मथुरा के प्रधान पुजारी कृष्ण बिहारी पाठक पहुंचे कैमूर:मां मुंडेश्वरी का किया दर्शन, रक्तविहीन बलि को बताया अद्भुत चमत्कार

मथुरा के प्रधान पुजारी कृष्ण बिहारी पाठक पहुंचे कैमूर:मां मुंडेश्वरी का किया दर्शन, रक्तविहीन बलि को बताया अद्भुत चमत्कार

मथुरा के श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर के प्रधान पुजारी आचार्य कृष्ण बिहारी पाठक कैमूर पहुंचे। उन्होंने मां मुंडेश्वरी देवी मंदिर में दर्शन किए और मंदिर में होने वाली रक्तविहीन बलि को देखकर इसे एक अद्भुत चमत्कार बताया। सोमवार को आचार्य पाठक का भभुआ प्रमुख प्रतिनिधि गुरु सिंह और उनके सहयोगियों ने भव्य स्वागत किया। इसके बाद सभी ने मिलकर मां मुंडेश्वरी के मंदिर में पूजा-अर्चना की और जगत कल्याण की कामना की। मुंडेश्वरी के दर्शन का मिला सौभाग्य आचार्य पाठक ने बताया कि उन्हें मां मुंडेश्वरी के दर्शन का सौभाग्य मिला, जिससे उन्हें अत्यंत आनंद की अनुभूति हुई। उन्होंने कहा कि मथुरा में प्रधान पुजारी होने के बावजूद, पूरे विश्व में प्रसिद्ध मां मुंडेश्वरी के दर्शन की उनकी लंबे समय से इच्छा थी। उन्होंने मंदिर के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह मंदिर 650 ईसा पूर्व से स्थापित है। यहां एक महामंडलेश्वर महादेव भी विराजमान हैं, जिनका रंग दिन में चार बार बदलता है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता रक्तविहीन बलि है, जिसे उन्होंने अपने आप में एक अद्भुत चमत्कार बताया। खुद को धन्य किया महसूस आचार्य पाठक ने बलि की प्रक्रिया का वर्णन करते हुए कहा कि उन्होंने देखा कि पुजारी बकरे को मां के चरणों में रखकर फूल और अक्षत अर्पित करते हैं, जिससे बकरा मूर्छित हो जाता है। इसके बाद दोबारा फूल और अक्षत अर्पित करने पर बकरा पुनः जीवित हो जाता है। उन्होंने इस नजारे को देखकर खुद को धन्य महसूस किया। आचार्य पाठक ने कहा कि मां ही सबकी कर्ता-धर्ता हैं और उन्होंने मां से पूरे विश्व के कल्याण की प्रार्थना की। मथुरा के श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर के प्रधान पुजारी आचार्य कृष्ण बिहारी पाठक कैमूर पहुंचे। उन्होंने मां मुंडेश्वरी देवी मंदिर में दर्शन किए और मंदिर में होने वाली रक्तविहीन बलि को देखकर इसे एक अद्भुत चमत्कार बताया। सोमवार को आचार्य पाठक का भभुआ प्रमुख प्रतिनिधि गुरु सिंह और उनके सहयोगियों ने भव्य स्वागत किया। इसके बाद सभी ने मिलकर मां मुंडेश्वरी के मंदिर में पूजा-अर्चना की और जगत कल्याण की कामना की। मुंडेश्वरी के दर्शन का मिला सौभाग्य आचार्य पाठक ने बताया कि उन्हें मां मुंडेश्वरी के दर्शन का सौभाग्य मिला, जिससे उन्हें अत्यंत आनंद की अनुभूति हुई। उन्होंने कहा कि मथुरा में प्रधान पुजारी होने के बावजूद, पूरे विश्व में प्रसिद्ध मां मुंडेश्वरी के दर्शन की उनकी लंबे समय से इच्छा थी। उन्होंने मंदिर के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह मंदिर 650 ईसा पूर्व से स्थापित है। यहां एक महामंडलेश्वर महादेव भी विराजमान हैं, जिनका रंग दिन में चार बार बदलता है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता रक्तविहीन बलि है, जिसे उन्होंने अपने आप में एक अद्भुत चमत्कार बताया। खुद को धन्य किया महसूस आचार्य पाठक ने बलि की प्रक्रिया का वर्णन करते हुए कहा कि उन्होंने देखा कि पुजारी बकरे को मां के चरणों में रखकर फूल और अक्षत अर्पित करते हैं, जिससे बकरा मूर्छित हो जाता है। इसके बाद दोबारा फूल और अक्षत अर्पित करने पर बकरा पुनः जीवित हो जाता है। उन्होंने इस नजारे को देखकर खुद को धन्य महसूस किया। आचार्य पाठक ने कहा कि मां ही सबकी कर्ता-धर्ता हैं और उन्होंने मां से पूरे विश्व के कल्याण की प्रार्थना की।  

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