मेरठ में शहीद की पत्नी को नहीं मिली जमीन:हाईकोर्ट ने नगर आयुक्त को दिया 6 सप्ताह में निर्णय का निर्देश, 1987 में हुए थे शहीद

मेरठ में शहीद की पत्नी को नहीं मिली जमीन:हाईकोर्ट ने नगर आयुक्त को दिया 6 सप्ताह में निर्णय का निर्देश, 1987 में हुए थे शहीद

मेरठ की रहने वाली कीर्ति चक्र से सम्मानित शहीद की पत्नी को जमीन आवंटन के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने नगर आयुक्त मेरठ को निर्देश दिए हैं कि याचिका पर नियमानुसार 6 सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए। मामला ग्राम शोभापुर, रोहटा रोड निवासी अबरीशा खातून से जुड़ा है, जो शहीद अजमेर अली की पत्नी हैं। अजमेर अली भारतीय सेना में सैपर ऑपरेटर के पद पर तैनात थे। वर्ष 1987 में लेह-लद्दाख के दुर्गम क्षेत्र में 1800 फीट की ऊंचाई पर तैनाती के दौरान अत्यंत कठिन मौसम और बर्फीली परिस्थितियों में ड्यूटी निभा रहे थे। इसी दौरान बर्फ हटाने के ऑपरेशन में हिमस्खलन की चपेट में आने से वे शहीद हो गए थे। उनकी अदम्य बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा को देखते हुए भारत के राष्ट्रपति ने 22 मार्च 1987 को उन्हें मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया था। शहीद की पत्नी अबरीशा खातून के पास खेती के लिए कोई जमीन नहीं है। उन्होंने शासन और नगर निगम की नीतियों के तहत 25 बीघा जमीन आवंटन की मांग केंद्र और राज्य सरकार से की थी। जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी, मेरठ ने भी उनकी मांग को उचित ठहराते हुए नगर आयुक्त को नियमों के तहत जमीन आवंटन के लिए पत्र भेजा था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अब तक जमीन नहीं मिल सकी। इस पर अबरीशा खातून ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। उनकी ओर से अधिवक्ता सुनील चौधरी ने पक्ष रखते हुए बताया कि सरकार की नीतियों के अनुसार शहीद के परिजनों को जमीन आवंटित किया जाना चाहिए, लेकिन संबंधित विभागों की लापरवाही के कारण यह संभव नहीं हो सका। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति नीरज तिवारी और न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ में हुई। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम की धारा 129(5)(B) के तहत नगर आयुक्त मेरठ को निर्देश दिया कि याची की मांग पर नियमानुसार 6 सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए।

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