मध्य पूर्व में जारी तनाव का असर अब सीधे वैश्विक तेल बाजार पर दिखाई देने लगा है। सप्ताह के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़त दर्ज की गई और गुरुवार को भी इसमें तेजी बनी रही। मौजूद जानकारी के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर करीब 83.28 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी मानक वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) लगभग 76.82 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखा।
गौरतलब है कि पूरे सप्ताह में ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों बेंचमार्क में करीब 15 प्रतिशत के आसपास की बढ़त दर्ज की गई। विश्लेषकों के मुताबिक यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से मध्य पूर्व में जारी सैन्य संघर्ष और संभावित आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण देखी जा रही है। तेल बाजार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों की नजर फिलहाल क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और तेल सप्लाई रूट्स पर टिकी हुई है।
बता दें कि हालिया संघर्ष की शुरुआत उस समय हुई जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के खिलाफ समन्वित सैन्य कार्रवाई शुरू की। इसके बाद क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता गया। मौजूद जानकारी के अनुसार हाल ही में अमेरिकी नौसेना ने श्रीलंका के पास अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में एक ईरानी युद्धपोत को निशाना बनाया, जिससे यह संकेत मिला कि संघर्ष का दायरा पहले से ज्यादा व्यापक हो सकता है।
इसी बीच अमेरिकी संसद में भी इस मुद्दे को लेकर बहस देखने को मिली। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी सीनेट ने एक प्रस्ताव को खारिज कर दिया जिसमें हवाई हमलों को रोकने और सैन्य कार्रवाई को कांग्रेस की मंजूरी से जोड़ने की मांग की गई थी। इस फैसले के बाद यह साफ संकेत मिला कि फिलहाल अमेरिका अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव के मूड में नहीं दिख रहा।
दूसरी तरफ ईरान ने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें दावा किया गया था कि तेहरान ने संघर्ष खत्म करने के लिए अमेरिका से बातचीत की पहल की है। ईरानी अधिकारियों ने इन रिपोर्ट्स को गलत बताते हुए पश्चिमी मीडिया पर भ्रामक खबरें फैलाने का आरोप लगाया है। ऐसे में कूटनीतिक समाधान की उम्मीद फिलहाल कमजोर पड़ती नजर आ रही है।
तेल बाजार में सबसे बड़ी चिंता फारस की खाड़ी में स्थित होर्मुज़ को लेकर सामने आई है। गौरतलब है कि यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन रास्तों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। मौजूद जानकारी के अनुसार ईरान ने इस मार्ग को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है।
इसका असर क्षेत्रीय तेल उत्पादकों पर भी पड़ने लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इराक ने कुछ कच्चे तेल के निर्यात पर ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित कर दिया है क्योंकि होर्मुज़ से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। बता दें कि इराक संगठन पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन यानी ओपेक का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।
मौजूद जानकारी के अनुसार निर्यात मार्ग बाधित होने और भंडारण क्षमता सीमित होने के कारण इराक को रोजाना करीब 15 लाख बैरल तेल उत्पादन कम करना पड़ा है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि होर्मुज़ पूरी तरह और लंबे समय तक बंद रहता है तो वैश्विक तेल बाजार में बड़ा उछाल आ सकता है।
कुछ अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि आपूर्ति में गंभीर व्यवधान पैदा होता है तो ब्रेंट क्रूड की कीमत 140 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि पूरी तरह से लंबे समय तक रास्ता बंद रहना मुश्किल है क्योंकि इससे वैश्विक स्तर पर तेज सैन्य और कूटनीतिक प्रतिक्रिया हो सकती है।
इस बीच अमेरिका से आने वाले भंडार के आंकड़ों ने भी बाजार का ध्यान खींचा है। अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान की साप्ताहिक रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी के अंत तक समाप्त सप्ताह में अमेरिका के कच्चे तेल के भंडार में करीब 5.6 मिलियन बैरल की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह बाजार के अनुमान से काफी ज्यादा है क्योंकि विश्लेषक लगभग 2.2 मिलियन बैरल बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे थे।


