शेखपुरा में रविवार देर शाम ईरान पर हुए हमले के विरोध में एक मार्च निकाला गया। मो शाहीन मुमताज और जन सुराज युवा नेता मो क्यूम के नेतृत्व में बड़ी संख्या में मुस्लिम धर्मावलंबियों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारेबाजी की। यह विरोध मार्च जिला मुख्यालय के नगर क्षेत्र की सड़कों पर निकाला गया। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजरायल की नीतियों की निंदा करते हुए भारत से इस मुद्दे पर ईरान का समर्थन करने की अपील की। मार्च बड़ी दरगाह से चांदनी चौक तक चला। प्रदर्शनकारियों ने ईरान के धार्मिक नेता अयातुल्ला खुमैनी और स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की हत्या की कड़ी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल ने विस्तारवादी नीति के तहत ईरान पर बेवजह हमला किया है, क्योंकि ईरान ने उनकी “दादागिरी” के सामने झुकने से इनकार कर दिया था। इस मार्च में शिया समुदाय के लोगों की संख्या अधिक थी। उन्होंने कर्बला के शहीदों की कुर्बानी को याद करते हुए कहा कि वे किसी भी अन्याय या अत्याचार के खिलाफ झुकते नहीं हैं, बल्कि अपना सिर कलम करवाना स्वीकार करते हैं। यह आक्रोश मार्च रमजान महीने में इफ्तार के बाद आयोजित किया गया। रमजान को अल्लाह की रहमत और सुख-शांति का महीना माना जाता है, और ऐसे समय में आक्रमण को मानवता के खिलाफ बताया गया। शेखपुरा में रविवार देर शाम ईरान पर हुए हमले के विरोध में एक मार्च निकाला गया। मो शाहीन मुमताज और जन सुराज युवा नेता मो क्यूम के नेतृत्व में बड़ी संख्या में मुस्लिम धर्मावलंबियों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारेबाजी की। यह विरोध मार्च जिला मुख्यालय के नगर क्षेत्र की सड़कों पर निकाला गया। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजरायल की नीतियों की निंदा करते हुए भारत से इस मुद्दे पर ईरान का समर्थन करने की अपील की। मार्च बड़ी दरगाह से चांदनी चौक तक चला। प्रदर्शनकारियों ने ईरान के धार्मिक नेता अयातुल्ला खुमैनी और स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की हत्या की कड़ी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल ने विस्तारवादी नीति के तहत ईरान पर बेवजह हमला किया है, क्योंकि ईरान ने उनकी “दादागिरी” के सामने झुकने से इनकार कर दिया था। इस मार्च में शिया समुदाय के लोगों की संख्या अधिक थी। उन्होंने कर्बला के शहीदों की कुर्बानी को याद करते हुए कहा कि वे किसी भी अन्याय या अत्याचार के खिलाफ झुकते नहीं हैं, बल्कि अपना सिर कलम करवाना स्वीकार करते हैं। यह आक्रोश मार्च रमजान महीने में इफ्तार के बाद आयोजित किया गया। रमजान को अल्लाह की रहमत और सुख-शांति का महीना माना जाता है, और ऐसे समय में आक्रमण को मानवता के खिलाफ बताया गया।


