मुजफ्फरपुर में रंगों का पर्व होली इस बार भी पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। सुबह की पहली किरण के साथ ही शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर युवाओं और बच्चों की टोलियां रंग-गुलाल लेकर निकल पड़ीं। ढोल-नगाड़ों की थाप और होली गीतों की धुन पर लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर बधाइयां देते नजर आए। हर ओर “होली है” की गूंज सुनाई दे रही थी और वातावरण पूरी तरह उत्सवमय हो उठा। बाबा का विधिवत अभिषेक और श्रृंगार हुआ शहर के प्रमुख धार्मिक स्थल बाबा गरीब नाथ मंदिर में भी आस्था और रंगों का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंदिर में प्रातःकाल बाबा का विधिवत अभिषेक और श्रृंगार किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने श्रृंगार आरती में भाग लिया और आरती के बाद एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। मंदिर के मुख्य पुजारी बाबा विनय पाठक ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी होली के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां एकत्रित हुए हैं। उन्होंने कहा कि बाबा की श्रृंगार आरती के बाद मंदिर परिसर में ही भक्त आपस में गुलाल लगाकर प्रेम और भाईचारे का संदेश देते हैं। यह परंपरा सालों से चली आ रही है और शहर की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है। श्रद्धालुओं ने बताया कि घरों में विशेष पकवान बनाए गए हैं। सुबह रंग और कीचड़ से होली खेलने के बाद शाम को बच्चे, बुजुुर्ग और युवा साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर अबीर-गुलाल के साथ एक-दूसरे के घर पहुंचे। लोगों ने गले मिलकर होली की शुभकामनाएं दीं और मिठाइयों से मुंह मीठा कराया। मुजफ्फरपुर में रंगों का पर्व होली इस बार भी पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। सुबह की पहली किरण के साथ ही शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर युवाओं और बच्चों की टोलियां रंग-गुलाल लेकर निकल पड़ीं। ढोल-नगाड़ों की थाप और होली गीतों की धुन पर लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर बधाइयां देते नजर आए। हर ओर “होली है” की गूंज सुनाई दे रही थी और वातावरण पूरी तरह उत्सवमय हो उठा। बाबा का विधिवत अभिषेक और श्रृंगार हुआ शहर के प्रमुख धार्मिक स्थल बाबा गरीब नाथ मंदिर में भी आस्था और रंगों का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंदिर में प्रातःकाल बाबा का विधिवत अभिषेक और श्रृंगार किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने श्रृंगार आरती में भाग लिया और आरती के बाद एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। मंदिर के मुख्य पुजारी बाबा विनय पाठक ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी होली के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां एकत्रित हुए हैं। उन्होंने कहा कि बाबा की श्रृंगार आरती के बाद मंदिर परिसर में ही भक्त आपस में गुलाल लगाकर प्रेम और भाईचारे का संदेश देते हैं। यह परंपरा सालों से चली आ रही है और शहर की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है। श्रद्धालुओं ने बताया कि घरों में विशेष पकवान बनाए गए हैं। सुबह रंग और कीचड़ से होली खेलने के बाद शाम को बच्चे, बुजुुर्ग और युवा साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर अबीर-गुलाल के साथ एक-दूसरे के घर पहुंचे। लोगों ने गले मिलकर होली की शुभकामनाएं दीं और मिठाइयों से मुंह मीठा कराया।


