मेरठ पुलिस ने नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह भोले-भाले और बेरोजगार युवकों को सरकारी व निजी कंपनियों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये ऐंठ चुका था। सदर बाजार थाना पुलिस और स्वाट टीम प्रथम की संयुक्त कार्रवाई में इन आरोपियों को पकड़ा गया। पुलिस ने इनके कब्जे से फर्जी दस्तावेज, मोबाइल फोन सहित कई अहम सबूत बरामद किए हैं। गिरफ्तार आरोपी पहले युवाओं से संपर्क करते थे और उन्हें रेलवे, बैंक व अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाते थे। इसके बाद वे रजिस्ट्रेशन, मेडिकल और ट्रेनिंग फीस के नाम पर उनसे मोटी रकम वसूलते थे। कुछ समय बाद फर्जी नियुक्ति पत्र देकर पीड़ितों को गुमराह कर दिया जाता था। जब पीड़ित युवक नौकरी के बारे में पूछताछ करते तो आरोपी अपना मोबाइल नंबर बदलकर फरार हो जाते थे। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों में विजेंद्र शर्मा (पुत्र महावीर सिंह, निवासी कसाना, थाना रोहतक, जिला रोहतक, हरियाणा), हरप्रीत उर्फ करण (पुत्र स्वर्गीय सरदार भूपेंद्र सिंह, निवासी बादल कॉलोनी, थाना जोधपुर, जिला महोली, पंजाब), रोहित उर्फ भूरे सिंह (पुत्र सुभाष चंद्र सिंह, निवासी अकबरपुर, थाना सिसमौली, जिला हापुड़) और निरंजन सिंह (पुत्र रतन, निवासी ग्राम राजपुर, थाना किठौर, मेरठ) शामिल हैं। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह अलग-अलग राज्यों के बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाता था। आरोपी सोशल मीडिया और मोबाइल कॉल के जरिए युवाओं को फंसाते थे और सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर उनसे मोटी रकम ठग लेते थे। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने एक प्रेस वार्ता में बताया कि गैंग के बाकी आरोपियों की तलाश की जा रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि आरोपियों के खिलाफ थाना सदर बाजार में धोखाधड़ी और जालसाजी समेत गंभीर धाराओं में तीन मुकदमे दर्ज किए गए हैं। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जा रहा है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।


