अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर शहर में ‘भारतीय भाषा पर्व’ का भव्य आयोजन हुआ। डॉक्टर हेडगेवार स्मारक समिति एवं भारतीय भाषा संवर्धन समिति के संयुक्त तत्वावधान में नूतन स्कूल (चिमन बाग) के फुटबॉल ग्राउंड पर आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न भाषाई समाजों ने अपनी संस्कृति, साहित्य और पारंपरिक व्यंजनों के माध्यम से भारत की विविधता में एकता का जीवंत संदेश दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि पी. नरहरि, प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक एकता उसकी भाषाई विविधता में निहित है। उन्होंने कहा कि बच्चों के बौद्धिक और मानसिक विकास के लिए मातृभाषा में शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने श्री कृष्ण देव राय का उदाहरण देते हुए भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन को राष्ट्र निर्माण से जोड़ा। विशिष्ट अतिथि सेवानिवृत्त मेजर जनरल सरबजीत सिंह ने कहा कि मातृभाषा हमें परिवार से विरासत में मिलती है और यह हमारी पहचान का आधार है। सेना केवल देश की सीमाओं की रक्षा नहीं करती, बल्कि संस्कृति और मूल्यों की भी सुरक्षा करती है। उन्होंने युवाओं से अपनी ऊर्जा को राष्ट्रहित में लगाने का आह्वान किया। मुख्य वक्ता क्षेत्र संपर्क प्रमुख प्रवीण गुप्त ने भाषा के प्रति घटती संवेदनशीलता पर चिंता जताई। उन्होंने दैनिक जीवन में मातृभाषा के अधिकाधिक उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भावनाओं की अभिव्यक्ति है। हस्ताक्षर भी अपनी मातृभाषा में करने की अपील की गई। कार्यक्रम संयोजक रवींद्र देशपांडे के अनुसार, इस पर्व में संस्कृत, निमाड़ी, मालवी, भीली, मैथिली, भोजपुरी, मलयालम, तेलुगु, कन्नड़, तमिल, मराठी, पंजाबी, मारवाड़ी, सिंधी, गुजराती, नेपाली और गढ़वाली सहित अनेक भाषाई समाजों ने सहभागिता की। विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां, पारंपरिक व्यंजनों और साहित्य के स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम के अंत में समिति के उपाध्यक्ष रुपेश पाल ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। आयोजन ने मातृभाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए समाज को एकजुट होने का संदेश दिया।


