डिप्टी CM विजय सिन्हा के जनसंवाद पर राजस्व व भूमि सुधार विभाग के अफसर भड़क गए हैं। अफसरों का कहना है कि जनसंवाद में मंत्री हमारा सार्वजनिक अपमान कर रहे हैं। वहीं, मंत्री का कहना है कि ऐसा कुछ नहीं है। जो काम नहीं करेगा, उस पर कार्रवाई तो होगी ही। तनातनी इतनी बढ़ गई है कि अफसरों ने जनसंवाद के सार्वजनिक बहिष्कार की चेतावनी दे दी है। ऐसे में बिहार के सियासी गलियारे में चर्चा शुरू हो गई है कि या सिन्हा जी की कुर्सी बदली जाएगी या विभाग सुधर जाएगा। विजय सिन्हा को तो विभाग नहीं छोड़ना पड़ेगा। जनसंवाद से अफसरों को परेशानी क्या है। क्या सही में मंत्री ने उन्हें अपमानित किया। जानेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में…। सवाल-1ः डिप्टी CM और अफसर का पूरा विवाद क्या है? जवाबः डिप्टी CM विजय सिन्हा के पास नई सरकार में राजस्व व भूमि सुधार विभाग का प्रभार है। वह जब से मंत्रालय संभाल रहे हैं जिलों में जनसंवाद कर रहे हैं। इसमें अफसरों के सामने लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं और समाधान का निर्देश देते हैं। जनसंवाद में मंत्री की भाषा को आधार बनाकर अफसर अपना विरोध जता रहे हैं। 27 दिसंबर को राजस्व अधिकारियों के संघ बिहार राजस्व सेवा संघ (बिरसा) ने CM नीतीश कुमार को पत्र लिखकर मंत्री सिन्हा की शैली का कड़ा विरोध किया है। साथ ही मिलने का समय मांगा है। बिरसा ने भूमि सुधार नहीं होने का ठीकरा सरकार पर फोड़ते हुए कहा कि भूमि सुधार समस्या कोई नई नहीं है। राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में सफल नहीं हुआ है। पर डिप्टी CM सार्वजनिक मंचों पर राजस्व अधिकारियों के खिलाफ अमर्यादित बयानबाजी, ऑन द स्पॉट” दंडात्मक टिप्पणी कर गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं। वहीं, विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि दबाव में हम कोई काम नहीं करते। हम अराजकता का माहौल स्वीकार नहीं करेंगे। सेवा का अवसर मिला है। जितने दिन विभाग में हूं, जनता के लिए काम करता रहूंगा। सवाल-2ः राजस्व अधिकारियों को क्या डिप्टी CM बेवजह टारगेट कर रहे हैं? जवाबः भास्कर पोल में 46% लोगों ने बताया कि डिप्टी CM ठीक कर रहे हैं। वहीं, 19% लोगों ने कहा-लापरवाह अफसरों के चक्कर में अच्छे लोग टारगेट हो रहे हैं। सिर्फ 35% लोगों ने ही माना कि विजय सिन्हा की भाषा गलत है। मंत्री की सख्ती जरूरी क्यों…इसे ऐसे समझिए भ्रष्टाचारः बिहार के सबसे भ्रष्ट विभागों में से एक यहां जमीन मापी, दाखिल-खारिज, जमाबंदी में सुधार और रसीद जारी करने जैसे काम बिना घूस दिए नहीं होते हैं। कामः म्यूटेशन अटकाने में माहिर जमीन मालिकों की सबसे बड़ी समस्या म्यूटेशन मतलब जमाबंदी है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की जांच में खुलासा हुआ है कि सरकार की लगातार कोशिशों, दबिश और हड़काने के बावजूद लखीसराय, भागलपुर, भोजपुर, मधेपुरा, मुंगेर, सहरसा, पटना, रोहतास, अररिया और वैशाली का राजस्व प्रशासन म्यूटेशन मामलों को उलझाने में दूसरे जिलों से आगे हैं। सवाल-3ः डिप्टी CM के जनसंवाद से लोगों को घाटा है या फायदा? जवाबः जनसंवाद से लोगों को काफी फायदा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त-सितंबर में चलाए गए राजस्व महा अभियान के दौरान 46 लाख से अधिक आवेदन मिले। इसमें से 40 लाख से ज्यादा आवेदन बंटवारा एवं उत्तराधिकार नामांतरण से जुड़ा है। नई व्यवस्थाः एक ही आवेदन पर पूरे परिवार की जमीन का म्यूटेशन जनसंवाद का ही नतीजा है कि सरकार ने लोगों की सहूलियत के लिए 27 दिसंबर को एक नई व्यवस्था लागू की। अब बिहार भूमि पोर्टल पर एक ही आवेदन से परिवार के सभी हिस्सेदारों के नाम उनके हिस्से की जमीन की जमाबंदी कायम होगी, दाखिल-खारिज भी होगा। सवाल-4ः सुधाकर सिंह की तरह CM नीतीश कुमार क्या विजय सिन्हा को बदल देंगे? जवाबः संभावना कम है, लेकिन नकारा नहीं जा सकता। सुधाकर सिंह वाली स्थिति विजय सिन्हा के साथ नहीं है। नहीं बदलने के 2 बड़े कारण… 1. भाजपा विजय सिन्हा के साथः अफसरों के संगठन के विरोध जताने के बाद भाजपा विजय सिन्हा के पक्ष में आ गई है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विनोद कुमार शर्मा ने कहा, ‘बिहार में कामचोरी और हरामखोरी की प्रवृत्ति को जड़ जमाने नहीं दिया जाएगा। सीओ को जनता को लूटने की छूट नहीं दी जा सकती।’ पॉलिटिकल एनालिस्ट प्रियदर्शी रंजन कहते हैं, ‘पार्टी के साथ आने पर विजय सिन्हा का हटाना मुश्किल होगा। सुधाकर सिंह को जब हटाया गया था तब उनकी पार्टी RJD उस हालत में नहीं थी कि बचाव कर सके। पार्टी ने सुधाकर सिंह से किनारा कर लिया था। विजय सिन्हा के साथ ऐसा नहीं है।’ 2. नीतीश उतने ताकतवर नहींः पॉलिटिकल एनालिस्ट प्रवीण बागी कहते हैं, ‘नीतीश कुमार अधिकारियों की खूब सुनते हैं। उन्होंने अफसरों का राज्य में मन बढ़ाकर रखा है। पहले वह अफसरों के लिए मंत्री बदलते रहे हैं, लेकिन अब हालात ऐसे नहीं हैं कि वह जो चाहेंगे वही कर सकते हैं।’ प्रवीण बागी कहते हैं, ‘हालात बदल गए हैं। भाजपा पहले से ज्यादा मजबूत है। गृह मंत्रालाय नीतीश कुमार के पास से जा चुका है। विजय सिन्हा को PM मोदी का करीबी माना जाता है। उन पर कार्रवाई करने के लिए पहले नीतीश कुमार को भाजपा को मैनेज करना होगा।’ प्रवीण बागी कहते हैं, ‘जब तक भाजपा नहीं चाहेगी, मुख्यमंत्री कुछ नहीं कर पाएंगे। विजय सिन्हा ने अपने काम के जरिए लोगों में भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ एक माहौल बनाने का प्रयास किया है। लोगों का सेंटिमेंट उनसे जुड़ रहा है। उनको हटाने का मतलब होगा कि सरकार अपनी सख्त छवि से पीछे हट रही है।’ सुधाकर सिंह प्रकरण क्या है… डिप्टी CM विजय सिन्हा के जनसंवाद पर राजस्व व भूमि सुधार विभाग के अफसर भड़क गए हैं। अफसरों का कहना है कि जनसंवाद में मंत्री हमारा सार्वजनिक अपमान कर रहे हैं। वहीं, मंत्री का कहना है कि ऐसा कुछ नहीं है। जो काम नहीं करेगा, उस पर कार्रवाई तो होगी ही। तनातनी इतनी बढ़ गई है कि अफसरों ने जनसंवाद के सार्वजनिक बहिष्कार की चेतावनी दे दी है। ऐसे में बिहार के सियासी गलियारे में चर्चा शुरू हो गई है कि या सिन्हा जी की कुर्सी बदली जाएगी या विभाग सुधर जाएगा। विजय सिन्हा को तो विभाग नहीं छोड़ना पड़ेगा। जनसंवाद से अफसरों को परेशानी क्या है। क्या सही में मंत्री ने उन्हें अपमानित किया। जानेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में…। सवाल-1ः डिप्टी CM और अफसर का पूरा विवाद क्या है? जवाबः डिप्टी CM विजय सिन्हा के पास नई सरकार में राजस्व व भूमि सुधार विभाग का प्रभार है। वह जब से मंत्रालय संभाल रहे हैं जिलों में जनसंवाद कर रहे हैं। इसमें अफसरों के सामने लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं और समाधान का निर्देश देते हैं। जनसंवाद में मंत्री की भाषा को आधार बनाकर अफसर अपना विरोध जता रहे हैं। 27 दिसंबर को राजस्व अधिकारियों के संघ बिहार राजस्व सेवा संघ (बिरसा) ने CM नीतीश कुमार को पत्र लिखकर मंत्री सिन्हा की शैली का कड़ा विरोध किया है। साथ ही मिलने का समय मांगा है। बिरसा ने भूमि सुधार नहीं होने का ठीकरा सरकार पर फोड़ते हुए कहा कि भूमि सुधार समस्या कोई नई नहीं है। राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में सफल नहीं हुआ है। पर डिप्टी CM सार्वजनिक मंचों पर राजस्व अधिकारियों के खिलाफ अमर्यादित बयानबाजी, ऑन द स्पॉट” दंडात्मक टिप्पणी कर गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं। वहीं, विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि दबाव में हम कोई काम नहीं करते। हम अराजकता का माहौल स्वीकार नहीं करेंगे। सेवा का अवसर मिला है। जितने दिन विभाग में हूं, जनता के लिए काम करता रहूंगा। सवाल-2ः राजस्व अधिकारियों को क्या डिप्टी CM बेवजह टारगेट कर रहे हैं? जवाबः भास्कर पोल में 46% लोगों ने बताया कि डिप्टी CM ठीक कर रहे हैं। वहीं, 19% लोगों ने कहा-लापरवाह अफसरों के चक्कर में अच्छे लोग टारगेट हो रहे हैं। सिर्फ 35% लोगों ने ही माना कि विजय सिन्हा की भाषा गलत है। मंत्री की सख्ती जरूरी क्यों…इसे ऐसे समझिए भ्रष्टाचारः बिहार के सबसे भ्रष्ट विभागों में से एक यहां जमीन मापी, दाखिल-खारिज, जमाबंदी में सुधार और रसीद जारी करने जैसे काम बिना घूस दिए नहीं होते हैं। कामः म्यूटेशन अटकाने में माहिर जमीन मालिकों की सबसे बड़ी समस्या म्यूटेशन मतलब जमाबंदी है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की जांच में खुलासा हुआ है कि सरकार की लगातार कोशिशों, दबिश और हड़काने के बावजूद लखीसराय, भागलपुर, भोजपुर, मधेपुरा, मुंगेर, सहरसा, पटना, रोहतास, अररिया और वैशाली का राजस्व प्रशासन म्यूटेशन मामलों को उलझाने में दूसरे जिलों से आगे हैं। सवाल-3ः डिप्टी CM के जनसंवाद से लोगों को घाटा है या फायदा? जवाबः जनसंवाद से लोगों को काफी फायदा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त-सितंबर में चलाए गए राजस्व महा अभियान के दौरान 46 लाख से अधिक आवेदन मिले। इसमें से 40 लाख से ज्यादा आवेदन बंटवारा एवं उत्तराधिकार नामांतरण से जुड़ा है। नई व्यवस्थाः एक ही आवेदन पर पूरे परिवार की जमीन का म्यूटेशन जनसंवाद का ही नतीजा है कि सरकार ने लोगों की सहूलियत के लिए 27 दिसंबर को एक नई व्यवस्था लागू की। अब बिहार भूमि पोर्टल पर एक ही आवेदन से परिवार के सभी हिस्सेदारों के नाम उनके हिस्से की जमीन की जमाबंदी कायम होगी, दाखिल-खारिज भी होगा। सवाल-4ः सुधाकर सिंह की तरह CM नीतीश कुमार क्या विजय सिन्हा को बदल देंगे? जवाबः संभावना कम है, लेकिन नकारा नहीं जा सकता। सुधाकर सिंह वाली स्थिति विजय सिन्हा के साथ नहीं है। नहीं बदलने के 2 बड़े कारण… 1. भाजपा विजय सिन्हा के साथः अफसरों के संगठन के विरोध जताने के बाद भाजपा विजय सिन्हा के पक्ष में आ गई है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विनोद कुमार शर्मा ने कहा, ‘बिहार में कामचोरी और हरामखोरी की प्रवृत्ति को जड़ जमाने नहीं दिया जाएगा। सीओ को जनता को लूटने की छूट नहीं दी जा सकती।’ पॉलिटिकल एनालिस्ट प्रियदर्शी रंजन कहते हैं, ‘पार्टी के साथ आने पर विजय सिन्हा का हटाना मुश्किल होगा। सुधाकर सिंह को जब हटाया गया था तब उनकी पार्टी RJD उस हालत में नहीं थी कि बचाव कर सके। पार्टी ने सुधाकर सिंह से किनारा कर लिया था। विजय सिन्हा के साथ ऐसा नहीं है।’ 2. नीतीश उतने ताकतवर नहींः पॉलिटिकल एनालिस्ट प्रवीण बागी कहते हैं, ‘नीतीश कुमार अधिकारियों की खूब सुनते हैं। उन्होंने अफसरों का राज्य में मन बढ़ाकर रखा है। पहले वह अफसरों के लिए मंत्री बदलते रहे हैं, लेकिन अब हालात ऐसे नहीं हैं कि वह जो चाहेंगे वही कर सकते हैं।’ प्रवीण बागी कहते हैं, ‘हालात बदल गए हैं। भाजपा पहले से ज्यादा मजबूत है। गृह मंत्रालाय नीतीश कुमार के पास से जा चुका है। विजय सिन्हा को PM मोदी का करीबी माना जाता है। उन पर कार्रवाई करने के लिए पहले नीतीश कुमार को भाजपा को मैनेज करना होगा।’ प्रवीण बागी कहते हैं, ‘जब तक भाजपा नहीं चाहेगी, मुख्यमंत्री कुछ नहीं कर पाएंगे। विजय सिन्हा ने अपने काम के जरिए लोगों में भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ एक माहौल बनाने का प्रयास किया है। लोगों का सेंटिमेंट उनसे जुड़ रहा है। उनको हटाने का मतलब होगा कि सरकार अपनी सख्त छवि से पीछे हट रही है।’ सुधाकर सिंह प्रकरण क्या है…


