जमुई में ‘माटी का बल दंगल’ कुश्ती कॉम्पटीशन:डिप्टी CM सम्राट चौधरी करेंगे उद्घाटन, खेल मंत्री श्रेयसी सिंह मुख्य अतिथि

जमुई में ‘माटी का बल दंगल’ कुश्ती कॉम्पटीशन:डिप्टी CM सम्राट चौधरी करेंगे उद्घाटन, खेल मंत्री श्रेयसी सिंह मुख्य अतिथि

जमुई में 14 और 15 फरवरी को दो दिवसीय ‘माटी का बल दंगल’ कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। श्री कृष्ण सिंह स्टेडियम में होने वाले इस कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे। खेल मंत्री श्रेयसी सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी, जबकि बिहार कुश्ती संघ के अध्यक्ष विशाल सिंह विशिष्ट अतिथि होंगे। यह प्रतियोगिता बिहार के खेल विभाग और बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की जा रही है। शनिवार को दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक मुकाबले होंगे। रविवार को दंगल कार्यक्रम का समापन होगा और विजेता पहलवानों को चांदी का गदा प्रदान किया जाएगा। दंगल में लगभग 300 प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद जिलाधिकारी नवीन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस दंगल में लगभग 300 प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि विजेताओं को आकर्षक चांदी के गदे से सम्मानित किया जाएगा। युवाओं को पारंपरिक कुश्ती के प्रति प्रेरित करने के लिए चांदी के गदे को जिले के विभिन्न प्रखंडों में घुमाया जा रहा है। जिलाधिकारी ने गदे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस आयोजन को लेकर खेल प्रेमियों और ग्रामीण युवाओं में काफी उत्साह देखा जा रहा है। ”बिहार में पारंपरिक कुश्ती की एक लोकप्रिय खेल परंपरा” जिलाधिकारी ने ‘माटी का बल दंगल’ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह बिहार में पारंपरिक कुश्ती की एक लोकप्रिय खेल परंपरा है। इसमें पहलवान मिट्टी के अखाड़े में अपनी शारीरिक शक्ति, तकनीक, सहनशीलता और खेल भावना का प्रदर्शन करते हैं। यह प्रतियोगिता ग्रामीण संस्कृति, लोक परंपरा और शारीरिक फिटनेस को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। ‘माटी का दंगल’ हमेशा एक विशेष आकर्षण का केंद्र रहा उन्होंने आगे कहा कि दंगल युवाओं में अनुशासन, परिश्रम और आपसी भाईचारे की भावना विकसित करता है। साथ ही, यह स्थानीय स्तर पर प्रतिभाशाली पहलवानों को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर भी प्रदान करता है। बिहार के विभिन्न मेलों, उत्सवों और सामाजिक आयोजनों में ‘माटी का दंगल’ हमेशा एक विशेष आकर्षण का केंद्र रहा है। यह पहल न केवल पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देती है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का भी एक सशक्त प्रयास है। जमुई में 14 और 15 फरवरी को दो दिवसीय ‘माटी का बल दंगल’ कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। श्री कृष्ण सिंह स्टेडियम में होने वाले इस कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे। खेल मंत्री श्रेयसी सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी, जबकि बिहार कुश्ती संघ के अध्यक्ष विशाल सिंह विशिष्ट अतिथि होंगे। यह प्रतियोगिता बिहार के खेल विभाग और बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की जा रही है। शनिवार को दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक मुकाबले होंगे। रविवार को दंगल कार्यक्रम का समापन होगा और विजेता पहलवानों को चांदी का गदा प्रदान किया जाएगा। दंगल में लगभग 300 प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद जिलाधिकारी नवीन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस दंगल में लगभग 300 प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि विजेताओं को आकर्षक चांदी के गदे से सम्मानित किया जाएगा। युवाओं को पारंपरिक कुश्ती के प्रति प्रेरित करने के लिए चांदी के गदे को जिले के विभिन्न प्रखंडों में घुमाया जा रहा है। जिलाधिकारी ने गदे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस आयोजन को लेकर खेल प्रेमियों और ग्रामीण युवाओं में काफी उत्साह देखा जा रहा है। ”बिहार में पारंपरिक कुश्ती की एक लोकप्रिय खेल परंपरा” जिलाधिकारी ने ‘माटी का बल दंगल’ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह बिहार में पारंपरिक कुश्ती की एक लोकप्रिय खेल परंपरा है। इसमें पहलवान मिट्टी के अखाड़े में अपनी शारीरिक शक्ति, तकनीक, सहनशीलता और खेल भावना का प्रदर्शन करते हैं। यह प्रतियोगिता ग्रामीण संस्कृति, लोक परंपरा और शारीरिक फिटनेस को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। ‘माटी का दंगल’ हमेशा एक विशेष आकर्षण का केंद्र रहा उन्होंने आगे कहा कि दंगल युवाओं में अनुशासन, परिश्रम और आपसी भाईचारे की भावना विकसित करता है। साथ ही, यह स्थानीय स्तर पर प्रतिभाशाली पहलवानों को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर भी प्रदान करता है। बिहार के विभिन्न मेलों, उत्सवों और सामाजिक आयोजनों में ‘माटी का दंगल’ हमेशा एक विशेष आकर्षण का केंद्र रहा है। यह पहल न केवल पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देती है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का भी एक सशक्त प्रयास है।  

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