प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई कोटे की एमडी-एमएस की 82 फीसदी सीटें ओपन कोटे से आवंटित की गई हैं। यानी ये छात्र दूसरे राज्यों के हैं। प्रदेश के तीन निजी मेडिकल कॉलेजों में पीजी की 39 सीटें हैं। इनमें 33 सीटें ओपन कोटे के लिए हैं। केवल 6 छात्रों का आवंटन इंस्टीट्यूशनल कोटे के तहत किया गया है। पर्याप्त छात्र नहीं मिलने पर एनआरआई की 7 सीटों को स्टेट ओपन कोटे में कन्वर्ट किया गया है। एनआरआई कोटे के लिए कुल 64 छात्रों ने पंजीयन कराया है। पीजी में 108 व यूजी में 113 नीट स्कोर वालों का एडमिशन इस कोटे में हुआ है।
स्ट्रे वेकेंसी राउंड के लिए मेरिट सूची जारी
चिकित्सा शिक्षा विभाग ने सोमवार को स्ट्रे वेकेंसी राउंड के लिए मेरिट सूची जारी कर दी है। कुल 105 खाली सीटों के लिए 202 छात्र प्रवेश के लिए पात्र है। दूसरी ओर एनआरआई स्पांसर्ड कोटे में प्रवेश का लाभ दूसरे प्रदेश के छात्रों को ज्यादा मिल रहा है। तीन साल के कोर्स की फीस 2.70 लाख डॉलर यानी 2.45 करोड़ रुपए है। इतनी भारी-भरकम फीस चुकाना हर पैरेंट्स के बूते नहीं है। यही कारण है कि इनमें ज्यादातर डॉक्टर, बिजनेसमैन या बड़े अधिकारियों के बच्चे या परिचित एडमिशन ले रहे हैं। स्पांसर्ड कोटे का मतलब ये होता है कि इसमें खून की दो पीढ़ी के रिश्तेदारों को प्रवेश दिया जा सकता है। इसलिए यहां इस कोटे से प्रवेश में बड़ा खेल चल रहा है। जानकारों के अनुसार वास्तविक एनआरआई गिनती के होते हैं। नियमों के फेर में कोई भी एनआरआई बन जाता है और मोटी फीस देकर डॉक्टर बनने में भी कामयाब हो जाता है। ये प्रवेश काउंसलिंग के अनुसार होता है, लेकिन दलालों का दावा है कि उनके संपर्क के बिना एडमिशन नहीं हो सकता। हालांकि चिकित्सा शिक्षा विभाग व काउंसलिंग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि दलाल केवल भ्रम में डाल रहे हैं।
एमबीबीएस की फीस 1.38 करोड़, सवा करोड़ में प्रवेश
एमबीबीएस के साढ़े चार साल कोर्स की फीस 1.38 करोड़ रुपए है। पिछले 5 साल में प्रवेश लेने वालों में 70 फीसदी से ज्यादा छात्र दूसरे राज्यों के रहे हैं। प्रदेश में एनआरआई कोटे की 130 से ज्यादा सीटें हैं। निजी मेडिकल कॉलेजों में यूजी व पीजी में 15 फीसदी कोटा एनआरआई के लिए आरक्षित है। पिछले 4 साल से इस कोटे की सालाना फीस 35 हजार यूएस डॉलर है। डॉलर की ऊंची छलांग के कारण एनआरआई कोटे से एमबीबीएस करने वाले छात्रों को 21 लाख ज्यादा फीस देनी पड़ रही है। डॉलर के मुकाबले रुपए के लगातार टूटने के कारण ऐसा हुआ है। हालांकि कॉलेजों में अचानक सीटें बढ़ने से छात्रों का टोटा हो गया था, इसलिए 26 सीटों को मैनेजमेंट कोटे में कन्वर्ट कर एडमिशन दिया गया।
स्पांसर्ड एनआरआई के कारण दूर के रिश्तेदार भी प्रवेश का पात्र
प्रदेश में एनआरआई कोटे के लिए क्राइटेरिया में पहले ही बदलाव किया गया है। पहले केवल माता-पिता के विदेश में रहने पर उनके बेटे व बेटी एनआरआई कोटे के लिए पात्र था। अब नाना-नानी, चाचा-चाची, ताऊ, मामा-मामी या दूसरे रिश्तेदारों के विदेश में होने पर एनआरआई कोटे के लिए पात्र है। एमबीबीएस प्रवेश नियम में दो पीढ़ी पहले तक माता-पिता पक्ष से रक्त संबंध की पुष्टि करने वाला प्रवेश के लिए पात्र है। जैसे माता, पिता, भाई, बहन, भाई-बहन की संतान, चाचा, चाचा की संतान, मामा, मामा की संतान, मौसी, मौसी की संतान, बुआ, बुआ की संतान, नाना-नानी, दादा-दादी आदि शामिल है। इसके लिए वंशावली प्रमाणपत्र जरूरी है, जो तहसीलदार या उच्च अधिकारी द्वारा जारी किया जाता है।


