पटना के बाढ़ में खसरे की पुष्टि, एम्स रिपोर्ट पॉजिटिव:9 माह से 5 साल के बच्चों को लगेगा MMR टीका, 12 बच्चों में दिखे थे लक्षण

पटना के बाढ़ में खसरे की पुष्टि, एम्स रिपोर्ट पॉजिटिव:9 माह से 5 साल के बच्चों को लगेगा MMR टीका, 12 बच्चों में दिखे थे लक्षण

पटना के बाढ़ अनुमंडल के दो टोलों में खसरे (मीजल्स) के संदिग्ध मामलों की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) से प्राप्त सैंपल रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी किया है। जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में विशेष टीकाकरण और निगरानी अभियान चलाने का फैसला लिया है। 9 माह से 5 वर्ष के सभी बच्चों को लगाया जाएगा एमएमआर टीका जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. अवधेश कुमार ने बताया कि, एहतियात के तौर पर संबंधित टोलों के 9 माह से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को एमएमआर (मीजल्स, मम्प्स, रूबेला) टीका लगाया जाएगा। इसमें वे बच्चे भी शामिल होंगे जिन्होंने नियमित टीकाकरण के तहत पहले खुराक ले रखी है। विभाग का लक्ष्य संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ना और हर्ड इम्युनिटी को मजबूत करना है। रैपिड रिस्पॉन्स टीम को किया गया एक्टिव पुष्टि के बाद रैपिड रिस्पॉन्स टीम (RRT) को सक्रिय कर दिया गया है। स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर नए संदिग्ध मरीजों की पहचान कर रहे हैं। आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को छूटे हुए बच्चों की सूची बनाने, टीकाकरण की स्थिति जांचने और आवश्यकतानुसार विटामिन-ए की खुराक देने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी स्क्रीनिंग अभियान चलाया जाएगा ताकि लक्षणों की पहचान होने पर तत्काल कार्रवाई हो सके। अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है खसरा स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, खसरा एक अत्यधिक संक्रामक वायरल रोग है, जो हवा के माध्यम से तेजी से फैलता है। एक भी पॉजिटिव मामला व्यापक संक्रमण का संकेत हो सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रभावित इलाकों में माइक्रो-कंटेनमेंट रणनीति लागू की गई है। अगले 28 दिनों तक विशेष निगरानी रखी जाएगी और बुखार या दाने जैसे लक्षण मिलने पर तुरंत सैंपलिंग की जाएगी। बच्चों में इन लक्षणों के दिखते ही पहुंचे अस्पताल डॉ. कुमार ने अभिभावकों से अपील की है कि यदि बच्चों में तेज बुखार, शरीर पर लाल चकत्ते, खांसी, जुकाम या आंखों में लाली जैसे लक्षण दिखें तो तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एमएमआर टीका पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी है, और यह राष्ट्रीय प्रतिरक्षण कार्यक्रम के तहत मुफ्त उपलब्ध है। पटना के बाढ़ अनुमंडल के दो टोलों में खसरे (मीजल्स) के संदिग्ध मामलों की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) से प्राप्त सैंपल रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी किया है। जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में विशेष टीकाकरण और निगरानी अभियान चलाने का फैसला लिया है। 9 माह से 5 वर्ष के सभी बच्चों को लगाया जाएगा एमएमआर टीका जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. अवधेश कुमार ने बताया कि, एहतियात के तौर पर संबंधित टोलों के 9 माह से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को एमएमआर (मीजल्स, मम्प्स, रूबेला) टीका लगाया जाएगा। इसमें वे बच्चे भी शामिल होंगे जिन्होंने नियमित टीकाकरण के तहत पहले खुराक ले रखी है। विभाग का लक्ष्य संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ना और हर्ड इम्युनिटी को मजबूत करना है। रैपिड रिस्पॉन्स टीम को किया गया एक्टिव पुष्टि के बाद रैपिड रिस्पॉन्स टीम (RRT) को सक्रिय कर दिया गया है। स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर नए संदिग्ध मरीजों की पहचान कर रहे हैं। आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को छूटे हुए बच्चों की सूची बनाने, टीकाकरण की स्थिति जांचने और आवश्यकतानुसार विटामिन-ए की खुराक देने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी स्क्रीनिंग अभियान चलाया जाएगा ताकि लक्षणों की पहचान होने पर तत्काल कार्रवाई हो सके। अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है खसरा स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, खसरा एक अत्यधिक संक्रामक वायरल रोग है, जो हवा के माध्यम से तेजी से फैलता है। एक भी पॉजिटिव मामला व्यापक संक्रमण का संकेत हो सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रभावित इलाकों में माइक्रो-कंटेनमेंट रणनीति लागू की गई है। अगले 28 दिनों तक विशेष निगरानी रखी जाएगी और बुखार या दाने जैसे लक्षण मिलने पर तुरंत सैंपलिंग की जाएगी। बच्चों में इन लक्षणों के दिखते ही पहुंचे अस्पताल डॉ. कुमार ने अभिभावकों से अपील की है कि यदि बच्चों में तेज बुखार, शरीर पर लाल चकत्ते, खांसी, जुकाम या आंखों में लाली जैसे लक्षण दिखें तो तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एमएमआर टीका पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी है, और यह राष्ट्रीय प्रतिरक्षण कार्यक्रम के तहत मुफ्त उपलब्ध है।  

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