औरंगाबाद में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ माले कार्यकर्ताओं का धरना:किसानों की सहमति के बिना जमीन लेने की कही बात, आंदोलन की दी चेतावनी

औरंगाबाद में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ माले कार्यकर्ताओं का धरना:किसानों की सहमति के बिना जमीन लेने की कही बात, आंदोलन की दी चेतावनी

औरंगाबाद में उद्योग स्थापना के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीन के अधिग्रहण के विरोध में भाकपा माले और अखिल भारतीय किसान महासभा के संयुक्त देखरेख में एकदिवसीय धरना दिया गया। कुटुंबा प्रखंड कार्यालय के सामने आयोजित धरना की अध्यक्षता प्रखंड सचिव रमेश पासवान ने की। कार्यक्रम से पूर्व कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय से विरोध मार्च निकाला और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। धरना को संबोधित करते हुए माले नेताओं ने कहा कि सरकार बिना किसानों की सहमति के जबरन भूमि अधिग्रहण कर रही है, जो पूरी तरह अनुचित है। सरकार किसानों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील नहीं नेताओं ने कहा कि किसी भी औद्योगिक परियोजना से पहले प्रभावित किसानों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनकी राय लेना आवश्यक है, लेकिन प्रशासन की ओर से ऐसा नहीं किया जा रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार किसानों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील नहीं है। कुटुंबा में बियाडा के लिए 400 एकड़ भूमिका किया जाना है अधिग्रहण किसान महासभा के जिला सचिव कामता यादव ने कहा कि सरकार की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। किसानों की आय दोगुनी करने का वादा केवल दिखावा साबित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वाराणसी-कोलकाता ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे निर्माण के नाम पर पहले ही कुटुंबा प्रखंड के सैकड़ों किसानों की जमीन अधिग्रहित की जा चुकी है, लेकिन अब तक उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला है। किसानों द्वारा कई बार गुहार लगाने के बावजूद प्रशासन ने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया।उन्होंने कहा कि अब बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बियाड़ा) द्वारा औद्योगिक क्षेत्र के नाम पर कुटुंबा प्रखंड के कई गांवों में लगभग 400 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जा रही है। इससे सैकड़ों किसान भूमिहीन हो जाएंगे और उनकी आजीविका पर संकट उत्पन्न हो जाएगा। निर्माण मजदूर यूनियन संघ के जिला अध्यक्ष बिरजू चौधरी ने कहा कि सड़क और औद्योगिक विकास के नाम पर किसानों को ठगा जा रहा है। खेती किसानों की आजीविका का मुख्य साधन है और बिना सहमति उनकी जमीन लेना उनके जीवन पर सीधा प्रहार है। काराकाट सांसद राजाराम सिंह के प्रतिनिधि वीरेंद्र मेहता ने भी धरना को संबोधित करते हुए केंद्र और राज्य सरकार पर किसान विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वर्षों से लंबित सिंचाई परियोजनाएं अधर में लटकी हुई हैं। दस सूत्री मांगों से संबंधित ज्ञापन सीओ को सौंपा कार्यक्रम के अंत में पार्टी कार्यकर्ताओं ने 10 सूत्री मांगों से संबंधित ज्ञापन अंचल अधिकारी को सौंपा। प्रमुख मांगों में किसान विरोधी भारत-अमेरिका कृषि समझौता रद्द करने, लंबित सिंचाई परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने, नई सिंचाई योजनाएं शुरू करने, उत्तर कोयल नहर परियोजना का कार्य पूरा कराने, न्यूनतम समर्थन मूल्य कानून लागू करने, इंद्रपुरी जिला परियोजना का निर्माण कराने, जबरन भूमि अधिग्रहण पर रोक लगाने, 60 साल से अधिक आयु के किसानों को 10 हजार रुपये मासिक पेंशन देने और संबंधित कानूनों को वापस लेने की मांग शामिल है। धरना के माध्यम से माले नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि किसानों से जबरन जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया नहीं रोकी गई, तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा। औरंगाबाद में उद्योग स्थापना के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीन के अधिग्रहण के विरोध में भाकपा माले और अखिल भारतीय किसान महासभा के संयुक्त देखरेख में एकदिवसीय धरना दिया गया। कुटुंबा प्रखंड कार्यालय के सामने आयोजित धरना की अध्यक्षता प्रखंड सचिव रमेश पासवान ने की। कार्यक्रम से पूर्व कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय से विरोध मार्च निकाला और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। धरना को संबोधित करते हुए माले नेताओं ने कहा कि सरकार बिना किसानों की सहमति के जबरन भूमि अधिग्रहण कर रही है, जो पूरी तरह अनुचित है। सरकार किसानों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील नहीं नेताओं ने कहा कि किसी भी औद्योगिक परियोजना से पहले प्रभावित किसानों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनकी राय लेना आवश्यक है, लेकिन प्रशासन की ओर से ऐसा नहीं किया जा रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार किसानों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील नहीं है। कुटुंबा में बियाडा के लिए 400 एकड़ भूमिका किया जाना है अधिग्रहण किसान महासभा के जिला सचिव कामता यादव ने कहा कि सरकार की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। किसानों की आय दोगुनी करने का वादा केवल दिखावा साबित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वाराणसी-कोलकाता ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे निर्माण के नाम पर पहले ही कुटुंबा प्रखंड के सैकड़ों किसानों की जमीन अधिग्रहित की जा चुकी है, लेकिन अब तक उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला है। किसानों द्वारा कई बार गुहार लगाने के बावजूद प्रशासन ने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया।उन्होंने कहा कि अब बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बियाड़ा) द्वारा औद्योगिक क्षेत्र के नाम पर कुटुंबा प्रखंड के कई गांवों में लगभग 400 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जा रही है। इससे सैकड़ों किसान भूमिहीन हो जाएंगे और उनकी आजीविका पर संकट उत्पन्न हो जाएगा। निर्माण मजदूर यूनियन संघ के जिला अध्यक्ष बिरजू चौधरी ने कहा कि सड़क और औद्योगिक विकास के नाम पर किसानों को ठगा जा रहा है। खेती किसानों की आजीविका का मुख्य साधन है और बिना सहमति उनकी जमीन लेना उनके जीवन पर सीधा प्रहार है। काराकाट सांसद राजाराम सिंह के प्रतिनिधि वीरेंद्र मेहता ने भी धरना को संबोधित करते हुए केंद्र और राज्य सरकार पर किसान विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वर्षों से लंबित सिंचाई परियोजनाएं अधर में लटकी हुई हैं। दस सूत्री मांगों से संबंधित ज्ञापन सीओ को सौंपा कार्यक्रम के अंत में पार्टी कार्यकर्ताओं ने 10 सूत्री मांगों से संबंधित ज्ञापन अंचल अधिकारी को सौंपा। प्रमुख मांगों में किसान विरोधी भारत-अमेरिका कृषि समझौता रद्द करने, लंबित सिंचाई परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने, नई सिंचाई योजनाएं शुरू करने, उत्तर कोयल नहर परियोजना का कार्य पूरा कराने, न्यूनतम समर्थन मूल्य कानून लागू करने, इंद्रपुरी जिला परियोजना का निर्माण कराने, जबरन भूमि अधिग्रहण पर रोक लगाने, 60 साल से अधिक आयु के किसानों को 10 हजार रुपये मासिक पेंशन देने और संबंधित कानूनों को वापस लेने की मांग शामिल है। धरना के माध्यम से माले नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि किसानों से जबरन जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया नहीं रोकी गई, तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा।  

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