानीय व्यापार को बड़ी मजबूती मिलेगी।


