Mavath Rainfall Rajasthan : मावठ यानी शीतकालीन वर्षा (Winter Rainfall) को फसलों के लिए अमृत माना गया है। यह रबी की फसलों (गेहूं, चना और सरसों) के लिए बहुत फायदेमंद होती है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि मावठ की बारिश के चलते उत्पादन में 10% से अधिक की वृद्धि हो जाती है। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) से होने वाली यह बारिश मिटटी में नमी बढ़ाने का काम करती है। मिट्टी में नमी की अधिकता होने से फसलों को पाले से सुरक्षा भी मिलती है। यही वजह है कि राजस्थान के किसान मावठ की बारिश को फसलों के लिए सोने की बूंद मानते हैं। मावठ को आमतौर माघ की बारिश भी कहा जाता है।
इसलिए रहता है किसानों को मावठ की बारिश का इंतजार
इस बारे में कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट (Dr. M. L. Jat) ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि शीतकालीन वर्षा जिसे राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मावठे की बारिश भी कहा जाता है। किसानों को मावठे की बारिश (Mawat Ki baarish) का काफी इंतजार रहता है। मावठे की बारिश से मिट्टी में नमी की मात्रा बढ़ जाती है और यह फसलों को पाले से बचाने का काम करती है। जाहिर है कि इसका असर फसलों की उत्पादकता पर भी पड़ता है।
मावठ की वर्षा से किसानों का खर्च कैसे कम हो जाता है?
उन्होंने कहा कि इस सीजन में बारिश से फसलों की गुणवत्ता पर भी काफी सकारात्मक असर पड़ता है। गेहूं और चना के दाने काफी मोटे हो जाते हैं। हालांकि, ओलावृष्टि होने पर यह फसलों को नुकसान भी पहुंचा सकती है। मावठे की बारिश से एक तरफ फसलों के उत्पादन में बढ़ोतरी होती है तो दूसरी ओर किसानों को दिसंबर और जनवरी में फसलों की सिंचाई अलग से नहीं करनी पड़ती है और उनका फसल उत्पादन का खर्च कम हो जाता है।

‘माघ की बारिश फसलों को तृप्त करती है’
मावठ यानी माघ नक्षत्र की बारिश का देश के दूसरे इलाके बिहार, झारखंड और बंगाल के लिए महत्वपूर्ण है। माघ की बारिश के महत्व के बारे में बात करते हुए बिहार में पूर्णिया जिले के खेती-किसानी करने वाले गिरींद्र नाथ झा कहते हैं कि हम किसानों के लिए बारिश अलग-अलग रंग-रूप में आती है। हमारे यहां एक कहावत है- ‘माघा के बरसे, माता के परसे’। इसका मतलब है कि जैसे मां के हाथों से परोसा गया भोजन बच्चों को तृप्त करता है, वैसे ही माघ नक्षत्र की बारिश फसलों और मिट्टी को तृप्त करती है। फसलों की आमद बढ़ जाती है इसलिए किसान इस समय की बारिश से खुश हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि इस समय की बारिश गेहूं के अलावा दलहन और तिलहन फसलों को मूंग, चना, मसूर, मटर, सरसों के लिए काफी फायदेमंद रहता है।

गेहूं, चना, सरसों की फसलों के लिए मावठ की बारिश अमृत
सीईआईसी (CEIC) के आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में 2020-21 में गेहूं का उत्पादन लगभग 11,040 हज़ार टन उत्पादन रिकॉर्ड हुआ। 2021 में गेहूं का उत्पादन पिछले वर्षों के मुकाबले सबसे ज्यादा रहा। राजस्थान कृषि विभाग के अनुसार, 2014-15 में गेहूं का उत्पादन 98.24 लाख टन रहा था। वर्ष 2022-23 में राज्य में गेहूं का उत्पादन 10,100 हज़ार टन हजार रहा। वहीं 2023-24 में राज्य में गेहूं का उत्पादन 10,640 हजार टन रहा, जबकि 2024-25 में इसका अुनमानित उत्पादन 12.2 मिलियन टन हजार टन रहा।
चना और सरसों की फसलें बारिश की बूंदें पाकर झूम उठती हैं
सीईआईसी (CEIC) के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 में चना का उत्पादन 1.810 मिलियन टन, 2022 में 2.680 मिलियन टन जबकि 2023 में 1.810 मिलियन टन रहा। वहीं सरसों का उत्पादन 2021 में 49.5 लाख टन, 2022 में 50 लाख टन, 2023 में 46 लाख टन और 2024 में 52 से 55 लाख टन उत्पादन हुआ।
बारिश से फायदा और बचत दोनों ही होगा
राजस्थान के कई जिलों में 23 जनवरी 2026 को अच्छी बारिश हुई। राजस्थान के दौसा के किसान भगवती प्रसाद शर्मा ने पत्रिका से बताया कि आज हुई बारिश से गेहूं, चना और सरसों की फसलों को फायदा ही फायदा होगा। अनाज के दाने मोटे हो जाएंगे। बिजली, पानी और मजदूरी की बचत होगी। अगर मावठ की बारिश हो जाए तब क्या होता है? इस सवाल के जवाब में वह कहते हैं कि अब बालियों में दाने तैयार हो रहे हैं। अगर ज्यादा बारिश हो जाएगी तो फसलें झुक जाएंगी।
राजस्थान में पिछले 5 वर्षों में कितनी हुई सर्दियों में बारिश
वर्ष 2025 में शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ के साथ मौसम की शुरुआत हुई, जिससे बीकानेर, चूरू और सीकर सहित उत्तरी/पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हुई। इस साल राजस्थान में औसत से कम बारिश दर्ज की गई। राजस्थान में सामान्य तौर पर इस सीजन में औसत बारिश 17.1 मिलीमीटर बारिश होती है। पूरे देश में इस सीजन में 47% कम बारिश दर्ज की गई।
- वर्ष 2024 में सर्दियों का मौसम आमतौर पर शुष्क रही। जनवरी 2024 में सामान्य से 58% कम वर्षा हुई। राजस्थान में इस साल सिर्फ 7.2 मिलीमीटर बारिश ही हुई।
- वर्ष 2023 में शीत ऋतु में वर्षा की काफी कमी रही। 2023 की शीत ऋतु (जनवरी-फरवरी) में सामान्य से 45% कम वर्षा हुई। जनवरी 2023 में औसत से कम वर्षा (14.8 मिमी) दर्ज की गई।
- वर्ष 2022 अपेक्षाकृत अधिक बारिश वाला शीतकाल था, जिसमें सामान्य से 44% अधिक वर्षा दर्ज की गई। जनवरी 2022 में 39.5 मिमी बारिश हुई थी।
- वर्ष 2021 की सर्दियों के मौसम में देश में ही सामान्य से 32% कम वर्षा दर्ज की गई। राजस्थान में भी शीतकाल में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई।
मध्य प्रदेश में भी मावठ की वर्षा से किसानों के चेहरे खिल उठते हैं
मध्य प्रदेश में मावठ की वर्षा का किसानों को इंतजार रहता है। वहां के किसान भी दूसरे राज्यों की तरह इसे फसलों के लिए सोने की बूंद की ही तरह देखते हैं।
| वर्ष | गेहूं उत्पादन (लाख मीट्रिक टन) | टिप्पणी |
|---|---|---|
| 2021–22 | 230–240 | सामान्य उत्पादन स्तर |
| 2022–23 | 350 | रिकॉर्ड/असाधारण उत्पादन |
| 2023–24 | 328 | हल्की गिरावट, फिर भी ऊँचा स्तर |
| 2024–25 | 80 | प्रारंभिक/आंशिक अनुमान |
| वर्ष | चना उत्पादन (लाख टन) | टिप्पणी |
|---|---|---|
| 2021–22 | 20–22 | MP चना उत्पादन का प्रमुख केंद्र; दलहनों में बड़ी हिस्सेदारी |
| 2022–23 | 18–20 | मौसम के कारण उतार-चढ़ाव संभव |
| 2023–24 | 19–21 | कृषि रिपोर्ट/ट्रेंड आधारित अनुमान |
| 2024–25 | 18–20 | अंतिम आधिकारिक आंकड़े अभी जारी नहीं |
| वर्ष | सरसों उत्पादन (लाख टन) | टिप्पणी |
|---|---|---|
| 2021–22 | 13–17 | आधिकारिक आँकड़ों में ~13.07 लाख टन + वृद्धि दर्ज |
| 2022–23 | 16–18 | पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ोतरी |
| 2023–24 | 15–18 | तिलहन रिपोर्ट/कृषि रुझानों पर आधारित |
| 2024–25 | 16–19 | तिलहन क्षेत्र में सामान्य वृद्धि के साथ अनुमान |


