मीरापुर विधायक होर्डिंग पर फोटो न होने से हुईं नाराज:मंच पर जाने से किया इनकार, कैबिनेट मंत्री ने हाथ पकड़कर बैठाया

मुजफ्फरनगर में मीरापुर विधानसभा क्षेत्र की मोरना सहकारी शुगर मिल की पेराई क्षमता बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश शासन से 261.91 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है। बिजनौर से रालोद सांसद चंदन सिंह चौहान ने इसकी घोषणा की। इस अवसर पर मोरना सहकारी शुगर मिल में सांसद चंदन चौहान ने रालोद के कैबिनेट मंत्री और अन्य नेताओं के साथ एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया। इस प्रेस वार्ता में मीरापुर विधानसभा उपचुनाव में विजयी रहीं रालोद विधायक मिथिलेश पाल भी पहुंचीं। हालांकि, होर्डिंग-बैनर पर अपनी तस्वीर न होने के कारण वह नाराज हो गईं। उन्होंने सांसद चंदन चौहान के बुलाने पर भी मंच पर जाने से साफ इनकार कर दिया। विधायक मिथिलेश पाल ने रालोद नेताओं के साथ चौधरी चरण सिंह और चंदन चौहान के दादा-पिता की तस्वीरों पर माल्यार्पण भी नहीं किया। बाद में, पूर्व कैबिनेट मंत्री योगराज सिंह के निवेदन पर उन्होंने अकेले ही इन चित्रों पर माल्यार्पण किया। स्थिति को संभालने के लिए कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार मंच से नीचे उतरे और विधायक मिथिलेश पाल का हाथ पकड़कर उन्हें मंच पर ले गए। उन्होंने विधायक को अपने साथ जबरदस्ती बैठाया। जब मंत्री उन्हें बुलाने आए, तो उनके समर्थकों ने कहा था कि “विधायक जी आप यहीं बैठे रहो, वहां मत जाओ जब उन्होंने फोटो नहीं लगाया है। प्रेस वार्ता शुरू होने से पहले ही रालोद के जिलाध्यक्ष संदीप मलिक ने आसपास लगे कुछ होर्डिंग उतरवाए थे, जिनमें मिथिलेश पाल की तस्वीर नहीं थी। इसके बावजूद, जब सांसद चंदन सिंह चौहान की तस्वीर वाला बैनर मंच पर लगाया जा रहा था, तो उसे रोकने का प्रयास किया गया। हालांकि, चंदन चौहान के कार्यकर्ताओं ने बैनर मंच पर लगा दिया। इस घटना से मीरापुर विधायक और रालोद के नेताओं का एक दल असंतुष्ट रहा। “क्रेडिट” के लिए “पोस्टर वार” इतना ही नहीं, जब सरकार द्वारा मोरना सहकारी शुगर मिल की परेई क्षमता बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश शासन से 261.91 करोड़ रुपये की ऐतिहासिक मंजूरी दी गई तो सांसद चंदन सिंह चौहान और विधायक मिथलेश पाल के बीच क्रेडिट लेने की होड़ मच गई। दोनों की तरफ से पोस्टर–बैनर बनवाकर सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित कराए गए। सांसद चंदन सिंह चौहान इसे अपनी और विधायक मिथलेश पाल अपनी उपलब्धि दर्शाने में जुट गए। शायद ये ही वजह रही कि दिलों की तकरार मंच पर देखने को मिल गई। सांसद-विधायक में समन्वय की कमी साफ यह घटना साफ दर्शाती है कि सांसद चंदन चौहान और विधायक मिथिलेश पाल के बीच समन्वय नहीं है। चंदन चौहान मीरापुर से विधायक थे और विधायक रहते ही बिजनौर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत गए। इसके बाद सीट खाली हुई। कयास लगाए जा रहे थे कि मीरापुर से चंदन की पत्नी यशिका सिंह चौहान को टिकट मिलेगा, लेकिन बहुत कम समय में टिकट बदलकर मिथिलेश पाल को दिया गया और वह जीत गईं। उसके बाद से दोनों नेताओं के बीच आपसी तालमेल नहीं बन पाया है, जो आज सबके सामने आ गया है।

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