मुरादाबाद में विकास के बीच में आई मेयर की फैक्ट्री:मंत्री बोले-थोड़ी जमीन दे दोगे तो क्या जाएगा, मेयर की जिद ने प्रोजेक्ट लटकाया

मुरादाबाद में विकास के बीच में आई मेयर की फैक्ट्री:मंत्री बोले-थोड़ी जमीन दे दोगे तो क्या जाएगा, मेयर की जिद ने प्रोजेक्ट लटकाया

मुरादाबाद में विकास का एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट लंबे समय से लटका हुआ है। इसकी वजह है, विकास के बीच में खड़ी BJP मेयर विनोद अग्रवाल के भाई की फैक्ट्री। जहां सर्विस रोड बनाई जानी है, उस जमीन पर मेयर के भाई की फैक्ट्री खड़ी है। पीडब्ल्यूडी का कहना है कि ये जमीन सरकारी है, लेकिन मेयर इसे अपनी फैमिली लैंड बताकर मुआवजे की जिद पर अड़ गए हैं। पूरा मामला शनिवार को हुई प्रभारी मंत्री अनिल चौधरी की समीक्षा बैठक में भी गूंजा। समीक्षा बैठक में सभी जनप्रतिनिधि बुलाए गए थे ताकि शहर के विकास के मुद्दे और जनता की समस्याओं को प्रभारी मंत्री के सामने रख सकें। लेकिन पूरी मीटिंग मेयर के भाई की फैक्ट्री के मुद्दे पर सिमटकर रह गई। मीटिंग में मौजूद जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के मुताबिक, मामला पंडित नंगला बाईपास से जुड़ा है। इस बाईपास पर जहां फ्लाईओवर बन रहा है,वहां सर्विस रोड बनाई जानी है। फ्लाईओवर के साइड की सर्विस रोड जिस जमीन पर बननी है, उसके बीच में मेयर विनोद अग्रवाल के भाई की फैक्ट्री खड़ी है। मेयर जमीन देने के बदले मुआवजा मांग रहे हैं। जबकि बाकी लोगों की जमीन पीडब्ल्यूडी ऐसे ही खाली करा चुका है। पीडब्ल्यूडी का कहना है कि जमीन सरकारी है और इसका मुआवजा देने का सवाल ही नहीं उठता।
ऐसे में मेयर ने अधिकारियों पर तमाम आरोप लगाते हुए मामले को प्रभारी मंत्री की मीटिंग में उठा दिया। मेयर ने कहा कि फ्लाईओवर की ड्राइंग ही गलत है, ड्राइंग फाइनल करते समय मुझसे नहीं पूछा गया। अफसरों ने जवाब दिया कि, उस ड्राइंग पर मेयर के अप्रूवल का क्या मतलब ? लेकिन मेयर किसी की सुनने को तैयार नहीं थे। उन्होंने मंत्री से मामले में दखल देने का अनुरोध किया। कहा- मैंने कई बार संबंधित अफसरों को कॉल किया, लेकिन वो मेरा फोन रिसीव नहीं करते।
इस पर मंत्री ने अधिकारियों से मामला देखने को कहा। साथ ही मेयर की भी चुटकी ली। प्रभारी मंत्री ने कहा- इस शहर ने आपकी फैमिली को 5-5 बार मेयर बनाया है। शहर के विकास के लिए थोड़ी सी जमीन बगैर मुआवजा दे भी देंगे इससे आप पर क्या फर्क पड़ेगा। बहरहाल मामला सियासी हलकों में चर्चा का विषय बना है। भरी मीटिंग में अफसरों पर फोन नहीं उठाने का आरोप लगाने वाले मेयर अब अधिकारियों की नाराजगी को मैनेज करने के जतन में जुटे हैं।

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