जमुई के गिद्धौर प्रखंड स्थित मौरा बालू घाट में जारी अवैध बालू खनन के खिलाफ किसानों का आंदोलन गुरुवार को चौथे दिन और उग्र हो गया। आक्रोशित किसानों ने अनिश्चितकालीन धरने की शुरुआत जमुई के सांसद अरुण भारती और झाझा विधायक दामोदर रावत का पुतला दहन कर की। इस दौरान धरना स्थल पर अरुण भारती मुर्दाबाद, दामोदर रावत मुर्दाबाद और मौरा बालू घाट में अवैध बालू उठाव बंद करो जैसे नारे गूंजते रहे। राजनीतिक संरक्षण में चल रहा अवैध खनन- किसान धरने पर बैठे किसानों और किसान नेताओं का आरोप है कि मौरा बालू घाट में चल रहा अवैध खनन बिना राजनीतिक संरक्षण के संभव नहीं है। किसानों का कहना है कि प्रशासन, खनन विभाग, बालू माफिया और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से सालों से नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे हुए हैं। 2018 में रद्द करने की अनुशंसा, फिर कैसे शुरू हुआ खनन? किसान नेताओं ने बताया कि वर्ष 2018 में तत्कालीन समाहर्ता, जमुई द्वारा पत्रांक 419 के माध्यम से मौरा बालू घाट को रद्द करने की स्पष्ट अनुशंसा की गई थी। इसके बावजूद बाद में उस आदेश को विलोपित कर अवैध दस्तावेजों और मानकों के विपरीत नए आदेश तैयार किए गए। आरोप है कि इन्हीं संदिग्ध आदेशों के आधार पर दोबारा अवैध बालू उत्खनन शुरू कराया गया, जिससे क्षेत्र में भारी आक्रोश है। उपजाऊ जमीन बंजर होने की कगार पर किसानों का कहना है कि लगातार हो रहे अवैध खनन से उनकी उपजाऊ कृषि भूमि बुरी तरह प्रभावित हो रही है। खेतों में रेत भरने से फसल उत्पादन घट रहा है, वहीं जलस्तर भी तेजी से नीचे जा रहा है। इससे किसानों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन को बार-बार शिकायत देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जमीन और पर्यावरण बचाने को मजबूरन आंदोलन- अशोक सिंह अनिश्चितकालीन धरने का नेतृत्व कर रहे किसान नेता अशोक सिंह और भाकपा (माले) के युवा नेता बाबू साहब सिंह ने कहा कि किसान अपनी जमीन, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा के लिए मजबूर होकर आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक मौरा बालू घाट में अवैध खनन पूरी तरह बंद नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रशासन से तत्काल वार्ता की मांग धरना स्थल पर किसानों के समर्थन में पहुंचे समाजसेवी गौरव सिंह राठौड़ ने जिला प्रशासन से शीघ्र वार्ता की मांग की। उन्होंने कहा कि अवैध दस्तावेजों के आधार पर चल रहे खनन पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने समय रहते पहल नहीं की तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। दो दिन का अल्टीमेटम, आमरण अनशन की चेतावनी धरना पर बैठे किसानों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि यदि अगले दो दिनों के भीतर सरकार या प्रशासन का कोई जिम्मेदार प्रतिनिधि सम्मानजनक बातचीत के लिए धरना स्थल पर नहीं पहुंचता है, तो खनन मंत्री विजय सिन्हा का भी पुतला दहन किया जाएगा। साथ ही किसानों ने आमरण अनशन शुरू करने की भी चेतावनी दी है। सैकड़ों किसान रहे मौजूद धरना स्थल पर किसान नेता रणजीत सिंह, मोहम्मद हैदर, सुभाष सिंह, अनिल रावत, सचित रावत, कुमोद सिंह सहित सैकड़ों किसान और वन-पर्यावरण संरक्षण समिति के सदस्य मौजूद रहे। आंदोलन को लेकर पूरे इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है, जबकि प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। जमुई के गिद्धौर प्रखंड स्थित मौरा बालू घाट में जारी अवैध बालू खनन के खिलाफ किसानों का आंदोलन गुरुवार को चौथे दिन और उग्र हो गया। आक्रोशित किसानों ने अनिश्चितकालीन धरने की शुरुआत जमुई के सांसद अरुण भारती और झाझा विधायक दामोदर रावत का पुतला दहन कर की। इस दौरान धरना स्थल पर अरुण भारती मुर्दाबाद, दामोदर रावत मुर्दाबाद और मौरा बालू घाट में अवैध बालू उठाव बंद करो जैसे नारे गूंजते रहे। राजनीतिक संरक्षण में चल रहा अवैध खनन- किसान धरने पर बैठे किसानों और किसान नेताओं का आरोप है कि मौरा बालू घाट में चल रहा अवैध खनन बिना राजनीतिक संरक्षण के संभव नहीं है। किसानों का कहना है कि प्रशासन, खनन विभाग, बालू माफिया और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से सालों से नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे हुए हैं। 2018 में रद्द करने की अनुशंसा, फिर कैसे शुरू हुआ खनन? किसान नेताओं ने बताया कि वर्ष 2018 में तत्कालीन समाहर्ता, जमुई द्वारा पत्रांक 419 के माध्यम से मौरा बालू घाट को रद्द करने की स्पष्ट अनुशंसा की गई थी। इसके बावजूद बाद में उस आदेश को विलोपित कर अवैध दस्तावेजों और मानकों के विपरीत नए आदेश तैयार किए गए। आरोप है कि इन्हीं संदिग्ध आदेशों के आधार पर दोबारा अवैध बालू उत्खनन शुरू कराया गया, जिससे क्षेत्र में भारी आक्रोश है। उपजाऊ जमीन बंजर होने की कगार पर किसानों का कहना है कि लगातार हो रहे अवैध खनन से उनकी उपजाऊ कृषि भूमि बुरी तरह प्रभावित हो रही है। खेतों में रेत भरने से फसल उत्पादन घट रहा है, वहीं जलस्तर भी तेजी से नीचे जा रहा है। इससे किसानों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन को बार-बार शिकायत देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जमीन और पर्यावरण बचाने को मजबूरन आंदोलन- अशोक सिंह अनिश्चितकालीन धरने का नेतृत्व कर रहे किसान नेता अशोक सिंह और भाकपा (माले) के युवा नेता बाबू साहब सिंह ने कहा कि किसान अपनी जमीन, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा के लिए मजबूर होकर आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक मौरा बालू घाट में अवैध खनन पूरी तरह बंद नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रशासन से तत्काल वार्ता की मांग धरना स्थल पर किसानों के समर्थन में पहुंचे समाजसेवी गौरव सिंह राठौड़ ने जिला प्रशासन से शीघ्र वार्ता की मांग की। उन्होंने कहा कि अवैध दस्तावेजों के आधार पर चल रहे खनन पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने समय रहते पहल नहीं की तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। दो दिन का अल्टीमेटम, आमरण अनशन की चेतावनी धरना पर बैठे किसानों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि यदि अगले दो दिनों के भीतर सरकार या प्रशासन का कोई जिम्मेदार प्रतिनिधि सम्मानजनक बातचीत के लिए धरना स्थल पर नहीं पहुंचता है, तो खनन मंत्री विजय सिन्हा का भी पुतला दहन किया जाएगा। साथ ही किसानों ने आमरण अनशन शुरू करने की भी चेतावनी दी है। सैकड़ों किसान रहे मौजूद धरना स्थल पर किसान नेता रणजीत सिंह, मोहम्मद हैदर, सुभाष सिंह, अनिल रावत, सचित रावत, कुमोद सिंह सहित सैकड़ों किसान और वन-पर्यावरण संरक्षण समिति के सदस्य मौजूद रहे। आंदोलन को लेकर पूरे इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है, जबकि प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।


