Energy Crisis due to US, Israel, Iran War: ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद दुनिया को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में एशियाई कई देश इस मुश्किल स्थिति से निपटने के लिए कोयले की ओर रुख कर रहे हैं। दरअसल, ईरान युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की आपूर्ति बाधित हुई है, वहीं कतर ने लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का उत्पादन बंद कर दिया है। ध्यान रहे कि कतर वैश्विक बाजार में लगभग 20 प्रतिशत लिक्विफाइड नेचुरल गैस की आपूर्ति करता है।
एशिया में 80% ईंधन निर्यात करता है कतर
कतर एशियाई देशों को 80 प्रतिशत ईंधन निर्यात करता है, जिनमें जापान, सिंगापुर, पाकिस्तान, बांग्लादेश और ताइवान शामिल हैं। लेकिन पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों के कारण कई देश आपूर्ति की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी का सामना कर रहे हैं, जिसके चलते कंपनियां कोयला आधारित संयंत्रों की ओर रुख कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में इसी तरह की परिस्थितियां बनी रहती हैं तो संकट आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। ध्यान रहे कि कोयले की तुलना में LNG से कम प्रदूषण होता है।
एशियाई देशों में ऊर्जा आपूर्ति पर असर
ईरान युद्ध के कारण बांग्लादेश में बिजली कंपनियों का बोझ बढ़ गया है। ताइवान कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को फिर से चालू करने की तैयारी कर रहा है। दक्षिण कोरिया भी LNG आपूर्ति पर असर के चलते परमाणु और कोयला आधारित संयंत्रों को बढ़ावा देना शुरू कर चुका है।
पाकिस्तान पर संकट का प्रभाव
पश्चिम एशिया के संकट ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को गंभीर झटका दिया है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान ने 23 मार्च को गणतंत्र दिवस के अवसर पर निर्धारित सैन्य परेड और सभी औपचारिक समारोह रद्द कर दिए। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ के कार्यालय ने इसकी घोषणा की। इसके अलावा रमजान में पाकिस्तान सरकार ने केरोसिन और लाइट डीजल ऑयल (LDO) की कीमतें बढ़ा दी हैं, जिसका सबसे अधिक प्रभाव मध्यवर्गीय परिवारों पर पड़ा है।
भारत पर संभावित असर
ईरान युद्ध के चलते भारत भी ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। यदि कतर में गैस उत्पादन लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा। ऐसे में भारत को अन्य स्रोतों से महंगी गैस खरीदनी पड़ सकती है, जिससे घरेलू रसोई गैस (LPG) की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के कारण भारत के कुछ गैस टैंकर समुद्र में फंसे हुए हैं, जिससे सप्लाई पर दबाव और बढ़ गया है। पश्चिम एशिया का संकट भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है।


