मॉरीशस की कैबिनेट ने शुक्रवार को मालदीव के साथ सभी कूटनीतिक संबंध तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्णय लिया। यह कदम विवादित चागोस द्वीपसमूह को लेकर उठाया गया है। मॉरीशस पीएम ऑफिस द्वारा जारी विवरण के अनुसार सरकार ने मालदीव के हालिया रुख को अपनी संप्रभुता के खिलाफ माना है। मालदीव ने चागोस द्वीपसमूह पर मॉरीशस के दावे को मान्यता देने से इनकार किया है। इसके अलावा, उसने उस समझौते पर भी आपत्ति जताई है, जिसके तहत यूके ने चागोस द्वीपसमूह को मॉरीशस को सौंपने पर सहमति दी थी।
बढ़ा तनाव
मॉरीशस की कैबिनेट ने कहा कि परिस्थितियों को देखते हुए राजनयिक संबंधों का तत्काल निलंबन आवश्यक समझा गया। इस फैसले से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है और साथ ही हिंद महासागर क्षेत्र में कूटनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका है।
क्या है चागोस द्वीपसमूह और इससे जुड़ा विवाद?
हिंद महासागर में मालदीव से लगभग 500 किलोमीटर दक्षिण में 60 से ज़्यादा द्वीपों का एक समूह है, जिसे चागोस द्वीप समूह कहा जाता है। ये 60 छोटे-छोटे द्वीप मिलकर सात एटॉल का एक समूह बनाता है, जो करीब 2.5 लाख वर्ग मील (करीब 6.47 लाख वर्ग किलोमीटर) क्षेत्र में फैला हुआ है। समझौते के तहत यूके ने चागोस द्वीपसमूह को मॉरीशस को लौटाने पर सहमति दे दी थी , जिसमें डिएगो गार्सिया का महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा कम से कम 99 वर्षों तक यूके-अमेरिका के पास रहेगा।


