मणिपुरी फिल्म ‘बूंग’ ने रचा अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार में इतिहास:ब्रिटिश फिल्म अकादमी में जीत पर प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई और जताया देश पर गर्व

मणिपुरी फिल्म ‘बूंग’ ने रचा अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार में इतिहास:ब्रिटिश फिल्म अकादमी में जीत पर प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई और जताया देश पर गर्व

मणिपुरी भाषा की डेब्यू फीचर फिल्म ‘बूंग’ ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करके ‘बूंग’ की पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह पूरे देश, खासकर मणिपुर के लिए गर्व का क्षण है और यह भारत की रचनात्मक प्रतिभा को दर्शाता है। फिल्म ‘बूंग’ ने इस साल के BAFTA Awards (ब्रिटिश फिल्म एवं टेलीविजन कला अकादमी पुरस्कार) में बाल एवं पारिवारिक फिल्म श्रेणी में जीत हासिल की। यह पहली भारतीय फिल्म बन गई है जिसने इस श्रेणी में पुरस्कार जीता। समारोह लंदन के रॉयल फेस्टिवल हॉल में आयोजित हुआ, जहां फिल्म की टीम मौजूद रही। फिल्म का निर्देशन लक्ष्मीप्रिया देवी ने किया है, जबकि निर्माता फरहान अख्तर, रितेश सिधवानी, विकेश भुटानी, एलन मैकएलेक्स और शुजात सौदागर हैं। यह समारोह में इकलौती भारतीय नामांकित फिल्म थी और उसने ‘जूटोपिया 2’, ‘लीलो एंड स्टिच’ और ‘आर्को’ जैसी अंतरराष्ट्रीय फिल्मों को पीछे छोड़ दिया। निर्देशक लक्ष्मीप्रिया देवी ने जीत के बाद कहा कि ‘बूंग’ का अर्थ मणिपुरी भाषा में छोटा लड़का होता है। कहानी एक ऐसे मासूम बच्चे की है जो अपनी मां के लिए खास उपहार ढूंढना चाहता है। उसे लगता है कि अपने लंबे समय से लापता पिता को वापस लाना ही उसकी मां के लिए सबसे बड़ा तोहफा होगा। इसी खोज के दौरान उसकी जिंदगी एक नई दिशा लेती है। निर्माता फरहान अख्तर ने बताया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से लक्ष्मीप्रिया को जानते हैं और यह उनकी पहली निर्देशित फिल्म है, इसलिए यह पल और भी विशेष है। उन्होंने कहा कि भारत के जिस क्षेत्र से कम फिल्में सामने आती हैं, वहां की कहानी को समर्थन देना उन्हें सही लगा। फिल्म का प्रथम प्रदर्शन 2024 में टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के खोज खंड में हुआ था। इसके बाद इसे वारसॉ अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, मामी मुंबई फिल्म महोत्सव, भारत अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव भारतीय फिल्म महोत्सव, मेलबर्न जैसे प्रमुख फिल्म समारोहों में भी प्रदर्शित किया गया। ‘बूंग’ की यह जीत न सिर्फ भारतीय सिनेमा के लिए, बल्कि क्षेत्रीय भाषाओं की कहानियों के लिए भी एक बड़ा मुकाम मानी जा रही है।

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